पाली. राजस्थान अपने ऐतिहासिक किलों और महलों के लिए जितना मशहूर है, उतना ही लाजवाब यहां का पारंपरिक खान-पान भी है. अक्सर गर्मियों और बारिश के इस सुहाने मौसम में ऐसा होता है कि रोज-रोज वही दाल-सब्जी खाकर जुबान का स्वाद फीका पड़ जाता है और कुछ तीखा-चटपटा खाने की तलब होती है. अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है कि भूख तो है पर खाना खाने की इच्छा नहीं हो रही, तो चिंता मत कीजिए. आज हम आपको लेकर आए हैं सीधे मारवाड़ के एक पारंपरिक रसोई घर में, जहां की ‘मारवाड़ी टपोरेदार देसी मिर्च’ (या मिर्च के अचार) की खुशबू ही आपकी भूख को चार गुना बढ़ा देगी.

अगर आप राजस्थान में हैं, तो यह देसी हरी मिर्च आपको किसी भी स्थानीय सब्जी मंडी में आसानी से मिल जाएगी. लेकिन अगर आप राजस्थान से बाहर किसी अन्य राज्य में रहते हैं, तो आप इसे ऑनलाइन ग्रोसरी ऐप्स या ‘ओटीपी’ वेबसाइट्स के जरिए सीधे जोधपुर या पाली की मंडियों से ऑर्डर कर सकते हैं. इसके अलावा, आजकल कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर ‘जोधपुरी मोटी मिर्च’ के नाम से भी यह आसानी से उपलब्ध है. आइए जानते हैं इसे बनाने का एकदम पारंपरिक तरीका.

टपोरेदार देसी मिर्च बनाने के लिए इन सामाग्रियों की पड़ेगी जरूरत

‘मारवाड़ी टपोरेदार देसी मिर्च’ बनाने के लिए कुछ खास सामाग्रियों की जरूरत पड़ती है. इसको बनाने के लिए  देसी हरी मिर्च 250 ग्राम मोटे आकार वाली, जो ज्यादा तीखी न हो, अचार को खराब होने से बचाने के लिए 4 से 5 बड़े चम्मच सरसों का तेल, दरदरी पिसी हुई 2 छोटे चम्मच राई, दरदरी कुटी हुई 2 छोटे चम्मच सौंफ, हल्का दरदरा एक छोटा चम्मच मेथी दाना, आधा छोटा चम्मच कलोंजी यानी मंगरेल, 1 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, तेज महक वाली एक चौथाई छाेटा चम्मच हींग, खटास  के लिए 2 छोटे चम्मच अमचूर पाउडर या नींबू का रस और स्वादानुसार नमक की जरूरत पड़ती है.

‘मारवाड़ी टपोरेदार देसी मिर्च’ बनाने की विधि

सबसे पहले पहले हरी मिर्च को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें. अब इन्हें एक साफ कपड़े पर फैलाकर पूरी तरह सुखा लें. ध्यान रहे, मिर्च में थोड़ा भी पानी या नमी नहीं रहनी चाहिए, नहीं तो अचार जल्दी खराब हो सकता है. सूखने के बाद मिर्च के डंठल हटाकर इन्हें गोल या लंबे टुकड़ों में काट लें. इसके बाद एक कटोरी में पिसी हुई राई, सौंफ, मेथी दाना, कलौंजी, हल्दी, हींग और नमक को एक साथ मिलाकर मसाला तैयार कर लें. अब एक कढ़ाई में सरसों का तेल डालें और उसे तब तक गर्म करें जब तक कि उसमें से धुआं न निकलने लगे. इसके बाद गैस बंद कर दें और तेल को थोड़ा गुनगुना होने दें. अब इस गुनगुने तेल में थोड़ा सा हींग डालें, फिर कटी हुई हरी मिर्च और तैयार किया हुआ मसाला डाल दें. चम्मच की मदद से मसाले और मिर्च को तेल के साथ अच्छी तरह मिला लें ताकि हर मिर्च पर मसाले की कोटिंग हो जाए. अंत में इसमें अमचूर पाउडर या दो ताजे नींबू का रस निचोड़कर अच्छी तरह मिला लें. आपकी चटपटी मारवाड़ी देसी मिर्च तैयार है.

इस सिक्रेट से महीनों खराब नहीं होगी मारवाड़ी देसी मिर्च

इस मिर्च को आप तुरंत भी खा सकते हैं, लेकिन इसका असली स्वाद 2 दिन बाद निखर कर आता है. इसे महीनों तक सुरक्षित रखने के लिए एक सूखे और साफ कांच के जार में भर लें. ध्यान रखें कि अचार में तेल का स्तर मिर्च से थोड़ा ऊपर होना चाहिए. इस पारंपरिक तरीके से बनी मिर्च के आगे पनीर की सब्जी भी फीकी लगेगी, और आप एक की जगह चार रोटियां चट कर जाएंगे.



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