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Rajasthan Matka Mutton Recipe: राजस्थान का पारंपरिक “मटका मटन” अपनी अनूठी खुशबू और देसी स्वाद के लिए प्रसिद्ध है. मिट्टी की हांडी में धीमी आंच पर दम देकर पकाया जाने वाला यह व्यंजन आज भी राजस्थानी घरों की शान है. ताजे मटन को खड़े मसालों, अदरक-लहसुन के पेस्ट और प्याज के साथ मटके में सील कर एक घंटे तक पकाया जाता है. मिट्टी की सोंधी महक और धीमी आंच की जुगलबंदी इस डिश को बेहद लजीज बनाती है, जिसे अक्सर बाजरे की रोटी या चावल के साथ परोसा जाता है.

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Rajasthan Traditional Food: राजस्थान की रसोई अपने पारंपरिक स्वाद और देसी व्यंजनों के लिए देशभर में मशहूर है. गर्मियों के मौसम में यहां कई ऐसी खास रेसिपी बनाई जाती हैं, जो स्वाद के साथ सेहत और परंपरा का भी हिस्सा होती हैं. इन्हीं में से एक है “मटका मटन”, जो वर्षों से राजस्थान के कई घरों में खास मौके और पारिवारिक जमावड़ों पर बनाया जाता रहा है. मिट्टी के मटके में धीमी आंच पर पकने वाला यह मटन अपने अलग स्वाद और खुशबू के लिए जाना जाता है.

इस रेसिपी की खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए ज्यादा कठिन तैयारी की जरूरत नहीं होती. घर में मौजूद सामान्य मसालों और ताजा मटन से इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है. सबसे पहले फ्रेश मटन लिया जाता है और उसके बराबर मात्रा में प्याज काटकर तैयार किया जाता है. इसके बाद खड़े मसालों में लौंग, काली मिर्च, इलायची, दालचीनी और साबुत लाल मिर्च का इस्तेमाल किया जाता है, जो इस डिश को खास स्वाद देते हैं.

मसालों का जादू और मटके का कमाल
इसके साथ अदरक, लहसुन और हरी मिर्च का ताजा पेस्ट तैयार किया जाता है. फिर एक पैन में तेल गर्म कर उसमें खड़े मसालों को अच्छे से भुना जाता है ताकि मसालों की खुशबू तेल में अच्छी तरह उतर जाए. दूसरी तरफ मिट्टी की हांडी या मटके को अंदर से तेल लगाकर अच्छी तरह कोट किया जाता है, जिससे पकाते समय मसाले और मटन चिपके नहीं. राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में मिट्टी के बर्तनों का उपयोग भोजन के पोषक तत्वों को बनाए रखने के लिए सदियों से किया जा रहा है.

दम लगाने की अनोखी प्रक्रिया
अब मटन में प्याज, अदरक-लहसुन का पेस्ट और बाकी मसाले जैसे लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी और नमक डालकर अच्छे से मिक्स किया जाता है. कुछ देर मेरिनेट करने के बाद इस पूरे मिश्रण को मटके में डाल दिया जाता है. फिर मटके का मुंह आटे से बंद कर दम लगाया जाता है ताकि अंदर की भाप बाहर न निकले और मटन धीरे-धीरे अपने रस में पक सके. पारंपरिक तरीके से इसे धीमी आंच पर करीब एक घंटे तक पकाया जाता है. बीच-बीच में मटके को हल्का हिलाया भी जाता है ताकि मसाले अच्छे से मिलते रहें. जब मटन पूरी तरह गल जाता है तो उसकी खुशबू पूरे घर में फैल जाती है. तैयार मटका मटन को बाजरे की रोटी, तंदूरी रोटी या चावल के साथ परोसा जाता है.

परंपरा जो आज भी जिंदा है
राजस्थान की यह पारंपरिक रेसिपी आज भी लोगों के बीच काफी पसंद की जाती है. खासकर गांवों और पुराने परिवारों में गर्मियों के दौरान इसका स्वाद आज भी परंपरा की तरह जिंदा है. यह न केवल एक व्यंजन है, बल्कि राजस्थान की समृद्ध संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा भी है.

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vicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें



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