मिथिलांचल के ग्रामीण इलाकों में आज भी तीसी की चटनी बड़े चाव से खाई जाती है. पुराने लोग महीने में दो-तीन बार इस चटपटी चटनी का स्वाद जरूर लेते हैं. तीसी की फसल आने के बाद लोग इसे सुखाकर सालभर के लिए घर में रख लेते हैं और इससे कई तरह के व्यंजन बनाते हैं. तीसी की चटनी बहुत जल्दी तैयार हो जाती है. इसे बनाने के लिए तीसी, प्याज, हरी मिर्च, नमक और कच्चे सरसों तेल की जरूरत होती है. सबसे पहले तीसी और सूखी लाल मिर्च को हल्का भूनकर पीस लिया जाता है. इसके बाद एक कटोरे में तीसी का पाउडर डालकर उसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, नमक और थोड़ा कच्चा सरसों तेल मिलाया जाता है. जरूरत अनुसार थोड़ा पानी डालते ही स्वादिष्ट चटनी तैयार हो जाती है. तीसी की सेहत के लिए भी अमृत है. इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो दिल की सेहत और ब्लज प्रेशर के लिए फायदेमंद मानी जाती है.