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Mirzapur ka lal peda : मिर्जापुर का लाल पेड़ा हमेशा से मशहूर रहा है. जिले के शिवपुर में लाल पेड़े का कारोबार होता है, जहां पर इसकी 65 दुकानें हैं. इस काम से करीब 400 लोग जुड़े हुए हैं. लाल पेड़े को एक जिला एक उत्पाद के तहत चुना गया है. एक जिला एक उत्पाद में आने का बाद सरकार की ओर से इस कारोबार से जुड़े लोगों को 25 लाख रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक की परियोजना लागत पर अनुदान दिया जाएगा. 25 लाख रुपये पर 25 प्रतिशत का अनुदान, 25 लाख से अधिक 50 लाख की परियोजना पर 20 प्रतिशत और 50 लाख से डेढ़ करोड़ तक की परियोजना पर 10 प्रतिशत का अनुदान प्रदान किया जाएगा. मिर्जापुर के लाल पेड़े को बहुत बारीकी से तैयार किया जाता है.
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में बनने वाले लाल पेड़े को एक जिला एक उत्पाद में शामिल किए जाने के बाद से उसे नया स्थान मिल गया है. एक जिला एक उत्पाद में शामिल किए जाने के बाद से कारीगरों और कारोबारियों को आर्थिक रूप से मजबूत करने को लेकर सरकार की ओर से प्रोत्साहित किया जा रहा है. सरकार की ओर से लाल पेड़ा कारोबार से जुड़े व्यवसाइयों को अनुदान दिया जा रहा है.
मिर्जापुर जिले के शिवपुर में लाल पेड़े का कारोबार होता है, जहां पर 65 दुकानें लाल पेड़े का कारोबार करती हैं. इन दुकानों से करीब 400 लोग जुड़े हुए हैं. यहां का लाल पेड़ा दूर-दूर तक मशहूर है. एक जिला एक उत्पाद के तहत चयनित होने के बाद इसकी डिमांड बढ़ गई है. इससे इसे राष्ट्रिय स्तर पर पहचान मिल रही है.
मिर्जापुर में लाल पेड़े को बहुत बारीकी से तैयार किया जाता है. तैयार करने के बाद परंपरागत तरीके से इसे ग्राहकों को दिया जाता है. लाल पेड़े में शुद्ध खोए का इस्तेमाल होता है. इसमें चीनी और इलायची इत्यादि का भी प्रयोग किया जाता है.
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अब लाल पेड़े के कारोबार को बढ़ाने के लिए उद्योग विभाग की ओर से अनुदान दिया जा रहा है. इस कारोबार से जुड़े लोगों को 25 लाख रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक की परियोजना लागत पर अनुदान दिया जाएगा. 25 लाख रुपये पर 25 प्रतिशत का अनुदान, 25 लाख से अधिक 50 लाख की परियोजना पर 20 प्रतिशत और 50 लाख से डेढ़ करोड़ तक की परियोजना पर 10 प्रतिशत का अनुदान प्रदान किया जाएगा.
लाल पेड़े को एक जिला एक उत्पाद में शामिल किए जाने के बाद यहां के कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. लाल पेड़े की पैकेजिंग, गुणवत्ता और स्वच्छता के मानकों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि, मिर्जापुर के बने यह लाल पड़े जल्दी खराब न हों और देश-विदेश के बाजारों तक आसानी से पहुंच सकें.
लाल पेड़े बनाने वाले राहुल लोकल 18 से बताते हैं कि उनकी चौथी पीढ़ी इस कारोबार से जुड़ी हुई है. लाल पेड़े को बेहद बारीकी से तैयार किया जाता है. शुद्ध खोए और चीनी के मिश्रण से इसे बनाया जाता है. कुशल कारीगर ही इसे बना पाते हैं.
मिर्जापुर जिले में लाल पेड़े का कारोबार आधुनिक रूप में करीब 50 से 60 वर्षों से चला रहा है. राहुल के मुताबिक, हम लोगों के दादाजी इस कारोबार से जुड़े हुए थे. उनके परदादा ने ये कारोबार शुरू किया था. आज इसे चौथी पीढ़ी संभाल रही है.
मिर्जापुर के शिवपुर के लाल पेड़े की डिमांड न सिर्फ मिर्जापुर में रहती है. बल्कि, विदेशों में भी इसकी खूब मांग है. लाल पेड़े की खासियत की वजह से लोग इसे खूब पसंद भी कर रहे हैं. एक जिला एक उत्पाद में शामिल होने के बाद डिमांड और बढ़ी है.