पलामू: शाम होते ही कुछ चटपटा और स्वादिष्ट खाने का मन हर किसी का करता है. हालांकि कई ऐसी डिश होती हैं, जो खाने में बेहद लजीज होती हैं, लेकिन उन्हें बनाना थोड़ा मुश्किल माना जाता है. ऐसे में अगर आपको कुछ अलग और पारंपरिक स्वाद चखना हो तो ‘महुआ खोया’ एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. जो कि मध्य प्रदेश के इलाकों में काफी फेमस डिश है. आइये जानते हैं इसकी रेसिपी के बारे में.
फूड एक्सपर्ट ने दी जानकारी
पलामू की फूड एक्सपर्ट अर्पणा बताती हैं कि मध्यप्रदेश के पातालकोट क्षेत्र में बनने वाली यह खास डिश आज धीरे-धीरे लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है. महुआ के फूलों से तैयार किया जाने वाला यह खोया स्वाद में मीठा, हल्का चटपटा और पूरी तरह देसी फ्लेवर से भरपूर होता है. जो कि झारखंड की महिलाओं को बनाना सिखाया जा रहा है.
बता दें कि पलामू टाइगर रिजर्व के द्वारा लातेहार जिले के छिपादोहर में आयोजित महुआ उत्सव मनाया जा रहा है. जहां की पारंपरिक स्वाद की अनोखी झलक देखने को मिल रही है. यहां की फूड एक्सपर्ट अर्पणा कुमारी ने ‘महुआ खोया’ नाम की खास डिश के बारे में जानकारी दी, जो आदिवासी संस्कृति और खानपान की अधिक जानकारी रखती हैं. उन्होंने बताया कि यह डिश मध्य प्रदेश की ट्राइबल कम्युनिटी में भी लंबे समय से बनाई जाती रही है और वहां के लोगों के दैनिक स्नैक्स का हिस्सा है. जो कि झारखंड के लोगों को भी बताया जा रहा है.
अर्पणा ने आगे बताया कि आमतौर पर महुआ का नाम सुनते ही लोगों के मन में मीठे पकवान का ख्याल आता है, लेकिन ‘महुआ खोया’ इसका बिल्कुल अलग रूप है. यह डिश मीठा होने के साथ-साथ तीखा, खट्टा और चटपटा स्वाद लिए होता है, जो इसे बेहद खास बनाता है. यही अनोखा फ्लेवर इसे पारंपरिक स्नैक्स की श्रेणी में अलग पहचान दिलाता है.
जानें महुआ खोया रेसिपी
उन्होंने कहा कि इस स्वादिष्ट डिश को बनाने की प्रक्रिया भी काफी दिलचस्प है. सबसे पहले सूखे महुआ के फूलों को साफ कर कड़ाही में बिना तेल के हल्का भून लिया जाता है, जिससे इसकी खुशबू और स्वाद और भी निखर कर सामने आता है. इसके बाद भुने हुए महुआ को पत्ते के बने थाल में निकाल लिया जाता है. फिर इसमें कूटी हुई लाल मिर्च, नमक और सरसों का तेल मिलाकर अच्छे से मिक्स किया जाता है, ताकि हर कण में मसालों का स्वाद समा जाए.
कुछ ही मिनट में तैयार होती है ये रेसिपी
उन्होंने कहा कि इसके बाद इस मिश्रण को थाली के बीच में थोड़ा खाली कर गड्ढे जैसा आकार दिया जाता है. इस गड्ढे में जलता हुआ लकड़ी या कोयले का छोटा टुकड़ा रखा जाता है, जिससे निकलने वाला धुआं महुआ के साथ मिलकर उसमें स्मोकी फ्लेवर भर देता है. यह प्रक्रिया इस डिश को और भी खास बनाती है. अंत में इसमें ताजा नींबू का रस डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है. जहां कुछ ही मिनटों में तैयार होने वाला यह ‘महुआ खोया’ स्वाद का ऐसा संगम है, जो पारंपरिकता और नए प्रयोग का बेहतरीन उदाहरण है. महुआ उत्सव में इसे चखने वाले लोग इसकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं. यह डिश न सिर्फ स्वाद में अलग है, बल्कि आदिवासी संस्कृति की पहचान भी है.