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Moong Dal Mangode Recipe: ग्रामीण अंचलों में आज भी मंगोड़े बनाने के लिए मूंग दाल को सिलबट्टे पर दरदरा पीसा जाता है. माना जाता है कि सिलबट्टे पर पिसी दाल से मंगोड़े ज्यादा स्वादिष्ट और कुरकुरे बनते हैं. वहीं शहरों में लोग मिक्सी का इस्तेमाल करते हैं लेकिन दाल को बिना ज्यादा पानी के दरदरा पीसना ही इसकी असली खासियत होती है.
शिवपुरी. मध्य प्रदेश के चंबल अंचल की पहचान केवल अपने ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों से ही नहीं बल्कि यहां के पारंपरिक स्वाद से भी है. बरसात का मौसम शुरू होते ही शिवपुरी समेत पूरे चंबल क्षेत्र के घरों में गरमागरम मूंग दाल के मंगोड़े बनने लगते हैं. कुरकुरे, हल्के और मसालेदार मंगोड़े यहां मेहमान नवाजी का ऐसा व्यंजन हैं, जिसे रिश्तेदारों और मेहमानों के स्वागत में सबसे पहले परोसा जाता है. शाम की चाय हो या बारिश की फुहार, मंगोड़ों का स्वाद हर उम्र के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है.
ग्रामीण अंचलों में आज भी मंगोड़े बनाने के लिए मूंग दाल को रातभर भिगोकर सिलबट्टे पर दरदरा पीसा जाता है. माना जाता है कि सिलबट्टे पर पिसी दाल से मंगोड़े अधिक स्वादिष्ट और कुरकुरे बनते हैं. वहीं शहरों में लोग मिक्सी का उपयोग करते हैं लेकिन दाल को बिना ज्यादा पानी के दरदरा पीसना ही इसकी असली खासियत मानी जाती है.
मंगोड़े बनाने के लिए जरूरी सामग्री
एक कप धुली मूंग दाल (4–5 घंटे भिगोई हुई)
दो हरी मिर्च बारीक कटी हुई
एक छोटा चम्मच कद्दूकस किया अदरक
एक चुटकी हींग
एक छोटा चम्मच जीरा
आधा छोटा चम्मच धनिया पाउडर
लाल मिर्च और नमक स्वादानुसार
बारीक कटा हरा धनिया
तलने के लिए सरसों या रिफाइंड तेल
मंगोड़े बनाने का आसान तरीका
सबसे पहले भीगी हुई मूंग दाल को अच्छी तरह धो लें. इसके बाद सिलबट्टे या मिक्सी में दाल को दरदरा पीस लें. तैयार मिश्रण में हींग, जीरा, अदरक, हरी मिर्च, धनिया पाउडर, नमक और हरा धनिया मिलाएं. अब इस घोल को 3 से 5 मिनट तक अच्छी तरह फेंटें, जिससे मंगोड़े हल्के और फूले हुए बनें. कड़ाही में तेल गरम करें और छोटे-छोटे हिस्से डालकर मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक तलें.
इन चटनियों के साथ बढ़ जाता है स्वाद
चंबल क्षेत्र में मूंग दाल के मंगोड़े हरी धनिया-पुदीना चटनी, लहसुन की तीखी चटनी और इमली की मीठी चटनी के साथ परोसे जाते हैं. कई घरों में इन्हें गरमागरम कड़क चाय के साथ नाश्ते में भी परोसा जाता है.
गौरतलब है कि बरसात के मौसम में यह पारंपरिक व्यंजन केवल स्वाद ही नहीं बल्कि चंबल की मेहमाननवाजी और स्थानीय खानपान की समृद्ध परंपरा का भी प्रतीक माना जाता है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.