Highlights
- संसद के आखिरी चार दिनों के लिए सत्ता और विपक्ष ने जारी किया व्हिप।
- डिलिमिटेशन, महिला आरक्षण और FCRA बिल को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल।
- DMK और YSR कांग्रेस के रुख पर टिकी सरकार की दो-तिहाई बहुमत की उम्मीद।
नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी 4 दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं। कांग्रेस ने अपने सभी सांसदों के लिए व्हिप जारी कर दिया है, वहीं बीजेपी ने भी अपने सांसदों और NDA के सहयोगी दलों से सदन में मौजूद रहने को कहा है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह डिलिमिटेशन (परिसीमन), महिला आरक्षण और FCRA बिल को लेकर बढ़ा सस्पेंस है। विपक्ष को आशंका है कि सरकार आखिरी समय में इनमें से कोई बड़ा विधेयक पेश कर सकती है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी विपक्षी दलों से अपने सांसदों की मौजूदगी सुनिश्चित करने की अपील की है।
अभी तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं
हालांकि सरकार ने अभी तक इन विधेयकों को पेश करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ कहा है कि डिलिमिटेशन और महिला आरक्षण बिल सरकार की प्राथमिकता हैं। उन्होंने कहा कि दोनों विधेयक जरूर आएंगे, लेकिन कब पेश होंगे और कब पारित होंगे, इसकी जानकारी बाद में दी जाएगी। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नए सांसदों के साथ बैठक और गृह मंत्री अमित शाह की अलग-अलग दलों के सांसदों से मुलाकात ने सियासी हलचल और तेज कर दी है।
पहले FCRA बिल को पेश करेगी सरकार?
डिलिमिटेशन और महिला आरक्षण विधेयक पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जबकि FCRA बिल साधारण बहुमत से पारित हो सकता है। माना जा रहा है कि सरकार पहले FCRA बिल पेश कर राजनीतिक समर्थन का माहौल बनाना चाहती है। इसी रणनीति के तहत अमित शाह ने चर्च प्रतिनिधियों और FCRA से जुड़े पक्षों से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व DMK सांसद पी. विल्सन ने किया। उन्होंने सरकार से विवादित प्रावधान हटाने या बिल को JPC के पास भेजने की मांग की। उनका कहना था कि मौजूदा प्रावधान के तहत विदेशी चंदे का हिसाब न देने पर संस्थाओं की संपत्ति सरकार के कब्जे में जा सकती है, जिसका दुरुपयोग संभव है। बता दें कि चर्चों और ईसाई संगठनों ने भी ऐसी ही आशंका जताई है।
DMK के समर्थन पर भी है सरकार की नजर
सरकार की नजर अब DMK के समर्थन पर भी है। सूत्रों के मुताबिक डिलिमिटेशन बिल को लेकर दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है। DMK ने सरकार के सामने 3 शर्तें रखी हैं:
- जनगणना के आधार पर सीटों की संख्या पर लगी रोक अगले 25 साल तक जारी रहे
- सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत समान बढ़ोतरी हो
- नए परिसीमन के साथ संशोधित सीटों की पूरी सूची जारी की जाए।
माना जा रहा है कि इनमें से कुछ मांगों पर सहमति बन सकती है। वहीं YSR कांग्रेस के सांसदों ने भी अमित शाह से मुलाकात की। आधिकारिक तौर पर चर्चा जगन मोहन रेड्डी की सुरक्षा को लेकर हुई, लेकिन परिसीमन पर भी बातचीत होने की चर्चा है। दरअसल, पार्टी के सांसद जी. बाबू राव ने कहा कि परिसीमन संवैधानिक प्रक्रिया है और उन्हें भरोसा है कि सरकार जरूरी समर्थन जुटाने के बाद ही यह विधेयक संसद में लाएगी।
जानें, क्यों अहम हैं मॉनसून सत्र के आखिरी 4 दिन
संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी 4 दिन इसलिए बेहद अहम माने जा रहे हैं क्योंकि सरकार डिलिमिटेशन, महिला आरक्षण और FCRA जैसे बड़े विधेयकों को पेश कर सकती है। कांग्रेस ने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है, जबकि बीजेपी और NDA ने भी सदस्यों को सदन में मौजूद रहने को कहा है। हालांकि सरकार ने अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन किरेन रिजिजू के बयानों और प्रधानमंत्री मोदी-अमित शाह की बैठकों से सियासी हलचल बढ़ गई है। डिलिमिटेशन और महिला आरक्षण के लिए दो-तिहाई समर्थन जरूरी है, इसलिए सरकार DMK और YSR कांग्रेस जैसे दलों से समर्थन जुटाने में लगी है।
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