कांग्रेस सांसद एवं विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने नव नियुक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी पर “बलात्कारियों को संरक्षण देने” का आरोप लगाया और उन्हें “सबसे घिनौना आदमी” बताया। इससे पहले प्रियंका गांधी ने प्रल्हाद जोशी की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार पर हमला करते हुए आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री ने “ऐसे व्यक्ति को चुना है जिसने गर्भवती महिला से बलात्कार के दोषियों की रिहाई पर सहमति और यहां तक ​​कि खुशी भी जताई थी।”

इससे अधिक शर्मनामक बात नहीं हो सकती

संसद परिसर में राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “देश में शिक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर युवाओं के प्रदर्शन के बाद भाजपा ने भारत के शिक्षा मंत्री के रूप में ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया है, जो बलात्कारियों का बचाव करता है। इससे अधिक शर्मनाक बात नहीं हो सकती कि कोई व्यक्ति बलात्कारियों को संरक्षण दिए जाने की वकालत करे और वही आज देश का शिक्षा मंत्री हो।”


 

सत्ता पक्ष के सांसदों ने प्रियंका की टिप्पणी पर जताई आपत्ति

लोकसभा में प्रियंका गांधी की टिप्पणियों पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उन पर संसद में मानहानिकारक बयान देने का आरोप लगाया। रिजिजू ने कहा कि ये टिप्पणियां “चरित्र हनन” के समान हैं। उन्होंने इन्हें कार्यवाही से हटाने की मांग की। 

रिजिजू ने कहा, “यह संसद के भीतर चरित्र हनन के समान है। हम इस तरह की भाषा की उम्मीद नहीं करते हैं। इन बयानों को रिकॉर्ड से हटा दिया जाना चाहिए। इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्हें सदन से माफी मांगनी चाहिए।’ 

आंसू गैस के गोले और पेलेट गन का इस्तेमाल क्यों किया

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई को हुए पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए प्रियंका ने संसद में पूछा कि सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर छात्रों के खिलाफ आंसू गैस के गोले और पेलेट गन का इस्तेमाल क्यों किया?

उन्होंने कहा, “देश के युवाओं पर पेलेट गन और एके-47 चलाने की क्या जरूरत थी? क्या वे आतंकवादी थे? पेलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया? क्या यह प्रधानमंत्री का आदेश था? क्या यह गृह मंत्री का आदेश था? उन्हें जवाब देना होगा। पूरा देश यह सवाल पूछ रहा है। यह सिर्फ कांग्रेस पार्टी नहीं, बल्कि पूरा देश जवाब की मांग कर रहा है।” 

प्रियंका ने सरकार से मांगी जवाबदेही

कांग्रेस सांसद ने पुलिस कार्रवाई के लिए जवाबदेही भी मांगी और पूछा कि प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पेलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था। उन्होंने पूछा, “पेलेट गन का इस्तेमाल करने और छात्रों की आवाज दबाने का आदेश किसने दिया?” साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से यह स्पष्टीकरण देने की मांग की कि परीक्षा विवाद को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल का प्रयोग क्यों किया गया।

 देश की परीक्षा और शिक्षा प्रणाली हो चुकी विफल

प्रियंका ने आगे आरोप लगाया कि देश की परीक्षा और शिक्षा प्रणाली विफल हो चुकी है। बार-बार होने वाले प्रश्नपत्र लीक ने छात्रों का विश्वास चकनाचूर कर दिया है। उन्होंने कहा, “शिक्षा प्रणाली में खामियां आ गई हैं। परीक्षा प्रणाली विफल हो गई है। किसी भी माफिया सदस्य को सजा नहीं मिली है।” उन्होंने परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में सरकार की विफलता का आरोप लगाया।

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