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अगर आप स्वाद और सेहत दोनों का परफेक्ट कॉम्बिनेशन चाहते हैं, तो देसी काले चने का छोला बेहतरीन विकल्प है. बलिया के एक छात्र ने मां से सीखी इस आसान रेसिपी को साझा किया है, जो कम सामग्री में शानदार स्वाद देती है. प्रोटीन और फाइबर से भरपूर यह डिश नाश्ते या लंच दोनों के लिए शानदार है.
बलिया: क्या आप रोज़ाना एक जैसा नाश्ता करते-करते ऊब चुके हैं? तो काले देसी चने का छोला आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. जी हां इसके स्वाद के आगे काबुली चना फेल है. देसी मसालों की खुशबू और काले चने के दमदार स्वाद से तैयार यह पारंपरिक व्यंजन आज भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. इसको बनाने में भी कोई तामझाम नहीं है.
खास बात तो यह है कि, इसका न केवल स्वाद लाजवाब है, बल्कि जानकारों के मुताबिक प्रोटीन, फाइबर और पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है. आइए जानते हैं काले चने के छोले की आसान रेसिपी, जिसके बाद हर निवाला ही यादगार बन जाएगा.
जनपद बलिया के बांसडीह तहसील अंतर्गत केवटलिया चौबे गांव निवासी मंटू कुमार भारद्वाज ने कहा कि वह फिलहाल अपने मित्रों के साथ गृह जनपद के शहर में किराए का रूम लेकर रहते हैं और पढ़ाई करते हैं. इन लोगों को खुद खुद ही खाना बनाना पड़ता है. हालांकि, मंटू अलग-अलग व्यंजन बनाते रहते हैं, जो उन्होंने अपनी माताजी से सीखा है. इसी कड़ी इन्होंने आज अपने किचन में चना आलू का छोला बनाए, जिसका स्वाद बेहद लाजवाब है.
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उन्होंने कहा कि सुबह में अगर छोले बनाना हो, तो रात में ही चने को पानी में भिगोकर रख दिया जाता है और सुबह इसे छान लिया जाता है. इसके बाद, आलू को उबाल लिया जाता है और इसके बाद इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ दिया जाता है.
अब प्याज, हरा मिर्च, हरा धनिया, अदरक, टमाटर, लहसुन आदि काट लिया जाता है. इसके बाद, गैस चूल्हे पर कढ़ाई चढ़ा ली जाती है या फिर कूकर. इसमें सरसों का तेल डाल दिया जाता है. तेल गर्म होने पर उसमें दो चार दाना सरसों, कूटा हुआ काली मिर्च, जीरा, तेज पत्ता और हरा या लाल मिर्च डालकर फोरन तैयार कर ले. अब इसमें तैयार हरा मिर्च, प्याज, अदरक, आवश्यकता अनुसार नमक और मसाला आदि डालकर अच्छे से देर तक भूने.
इसके बाद, छोले मसाले या अन्य मसाले डालकर पकाना चाहिए. अब आलू और चने को भी डालकर अच्छे से भून जाता है. इसके बाद, आवश्यकता अनुसार पानी डाल दिया जाता है. अब कढ़ाई हो तो, किसी बर्तन से ढक दें, बीच-बीच में चलाते रहें. कूकर हो, तो बंद करके 3 से 4 सिटी लगा दें. जब इसमें से खास सुंगध आने लगे तो समझिए, आपका छोला बन चुका हैं. कहा कि यह छोले बनाने की रेसिपी जो उन्होंने अपने माता जी को बनाते हुए देखा और सीखा था, वह आज छात्र जीवन में बड़ा काम आ रहा है.