बिहार के रोहतास जिले के बहुचर्चित जोगिया हत्याकांड में पुलिस महकमे की ओर से एक बड़ा और निर्णायक मोड़ आया है। मामले की गंभीरता, घटित अपराध के भयावह स्वरूप और स्थानीय स्तर पर उठते सवालों को ध्यान में रखते हुए इस पूरे मामले की जांच अब राज्य सीआईडी को सौंप दी गई है। जांच की कमान मिलते ही पुलिस महकमा पूरी तरह हरकत में आ गया है।
बिहार के रोहतास दिनारा थाना क्षेत्र के जोगिया गांव में पांच अगस्त को चदेश्वर चौधरी की हत्या के बाद हुई आगजनी और उपद्रव के मामले की जांच अब अपराध अनुसंधान विभाग (सीआइडी) ने अपने हाथों में ले ली है। घटना की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए सीआइडी के डीआइजी जयंतकांत के नेतृत्व में एसपी आलोक तथा एसपी रामानंद कौशल की टीम ने जोगिया गांव पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। टीम ने घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी लेने के साथ अब तक की पुलिस कार्रवाई की भी समीक्षा की।
सीआइडी अधिकारियों ने घटनास्थल पर मौजूद लोगों तथा मामले से संबंधित परिस्थितियों की जानकारी जुटाई। प्रारंभिक स्तर पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई, गिरफ्तारी और दर्ज प्राथमिकी से जुड़े तथ्यों की भी समीक्षा की गई। जांच के बाद तैयार की जाने वाली रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंपी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे घटनाक्रम पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
दोनों गांवों में पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की तैनाती
घटना के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मृतक के गांव मिल्की और अभियुक्त के गांव जोगिया में पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। दोनों स्थानों पर मजिस्ट्रेट की भी प्रतिनियुक्ति की गई है। जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को भी स्थिति की नियमित निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
हत्या और आगजनी को लेकर तीन प्राथमिकी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूरे घटनाक्रम को लेकर तीन प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। मृतक के स्वजन की शिकायत पर अजीत तिवारी सहित पांच लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है। वहीं पुलिस पर हमला करने तथा अजीत तिवारी के घर में तोड़फोड़ और आगजनी करने के आरोप में 16 नामजद तथा करीब 300 से 400 अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पांच घंटे में गाजीपुर से गिरफ्तार हुए पिता-पुत्र
पुलिस के अनुसार हत्या के मामले में नामजद अभियुक्त अजीत तिवारी और उसके पुत्र चिंगारी तिवारी को घटना के लगभग पांच घंटे के भीतर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार कर लिया गया था। प्रारंभिक जांच में मजदूरी छोड़ने को लेकर विवाद की बात सामने आई थी। हालांकि अब मामले की जांच सीआइडी द्वारा की जा रही है, जिससे घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच किए जाने की उम्मीद है।
इंटरनेट मीडिया पर भी पुलिस की निगरानी
घटना के बाद इंटरनेट मीडिया पर भी पुलिस की विशेष निगरानी बनी हुई है। एडीजी मुख्यालय सुनील कुमार ने बताया कि घटना के बाद सामाजिक विद्वेष और तनाव फैलाने के उद्देश्य से भ्रामक तथा आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बाद ऐसे करीब 600 पोस्ट हटवाए गए हैं। पुलिस अब इन पोस्ट को प्रसारित करने वालों की पहचान कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई कर रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि घटना के बाद सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने, अफवाह फैलाने अथवा भ्रामक सूचना प्रसारित करने का प्रयास करने वालों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
शांति व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता
फिलहाल पुलिस और प्रशासन का मुख्य उद्देश्य दोनों गांवों में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। सीआइडी जांच के साथ-साथ इंटरनेट मीडिया की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और किसी भी प्रकार की भ्रामक या भड़काऊ सूचना प्रसारित नहीं करने की अपील की है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ घटना के अन्य पहलुओं के भी सामने आने की संभावना है।
(रिपोर्ट – रंजन सिंह)