Highlights
- लाट मस्जिद को विजय मंदिर बताकर हिंदू संगठनों ने वराह मार्च का ऐलान किया था।
- बिना अनुमति मार्च निकालने से पहले पुलिस ने आशीष बसु समेत 7 लोगों को हिरासत में लिया।
- प्रशासन ने धारा 163 लागू होने का हवाला देकर मार्च की अनुमति नहीं दी है।
धार: मध्य प्रदेश के धार में भोजशाला के बाद अब लाट मस्जिद को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हिंदूवादी संगठनों का दावा है कि जिसे लाट मस्जिद कहा जाता है, वह असल में परमार काल का विजय मंदिर है। इसी दावे को लेकर सनातन प्रहरी समिति ने 15 सितंबर को ‘वराह मार्च’ निकालने का ऐलान किया था। हालांकि, जिला प्रशासन ने मार्च की अनुमति नहीं दी। इसके बावजूद आयोजक मार्च निकालने पर अड़े रहे। मार्च से पहले पुलिस ने सनातन प्रहरी समिति के आशीष बसु समेत 7 लोगों को हिरासत में ले लिया है।
बिना अनुमति मार्च निकालने पर अड़े आयोजक
सनातन प्रहरी समिति ने लोगों से 15 सितंबर को वराह मार्च में शामिल होने की अपील की थी। मार्च पीजी कॉलेज ग्राउंड से कीर्ति विजय मंदिर/लाट मस्जिद तक निकाला जाना था। प्रशासन ने मार्च की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। धार प्रशासन ने धारा 163 का हवाला देते हुए कहा कि नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। आयोजकों के बिना अनुमति मार्च निकालने पर अड़े रहने के बाद प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। मार्च शुरू होने से पहले ही पुलिस ने आयोजकों से जुड़े 7 लोगों को हिरासत में ले लिया, जिनमें सनातन प्रहरी समिति के आशीष बसु भी शामिल हैं।
पुलिस की लोगों से अपील, ‘मार्च में शामिल न हों’
धार में जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया है और चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। इलाके में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने लोगों से मार्च में शामिल नहीं होने की अपील की है। CSP शशांक सिंह गुर्जर समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि वे वराह मार्च में शामिल न हों और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन की ओर से किसी भी रैली या मार्च को अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे में बिना अनुमति आयोजन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने शहर में लगाए गए मार्च से संबंधित बैनर भी हटवा दिए हैं।
हिंदू संगठनों का दावा, ‘यह विजय मंदिर है’
इस पूरे विवाद की शुरुआत उस दावे से हुई है जिसमें हिंदू संगठनों का कहना है कि यह इमारत मस्जिद नहीं बल्कि परमार काल का विजय मंदिर है। हिंदू संगठनों के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण राजा भोज ने तेलंगाना क्षेत्र पर विजय हासिल करने के बाद कराया था। इसी वजह से इसका नाम विजय मंदिर रखा गया। संगठनों का दावा है कि वहां मौजूद एक खास स्तंभ और उस पर बनी भगवान वराह की आकृति मंदिर होने के प्रमाण हैं। उनका कहना है कि मंदिर में मौजूद अष्टधातु का स्तंभ जंग-रोधी है और इसे राजा भोज ने ही स्थापित कराया था। स्तंभ पर भगवान वराह की मूर्ति होने का भी दावा किया जा रहा है।
मुस्लिम समुदाय इसे मानता है लाट मस्जिद
दूसरी ओर, मुस्लिम समुदाय इस ऐतिहासिक इमारत को लाट मस्जिद मानता है। बताया जाता है कि यहां लंबे समय से ईद की नमाज भी अदा की जाती रही है। यह स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी कि ASI के अधिकार क्षेत्र में आता है। ASI इसे राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित इमारत मानता है। यानी एक तरफ हिंदू संगठन इसे विजय मंदिर बताते हुए इसके धार्मिक और ऐतिहासिक स्वरूप पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ मुस्लिम समुदाय इसे लाट मस्जिद मानता है और यहां धार्मिक गतिविधियों का इतिहास बताता है।
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