BJP विधायक और वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने कांग्रेस नेत्री सोनिया गांधी को पत्र लिखकर ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर हुए विवाद पर अपना दुख प्रकट किया है। बीते शनिवार को लिखे अपने लेटर में, सुमित्रो चटर्जी ने ‘वंदे मातरम्’ के पूरे गायन में बाधा डालने के प्रयास को “ऐतिहासिक गलती को बेशर्मी से दोहराना” बताया। सुमित्रो चटर्जी ने कहा कि बंकिम चंद्र चटर्जी के वंशज के रूप में, कांग्रेस वर्कर्स को पूरा गीत गाने से रोकने के बार-बार के प्रयासों से उन्हें गहरा दुख हुआ है।

कांग्रेस मुख्यालय की घटना पर जताया दुख

सुमित्रो चटर्जी ने लिखा, “15 अगस्त 2026 को भारत की स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ की शुभ सुबह पर, जब सभी देशवासी भारत माता को नमन करने में जुटे, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के हेडक्वार्टर में जो कुछ हुआ, वह न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि एक ऐतिहासिक गलती को बेशर्मी से दोहराने जैसा भी है। जब कांग्रेस वर्कर युगऋषि बंकिम चंद्र चटर्जी की अमर रचना ‘वंदे मातरम्’ का पूरा वर्जन गा रहे थे, तो उन्हें रोकने के बार-बार किए गए प्रयासों और उससे पैदा हुई बेचैनी व नाराजगी ने मुझे बहुत दुखी किया।”

एक आम भारतीय नागरिक, एक देशभक्त और सबसे बढ़कर, बंकिम चंद्र चटर्जी के परिवार का सीधा वंशज होने के नाते, मैं यह लेटर गहरे दर्द, खालीपन और पीड़ा के साथ लिख रहा हूं: सुमित्रो चटर्जी

जिन्ना के विरोध वाली बात को किया याद

बीजेपी विधायक सुमित्रो चटर्जी ने कहा कि कांग्रेस का दोहरा रवैया कोई नई बात नहीं है। 1937 के मुस्लिम लीग अधिवेशन को याद करते हुए, जहां मुहम्मद अली जिन्ना ने ‘वंदे मातरम्’ को मूर्ति-पूजा वाला कहकर मुस्लिम-विरोधी बताया था, जिसके बाद कांग्रेस पार्टी सरकारी कार्यक्रमों में सिर्फ प्रकृति की प्रशंसा करने वाले शुरुआती दो पद ही गाने लगी, सुमित्रो ने कहा कि उस समझौते की छाप आज भी पार्टी के व्यवहार और विचारधारा में दिखाई देती है। बता दें कि स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के अपमान के आरोप से जुड़ा सोनिया गांधी का वीडियो वायरल हो रहा है। इसको लेकर सियासी माहौल गर्म है।

सुमित्रो ने कांग्रेस की विचारधारा पर उठाए सवाल

सुमित्रो चटर्जी ने आगे कहा, “इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि आपका तथाकथित दोहरा रवैया कोई नई बात नहीं है। इतिहास गवाह है कि अक्टूबर 1937 में, आप भी मुहम्मद अली जिन्ना की बेतुकी आपत्तियों के आगे झुक गए थे और इस कालजयी गीत को खंडित कर दिया था। उस समझौते की छाप आज भी कांग्रेस की विचारधारा में दिखाई देती है और आज आपका व्यवहार एक बार फिर स्पष्ट हो गया है।”

(इनपुट- ANI)

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