Highlights
- हल्द्वानी में कथित शुद्धिकरण विवाद पर कांग्रेस आज फिर सड़क पर उतरेगी।
- राहुल गांधी की FIR के विरोध में देहरादून में सचिवालय घेराव की तैयारी।
- सीएम धामी बोले, ‘कप डिस्पोजेबल हो सकता है, लेकिन सोच नहीं’।
हल्द्वानी: उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी में हुई सभा के बाद मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस अब इस मामले को लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी में है। कांग्रेस मंगलवार को इस मामले को लेकर एक बार फिर प्रदर्शन करेगी। पार्टी हल्द्वानी में कथित शुद्धिकरण के मामले में राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR का भी विरोध कर रही है। कांग्रेस ने ऐलान किया है कि सितंबर के पहले सप्ताह में देहरादून में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और पार्टी कार्यकर्ता सचिवालय का घेराव भी करेंगे।
देशभर में प्रदर्शन करने की तैयारी में कांग्रेस
कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि पार्टी राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR के विरोध में देशभर में राज्य स्तरीय विरोध मार्च निकालेगी। कांग्रेस की मांग है कि हल्द्वानी में कथित ‘जातिवादी शुद्धिकरण’ करने वाले बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी FIR दर्ज की जाए। सैयद नसीर हुसैन ने बीजेपी सरकारों पर ‘दलित विरोधी, अल्पसंख्यक विरोधी और संविधान विरोधी एजेंडा’ आगे बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ऐसे किसी भी एजेंडे का विरोध करेगी। हुसैन ने RSS पर भी छुआछूत और जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाली सोच रखने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी पर हल्द्वानी में क्यों हुई FIR?
हल्द्वानी सिटी कोतवाली पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ एक शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की है। शिकायत हल्द्वानी के जवाहर नगर कॉलोनी निवासी 26 साल के अमित कुमार ने की है। अमित कुमार वाल्मीकि समुदाय से हैं और श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के पदाधिकारी बताए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी की ‘शुद्धिकरण’ को लेकर की गई टिप्पणी से अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। FIR में SC/ST एक्ट, 1989 की धारा 3(1)(r) और 3(1)(u) लगाई गई हैं। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 199 का भी जिक्र है।
देहरादून में कांग्रेस की बड़े प्रदर्शन की तैयारी
हल्द्वानी विवाद को लेकर कांग्रेस हाईकमान भी सक्रिय है। पार्टी ने सितंबर के पहले सप्ताह में देहरादून में बड़ा विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के नेतृत्व में होने वाले इस प्रदर्शन में सचिवालय का घेराव किया जाएगा। इस प्रदर्शन में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पार्टी की उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा के भी शामिल होने की बात सामने आई है। कांग्रेस का कहना है कि प्रदर्शन का मुद्दा सिर्फ हल्द्वानी में कथित शुद्धिकरण नहीं, बल्कि राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR भी है।
सीएम धामी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरे विवाद को लेकर राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। खटीमा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री एक स्थानीय दुकान पर आम लोगों के साथ बैठकर चाय पीते नजर आए। उन्होंने डिस्पोजेबल कप में चाय पीते हुए राहुल गांधी के जाति संबंधी बयानों पर निशाना साधा। धामी ने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ बैठकर चाय पीने के दौरान उन्हें चाय का स्वाद और लोगों का अपनापन महसूस हुआ, लेकिन कहीं कोई जाति नजर नहीं आई। उन्होंने राहुल गांधी के चाय के कप में भी जाति और भेदभाव तलाशने वाले बयान को संकीर्ण राजनीति की पराकाष्ठा बताया। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा,
‘कप डिस्पोजेबल हो सकता है, लेकिन सोच इतनी डिस्पोजेबल नहीं होनी चाहिए कि चाय में भी जाति और राजनीति ढूंढी जाए।’
धामी ने कहा, युवराज को सबूत देना चाहिए
बनबसा में शुद्धिकरण विवाद पर भी मुख्यमंत्री धामी ने राहुल गांधी पर हमला बोला। धामी ने कहा,
‘कांग्रेस के सर्वोच्च नेता, ‘युवराज’ को इसके सबूत देने चाहिए। उनके पास ऐसा कोई सबूत नहीं है। उन्हें यहां से गलत फीडबैक दे दिया जाता है, वे इसकी जांच या असल तथ्यों की जांच नहीं करते और बस वोट पाने के लिए बयान जारी कर देते हैं। यह देवभूमि की एक पवित्र संस्कृति है कि यहां सभी लोग मिल-जुलकर और गहरे आपसी स्नेह के साथ रहते हैं। यहां कोई मतभेद नहीं हैं, सभी लोग एक हैं। ऐसा लगता है कि उन्होंने सनातन को नुकसान पहुंचाने, उस पर प्रहार करने और हिंदू समाज को कमज़ोर करने के बारे में सोच लिया है और इसलिए वे लगातार इस प्रकार का काम करते रहते हैं।’
इस तहह देखा जाए तो हल्द्वानी में खरगे की सभा के बाद मंच के कथित शुद्धिकरण से शुरू हुआ विवाद अब राहुल गांधी की FIR और जाति की राजनीति तक पहुंच गया है। मंगलवार के प्रदर्शन और सितंबर के पहले सप्ताह में देहरादून में प्रस्तावित सचिवालय घेराव के साथ इस विवाद के और आगे बढ़ने की संभावना है। (ANI से इनपुट्स के साथ)
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