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Wheat Flour Malpua: मानसून के मौसम में अगर कुछ मीठा और पारंपरिक खाने का मन हो, तो गेहूं के आटे का मालपुआ बेहतरीन विकल्प है. यह रेसिपी मैदे की बजाय गेहूं के आटे से तैयार होती है, जिससे यह स्वादिष्ट होने के साथ अपेक्षाकृत हल्की भी मानी जाती है. दूध, सौंफ, इलायची और चीनी के मिश्रण से तैयार घोल को सुनहरा तलकर चाशनी में डुबोया जाता है, जिससे मालपुआ बेहद नरम और रसीला बनता है. इसे चाय के साथ या त्योहारों एवं सावन के विशेष अवसरों पर परोसा जा सकता है. कम सामग्री और आसान विधि के कारण इसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है.
भीलवाड़ा: मानसून के साथ अब भीलवाड़ा में बारिश तेजी से अपनी रफ्तार पकड़ने लगी है इस बीच सावन का पवित्र महीना भी शुरू हो गया है और मानसून और सावन के बीच कांबिनेशन घर पर कुछ स्वादिष्ट टेस्टी मिठाई खाने का मन करता है, तो अक्सर हम यही सोचते हैं कि बाजार से मालपुआ खरीद कर लाया जाए लेकिन क्या आप यह बात जानते हैं कि मालपुआ मैदे के अलावा भी गेहूं के आटे के बना सकते हैं और बिल्कुल आसान तरीके से घर पर मौजूद सामान से मालपुआ बनाया जा सकता है. अगर आप भी इस बारिश के मौसम में घर पर कुछ मीठा और टेस्टी बनाना चाहते हैं, तो गेहूं के आटे का मालपुआ सबसे बढ़िया हो सकता है.
यह राजस्थान की पारंपरिक मिठाइयों में शामिल है जो खासतौर पर सावन, तीज, रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर बनाया जाता है. अच्छी बात यह है कि इसे बनाने के लिए महंगी सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती हैं. घर में आसानी से मिलने वाले सामान से यह ट्रस्टी मिठाई तैयार हो जाती है और इतना ही नहीं इसकी चाशनी भी घर पर ही आसानी से शक्कर या चीनी से बनाई जा सकती है. चाशनी और मालपुआ का कंबीनेशन एक तरह से स्वाद के दीवानों के लिए पहली पसंद बना हुआ रहता है. जिसे चाहे सुबह हो या शाम कभी भी कम मेहनत और कम समय में तैयार किया जा सकता है.
मालपुआ का स्वाद बेहतर हो जाए
भीलवाड़ा शहर के आर के कॉलोनी निवासी कीर्ति कुमारी ने बताया कि मालपुआ एक ऐसी मिठाई है. जो भीलवाड़ा में सबसे ज्यादा पसंद की जाती है. यह मिठाई बाजार के अलावा घर पर गेहूं के आटे से भी बना सकते हैं, जिसे बनाना काफी आसान होता है. गेहूं के आटे का मालपुआ बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में गेहूं का आटा लें. इसमें थोड़ा सूजी, स्वाद के अनुसार चीनी या गुड़, सौंफ, इलायची पाउडर और जरूरत के अनुसार दूध या पानी डालकर गाढ़ा घोल तैयार करें. अगर चाहें तो थोड़ा दही भी मिला सकते हैं, जिससे मालपुआ और भी नरम बनता है. तैयार घोल को करीब 20 से 30 मिनट तक ढककर रख दें, ताकि सभी सामग्री अच्छी तरह मिल जाए और मालपुआ का स्वाद बेहतर हो जाए. अब एक कड़ाही में घी या तेल गर्म करें. जब घी अच्छी तरह गर्म हो जाए तो एक कलछी की मदद से थोड़ा-थोड़ा घोल डालें. मालपुआ अपने आप गोल आकार में फैल जाएगा. इसे मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा और हल्का कुरकुरा होने तक तलें.
बारिश हो रही हो और घर में ताजे बने मालपुए
तले हुए मालपुए को निकालकर कुछ देर के लिए चाशनी में डाल सकते हैं. अगर ज्यादा मीठा पसंद नहीं है तो बिना चाशनी के भी मालपुआ बेहद टेस्टी लगता है. ऊपर से कटे हुए बादाम, पिस्ता या सूखे मेवे डालकर इसका स्वाद और बढ़ाया जा सकता है. मानसून के मौसम में चाय के साथ गर्मागर्म मालपुआ खाने का आनंद ही अलग होता है. बाहर बारिश हो रही हो और घर में ताजे बने मालपुए की खुशबू फैल जाए तो पूरा परिवार इसका स्वाद लेने के लिए तैयार हो जाता है. सावन और तीज जैसे त्योहारों में कई घरों में आज भी यह पारंपरिक मिठाई जरूर बनाई जाती है. इसे बनाने में ज्यादा समय और मेहनत नहीं लगती, जबकि स्वाद किसी होटल या मिठाई की दुकान से कम नहीं होता.
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मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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