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शाहजहांपुर के लोदीपुर में स्थित मुन्नन चाट भंडार पिछले 50 वर्षों से अपने अनोखे स्वाद के लिए मशहूर है. सुनील कुमार गुप्ता की धीमी आंच पर सिकी कुरकुरी और स्टफ्ड टिक्की, खास मसालों और प्राकृतिक चटनी के साथ ग्राहकों को लाजवाब स्वाद का अनुभव कराती है—वो भी सिर्फ 20 रुपये में.
शाहजहांपुर के लोदीपुर में स्थित ‘मुन्नन चाट भंडार’ अपने खास जायके के लिए मशहूर है. दुकान के मौजूदा मालिक सुनील कुमार गुप्ता ने बचपन से ही अपने पिता के साथ काम करना शुरू कर दिया था. वह पिछले 35 सालों से खुद चाट बना रहे हैं. इतने वर्षों के अनुभव ने उन्हें स्वाद की बारीकी समझा दी है. सुनील बताते हैं कि उन्होंने समय के साथ गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं किया, यही वजह है कि उनकी दुकान की साख आज भी पहले जैसी बनी हुई है.
मुन्नन चाट भंडार की नींव आज से करीब पांच दशक पहले मुन्नन गुप्ता ने रखी थी. उन्होंने अपनी मेहनत और खास रेसिपी से शाहजहांपुर के लोगों के दिलों में जगह बनाई. वर्तमान में उनके बेटे सुनील कुमार गुप्ता इस विरासत को बखूबी आगे बढ़ा रहे हैं. उनके हाथों का जादू और पिता से सीखी हुई पारंपरिक कला ही इस चाट को अन्य दुकानों से अलग और खास बनाती है.
तैयार की गई टिक्की को सीधे तेज आंच पर नहीं पकाया जाता है, सुनील इसे तवे पर बेहद धीमी आंच पर काफी देर तक सेंकते हैं. धीमी आंच पर सिकने की वजह से टिक्की बाहर से बेहद कुरकुरी और सुनहरी हो जाती है, जबकि अंदर का मसाला अपनी नमी और स्वाद बरकरार रखता है. यही कुरकुरापन ग्राहकों को मुन्नन चाट भंडार की ओर खींच लाता है.
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लोदीपुर स्थित यह दुकान शाम करीब 4 बजे सजती है और रात 9 बजे तक यहां ग्राहकों का तांता लगा रहता है. रोजाना 100 से 150 लोग यहां का लुत्फ उठाते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि इतनी मशहूर और स्वादिष्ट होने के बावजूद, एक टिक्की की कीमत मात्र 20 रुपए है. किफायती दाम और लाजवाब स्वाद की वजह से यहां हर वर्ग के लोग पहुंचते हैं.
टिक्की का स्वाद बढ़ाने में चटनी की अहम भूमिका होती है. यहां मिलने वाली सोंठ चटनी अमचूर, जीरा, सौंफ और ड्राई फ्रूट्स के मिश्रण से तैयार की जाती है. सुनील दावे से कहते हैं कि वो अपनी चटनी में किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं करते हैं. पूरी तरह प्राकृतिक और घरेलू मसालों से बनी यह चटनी सेहत के लिहाज से भी सुरक्षित और स्वादिष्ट होती है.
इस टिक्की को तैयार करने की प्रक्रिया बड़ी दिलचस्प है, सबसे पहले उबले हुए आलू का भरता बनाया जाता है. इसके बाद हरी मटर, अदरक, अजवाइन, जीरा, मिर्च, धनिया और हींग का एक खास पेस्ट तैयार किया जाता है. इसी पेस्ट को आलू के अंदर भरकर गोल आकार दिया जाता है. यह मसालों का संतुलन ही टिक्की को खुशबूदार और जायकेदार बनाने का काम करता है.
जब कोई ग्राहक टिक्की मांगता है, तो उसे पत्तों के दोने में बड़े ही प्यार से परोसा जाता है. कुरकुरी टिक्की के ऊपर दही, घर की बनी मीठी सोंठ वाली चटनी और ताजी कटी हुई प्याज डाली जाती है. यह पारंपरिक तरीका न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि चाट के असली स्वाद का एहसास कराता है. पैकिंग की सुविधा होने के कारण लोग घर के लिए भी ले जाते हैं.
आम तौर पर मिलने वाली बेसन वाली या सादी टिक्की से अलग, यहां स्टफ्ड टिक्की तैयार की जाती है. इस टिक्की की सबसे बड़ी खासियत इसके अंदर भरी जाने वाली सामग्री है. आलू के अंदर खास मसालों का मिश्रण इसे एक अलग स्तर पर ले जाता है. जब ग्राहक इसे खाते हैं, तो उन्हें आलू के कुरकुरेपन के साथ-साथ अंदर के मसालेदार पेस्ट का अद्भुत स्वाद मिलता है.