Last Updated:
Rajasthan Sweet Dish: राजस्थान के करौली जिले की एक खास पारंपरिक मिठाई इन दिनों लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है. यह मिठाई एक विशेष सब्जी से तैयार की जाती है और इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लगभग एक महीने तक खराब नहीं होती. स्वादिष्ट होने के साथ-साथ यह शरीर को ठंडक पहुंचाने का काम भी करती है, इसलिए गर्मी के मौसम में इसकी मांग बढ़ जाती है. इस मिठाई को तैयार करने में करौली के मुस्लिम कारीगरों की अहम भूमिका होती है, जो वर्षों से अपनी पारंपरिक कला और अनुभव के जरिए इसे विशेष स्वाद और गुणवत्ता प्रदान कर रहे हैं. स्थानीय स्तर पर यह मिठाई न केवल लोगों की पसंद बनी हुई है, बल्कि करौली की सांस्कृतिक और खाद्य विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है.
करौली. आगरा के मशहूर पेठे का नाम तो आपने सुना होगा, लेकिन करौली के बूरा-बताशा बाजार में तैयार होने वाला पेठा भी अपनी अलग पहचान रखता है. करीब 50 वर्षों से यहां पारंपरिक तरीके से पेठा बनाया जा रहा है. खास बात यह है कि यह मिठाई एक विशेष प्रकार के कद्दू (पेठा सब्जी) से तैयार की जाती है और लंबे समय तक खराब नहीं होती. स्थानीय लोगों के बीच इसकी काफी मांग रहती है.
पेठा बनाने वाले अनुभवी कारीगर जब्बार भाई बताते हैं कि इस मिठाई की तासीर ठंडी होती है. गर्मियों के मौसम में इसका सेवन शरीर को ठंडक पहुंचाने का काम करता है. उनका कहना है कि यदि सुबह खाली पेट सीमित मात्रा में इसका सेवन किया जाए तो पेट संबंधी कई समस्याओं में राहत मिल सकती है. सामान्यतः यह मिठाई गर्मियों में 20 से 25 दिनों तक सुरक्षित रहती है, जबकि सर्दियों में एक महीने तक खराब नहीं होती. हालांकि बरसात के मौसम में नमी अधिक होने के कारण इसके जल्दी खराब होने की संभावना रहती है.
गांवों में सबसे अधिक पसंद
जब्बार भाई के अनुसार पेठे की सबसे अधिक मांग ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले ग्राहकों में देखने को मिलती है. करौली के बूरा-बताशा बाजार में रोजाना लगभग 40 से 50 किलो पेठे की बिक्री हो जाती है. स्वाद के साथ-साथ इसकी कीमत भी लोगों को आकर्षित करती है. वर्तमान में यह मिठाई 70 से 80 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रही है, जिससे यह आम लोगों की पहुंच में बनी हुई है.
शुद्धता है इसकी सबसे बड़ी पहचान
इस पारंपरिक मिठाई की एक और विशेषता इसकी शुद्धता है. इसे तैयार करने में केवल पेठा कद्दू और चीनी की चाशनी का उपयोग किया जाता है. इसमें किसी प्रकार के कृत्रिम रंग या अतिरिक्त सामग्री का प्रयोग नहीं किया जाता. हालांकि इसे बनाने की प्रक्रिया काफी मेहनत और समय मांगती है.
ऐसे तैयार होता है पेठा
जब्बार भाई बताते हैं कि सबसे पहले पेठा कद्दू का छिलका हटाकर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है. इसके बाद इन टुकड़ों को चूने के पानी में धोकर तैयार किया जाता है, जिससे उनमें आवश्यक कठोरता आती है. फिर इन्हें अच्छी तरह गोदकर चीनी की चाशनी में उबाला जाता है. पर्याप्त समय तक पकाने के बाद इन्हें जमने के लिए रखा जाता है. इसके बाद स्वादिष्ट और पारंपरिक पेठा तैयार होकर बाजार में बिक्री के लिए पहुंच जाता है.
About the Author
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें