मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच की यूनिट 2 ने जाल बिछाकर 500 रुपये के हाई-क्वालिटी नकली नोटों की बड़ी खेप बरामद की है। पुलिस की कार्रवाई में कुल 10 लाख 64 हजार रुपये की नकली भारतीय करेंसी जब्त की गई है। बरामद सभी नोट 500 रुपये के हैं। पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान पहले एक महिला को ट्रैप के जरिए पकड़ा गया। उसके पास से 500 रुपये के कुछ नकली नोट बरामद हुए।
महिला से मिली जानकारी और आगे की जांच के आधार पर पुलिस ने कुर्ला के पास एक पुरुष आरोपी तक पहुंच बनाई, जिसके पास से बड़ी संख्या में और नकली नोट बरामद किए गए। दोनों के बीच लिंक होने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक महिला ने ये नकली नोट इसी पुरुष आरोपी से लिए थे।
10 सितंबर तक आरोपी पुलिस कस्टडी में
इस मामले में पुरुष आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे आज कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 10 सितंबर तक पुलिस कस्टडी मिली है। महिला की भूमिका की भी जांच की जा रही है और उसे फिलहाल नोटिस दिए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है।
दोगुने मूल्य में बेचते थे नकली करेंसी
जांच में सामने आया है कि आरोपी नकली करेंसी को असली रकम के दोगुने मूल्य पर बेचते थे। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति आरोपियों को 10 हजार रुपये की असली करेंसी देता था, तो उसके बदले उसे 20 हजार रुपये मूल्य के नकली 500 रुपये के नोट दिए जाते थे। यानी 1 रुपये असली रुपये के बदले 2 रुपये की नकली करेंसी देने का सौदा होता था। हालांकि, आरोपी खुद इन नकली नोटों को कितने रुपये में खरीदकर लाते थे और उन्हें सप्लाई करने वाले को कितना भुगतान करते थे, इसकी जानकारी अभी जांच का हिस्सा है।
कॉमन व्यक्ति के जरिए हुआ संपर्क
पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपियों का संपर्क एक कॉमन व्यक्ति के जरिए हुआ था। इस कॉमन लिंक की पहचान और उसकी भूमिका को लेकर भी पुलिस आगे की जांच कर रही है। इसके अलावा जिस व्यक्ति तक ये नकली नोट पहुंचाए जाने थे या जिससे आगे की डील होने वाली थी, उसके बारे में भी पुलिस जानकारी जुटा रही है।
महाराष्ट्र के बाहर से आया था नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक, ये नकली नोट महाराष्ट्र के बाहर से खरीदे गए थे। हालांकि, अभी पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन्हें किस राज्य में बनाया गया था। नकली नोटों की मैन्युफैक्चरिंग कहां हुई, इन्हें किसने तैयार किया और महाराष्ट्र में इनकी सप्लाई करने वाला नेटवर्क कौन है, इसका पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।
पुलिस ने फिलहाल इस मामले में किसी दूसरे देश, खासकर पाकिस्तान से लिंक होने की पुष्टि नहीं की है। पुलिस का कहना है कि जांच में जैसे-जैसे आगे के लिंक सामने आएंगे, उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
हाई-क्वालिटी नकली नोट क्यों?
पुलिस के मुताबिक, बरामद नकली नोटों को हाई-क्वालिटी फेक करेंसी इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इनमें असली 500 रुपये के नोटों के कई फीचर्स को काफी करीब से कॉपी किया गया है। पहली नजर में आम व्यक्ति के लिए इन्हें पहचानना आसान नहीं हो सकता।
हालांकि, असली नोट से बारीकी से तुलना करने पर कुछ अंतर दिखाई देते हैं। मसलन, नोट के नीचे की तरफ मौजूद सफेद मार्जिन की चौड़ाई में अंतर है। इसके अलावा होलोग्राम की क्वालिटी और उसमें मौजूद फीचर्स में भी फर्क नजर आता है। कुछ जगहों पर स्पेलिंग और फॉन्ट में मामूली बदलाव पाया गया है। यही अंतर नोट को असली करेंसी से अलग पहचानने में मदद करते हैं।
आरोपियों की पृष्ठभूमि की भी जांच
पुलिस ने आरोपियों की पुरानी हिस्ट्री भी चेक की है। शुरुआती जांच के मुताबिक, दोनों के खिलाफ पहले से कोई पुराना आपराधिक मामला या केस रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। हालांकि, इससे पहले उन्होंने नकली करेंसी से जुड़ा कोई काम किया था या नहीं, इसकी जांच अभी जारी है।
गिरफ्तार पुरुष आरोपी के बारे में पुलिस ने बताया कि वह जूते का कारोबार करता है। वह सिर्फ नकली नोटों की खरीद-फरोख्त करता था या जूते के कारोबार के साथ यह काम भी करता था, इसकी भी जांच की जा रही है। वह कितने समय से नकली करेंसी के इस नेटवर्क से जुड़ा था और इससे पहले कितनी बार नकली नोटों की सप्लाई या खरीद-फरोख्त कर चुका है, इसका पता लगाया जा रहा है।
नेटवर्क ने कितनी करेंसी बाजार में उतारी?
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बरामद नकली नोटों के अलावा इस नेटवर्क ने पहले कितनी नकली करेंसी बाजार में उतारी है। अगर ये नोट पहले से बाजार में पहुंच चुके हैं, तो आम लोगों और दुकानदारों के साथ धोखाधड़ी की कितनी संभावना थी और किन इलाकों में इनकी सप्लाई हुई, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है।
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि महाराष्ट्र के बाहर नकली नोट आखिर कहां तैयार किए गए, इनके पीछे कौन है, आरोपी इन्हें किससे खरीदते थे, खरीद का रेट क्या था और इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं। इन सभी सवालों के जवाब तलाशने के लिए गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है और जांच को महाराष्ट्र से बाहर मौजूद सप्लाई नेटवर्क तक ले जाने की कोशिश की जा रही है।
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