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उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की खानपान संस्कृति अपने खास स्वाद के लिए जानी जाती है. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में भुटवा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. बागेश्वर जिले के डंगोली क्षेत्र में तैयार होने वाला यह स्वादिष्ट व्यंजन अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों की भी पहली पसंद बनता जा रहा है. पहाड़ी मसालों और पारंपरिक तरीके से तैयार भुटवा का स्वाद लोगों को एक अलग ही अनुभव देता है.
बागेश्वर: उत्तराखंड के कुमाऊं की पारंपरिक खानपान संस्कृति अपने अनोखे स्वाद के लिए देशभर में पहचानी जाती है. यहां के स्थानीय व्यंजनों में भुटवा का नाम बेहद खास माना जाता है. पहाड़ी मसालों और पारंपरिक तरीके से तैयार होने वाला भुटवा लोगों को अलग ही स्वाद का अनुभव कराता है. बागेश्वर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित डंगोली क्षेत्र का स्वादिष्ट भुटवा फेमस है. यहां आने वाले लोग एक बार इसका स्वाद चखने के बाद इसकी तारीफ किए बिना नहीं रहते हैं.
डंगोली में स्थित जेके होटल के संचालक हरीश रावत अपने खास पहाड़ी अंदाज में भुटवा तैयार करते हैं. स्थानीय लोगों के साथ-साथ अब पर्यटक भी उनके होटल में भुटवा खाने पहुंच रहे हैं.
संचालक हरीश रावत बताते हैं कि कई वर्षों से पारंपरिक तरीके से पहाड़ी व्यंजन बना रहे हैं. उनके हाथों से तैयार भुटवा इतना मुलायम और स्वादिष्ट होता है कि खाते ही मुंह में घुल जाता है. यही वजह है कि आसपास के क्षेत्रों के लोग भी खासतौर पर यहां भुटवा खाने पहुंचते हैं.
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भुटवा कुमाऊं क्षेत्र का एक पारंपरिक व्यंजन है, जिसे खास मसालों और धीमी आंच पर पकाया जाता है. पहले यह व्यंजन गांवों और घरों तक सीमित था, लेकिन अब इसकी बढ़ती लोकप्रियता के कारण होटल और रेस्टोरेंट में भी इसे खास तौर पर बनाया जाने लगा है. डंगोली का यह होटल भी उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है. यहां आने वाले लोगों को पहाड़ी स्वाद और पारंपरिक संस्कृति दोनों का अनुभव मिलता है.
जे.के होटल में ग्राहकों को फुल प्लेट भुटवा 200 रुपये और हाफ प्लेट 100 रुपये में उपलब्ध कराया जाता है. स्वाद के साथ-साथ इसकी गुणवत्ता का भी खास ध्यान रखा जाता है. होटल में भुटवा के अलावा कई अन्य पहाड़ी पकवान भी परोसे जाते हैं, जिनमें स्थानीय मसालों और देसी स्वाद की झलक साफ दिखाई देती है.
पहाड़ी खानपान की पहचान को आगे बढ़ाने में ऐसे छोटे होटल और स्थानीय व्यंजन बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. डंगोली का यह भुटवा अब धीरे-धीरे बागेश्वर आने वाले पर्यटकों की पसंद बनता जा रहा है. जो भी यहां एक बार इसका स्वाद चखता है, वह दोबारा यहां आने की इच्छा जरूर रखता है.