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अगर आप मिठाई खाने के शौकीन हैं, तो उत्तर प्रदेश के मऊ का लाल खुरमा जरूर आपकी लिस्ट में होना चाहिए. गुड़ से तैयार होने वाली यह पारंपरिक मिठाई अपने अनोखे स्वाद, लंबे समय तक सुरक्षित रहने की खासियत और वर्षों पुरानी विरासत के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूसरे जिलों से आने वाले ग्राहकों की भी पहली पसंद बनी हुई है.
खुरमा तो आपने बहुत खाया होगा, लेकिन क्या कभी ऐसा खुरमा खाया है जिसे हर कोई पसंद कर रहा हो? अगर नहीं, तो हम आपको बता रहे हैं उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद के कलेक्ट्रेट के सामने मिलने वाले लाल खुरमा की कहानी. इसे आम लोगों के साथ-साथ शुगर के मरीज भी काफी पसंद कर रहे हैं. इसकी खास वजह यह है कि यह खुरमा चीनी की बजाय गुड़ से बनाया जाता है, जिसके कारण लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं.
मऊ के कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर मिलने वाला सागर का लाल खुरमा काफी प्रसिद्ध है. लोग यहां पूरे दिन खुरमा का स्वाद लेते हैं और उसके साथ पानी पीते रहते हैं. वहीं, लौटते समय इसे पैक कराकर अपने घर भी ले जाते हैं. इसकी खास वजह यह है कि यह चीनी की बजाय गुड़ से बनाया जाता है. इसी कारण इसे शुगर के मरीज भी काफी पसंद करते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इसे आसानी से खाया जा सकता है और इससे कोई नुकसान नहीं होता.
खुरमा के दुकानदार सागर बताते हैं कि उनके यहां खुरमा अलग तरीके से तैयार किया जाता है. सबसे पहले मैदा को अच्छी तरह से गूंथा और मिक्स किया जाता है, फिर उसे खुरमा का आकार दिया जाता है. इसके बाद कड़ाही में तेल गर्म करके खुरमा को अच्छी तरह तला जाता है, जिससे उसका रंग लाल हो जाता है. लाल होने के बाद उसे बाहर निकालकर ठंडा होने के लिए रख दिया जाता है. इसके बाद गुड़ की चाशनी तैयार की जाती है.
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इस खुरमा की खासियत इसकी चाशनी है, जिसे चीनी की बजाय गुड़ से तैयार किया जाता है. सबसे पहले गुड़ को पानी के साथ गर्म करके अच्छी तरह चाशनी बनाई जाती है. चाशनी तैयार होने के बाद उसे आग से उतारकर कुछ देर के लिए ठंडा होने दिया जाता है. जब वह हल्की गर्म रह जाती है, तब उसमें पहले से तला हुआ लाल खुरमा डालकर भिगो दिया जाता है. खुरमा को तब तक चाशनी में रखा जाता है, जब तक वह गुड़ की चाशनी को पूरी तरह सोख नहीं लेता. इसके बाद उसे बाहर निकालकर तैयार कर लिया जाता है.
जब खुरमा पूरी तरह से गुड़ की चाशनी को अपने अंदर समा लेता है, तो उसे कड़ाही से बाहर निकाल लिया जाता है और ग्राहकों को परोसा जाने लगता है. सागर पिछले लगभग 50 वर्षों से इसी तरह खुरमा तैयार कर रहे हैं. उनके यहां मिलने वाला यह गुड़ वाला खुरमा शुगर के मरीजों के बीच भी काफी पसंद किया जाता है, क्योंकि वे अन्य खुरमा नहीं खा पाते. यही वजह है कि लोग खासतौर पर इस खुरमा का स्वाद लेने के लिए यहां पहुंचते हैं.
यह खुरमा सुबह 8 बजे से मिलना शुरू हो जाता है और शाम 7 बजे तक आसानी से बिकता रहता है. इसका स्वाद लेने के लिए सिर्फ मऊ ही नहीं, बल्कि दूसरे जनपदों से भी लोग यहां पहुंचते हैं और इसे पैक कराकर अपने साथ घर ले जाते हैं. यहां जितना खुरमा लोग मौके पर खाते हैं, उससे कई गुना ज्यादा पैक कराकर ले जाया जाता है. इसकी खास वजह यह है कि यह कई दिनों तक खराब नहीं होता और इसे शुगर के मरीजों से लेकर आम लोग भी पसंद करते हैं. यही कारण है कि इस खुरमा की मांग हमेशा बनी रहती है.
अगर इस लाल खुरमा की कीमत की बात करें तो यह 240 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिलता है. यहां हर दिन ताजा लाल खुरमा तैयार किया जाता है, जो सुबह बनने के बाद शाम तक लगभग बिक जाता है. इसकी एक खासियत यह भी है कि यह करीब 14 से 15 दिनों तक खराब नहीं होता. यही वजह है कि लोग इसे पैक कराकर अपने घर ले जाना पसंद करते हैं, क्योंकि लंबे समय तक सुरक्षित रहने के बावजूद इसका स्वाद बना रहता है.