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आगरा का पेठा सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि शहर की पहचान बन चुका है. ताजमहल की तरह दुनिया भर में मशहूर इस मिठाई को लेकर एक दिलचस्प मान्यता प्रचलित है, जिसका संबंध मुगलकाल और शाहजहां के दौर से जोड़ा जाता है.
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा को पेठा नगरी भी कहा जाता है. आगरा का पेठा ताजमहल कि तरह पुरी दुनिया में मशहूर है. आगरा में कई तरह के पेठे बनाये जाते है जिसमे सादा पेठा, अंगूरी पेठा, पान पेठा, चॉकलेट पेठा, केसर पेठा.
इस तरह आगरा में 56 प्रकार से अधिक पेठे के फ्लेवर तैयार किये जाते है. यह पेठा मुग़लकाल के समय जन्मा था बताया जाता है कि ज़ब ताजमहल का निर्माण हो रहा था तब बादशाह शाहजहाँ ने अपने शाही रसोई खाने में ऐसी मिठाई बनाने का आदेश दिया जो ताजमहल कि तरह ही सफ़ेद हो और अपनी मिठास के साथ साथ वह लंबे समय तक खराब ना हो जिससे मजदूरों को इसे बाँटा जा सके.
तब उस समय सफ़ेद सादा पेठे को बनाया गया था. उस दौर के शाही रसोई के कारीगरों ने सफेद कद्दू (पेठे) को उबाला और चीनी की चाशनी में पकाकर पेठे का निर्माण किया था. तब से लेकर आज तक आगरा का पेठा दुनिया में मशहूर हो गया. वर्तमान में तो कई प्रकार के पेठे बाजार में मिल रहे हैं.
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आगरा में पिछले 20 सालों से पेठे का व्यापार कर रहे गगन चौहान ने बताया कि इससे पहले उनके पिताजी और दादाजी भी पेठे का कार्य करते आ रहे है.
कहा कि आगरा में हमारी दुकान काफ़ी प्राचीन है और हम कई प्रकार के पेठे को बनाते है. आगरा में पेठे का जन्म मुग़ल शासन काल में ही हुआ था.
उन्होंने कहा कि दादा और पिताजी बताते है कि ज़ब ताजमहल बन रहा था तब गर्मियों में बादशाह ने ऐसी मिठाई बनाने का आदेश दिया जो लंबे समय तक चले और खराब ना हो. तब उस दौर के लोगों ने कद्दू से इस पेठे को बनाना शुरू किया जो लोगों को काफी पसंद आया. उन्होंने कहा कि सादा पेठा एक ऐसी मिठाई है जो काफी लंबे समय तक आसानी से रखकर खाई जा सकती है यह हाल ही खराब नहीं होती है.
आगरा के पेठा व्यापारी गगन चौहान ने बताया कि पेठा विदेशी लोगों को भी काफी पसंद आ रहा है. आगरा घूमने आने वाले विदेशी पर्यटक अपने साथ आगरा का पेठा भी लेकर जाते है. उनकी एक दुकान ताजमहल के पास ही है, जहाँ से सबसे ज्यादा अंग्रेज ही पेठा खाना और अपने साथ पैक करा कर लेजाना पसंद करते है.
आगरा के वरिष्ठ इतिहासकार ने कहा की पेठे का इतिहासकार मुग़लकाल के समय का है ज़ब बादशाह शाहजहाँ ने अपने शाही रसोई में ऐसी मिठाई बनाने का आदेश दिया जो लंबे समय तक खराब ना हो तब इस पेठे का जन्म हुआ जो आज वर्तमान में पुरी दुनिया में मशहूर हो चूका है.
बेशक इसका इतिहास बेहद प्राचीन है मुग़लकाल से अबतक यह अपनी छाप छोड़ रहा है. यह ऐसी मिठाई है जिसे लोग उपहार के तौर पर भी देना पसंद करते है.