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Jaipur Famous Kachori: राजधानी जयपुर की चारदीवारी में स्थित राष्ट्रीय मिष्ठान भंडार अपनी खास जीमण की कचौरी के लिए प्रसिद्ध है. तीन पीढ़ियों से संभाली जा रही यह स्वाद की विरासत 1951 से लोगों के दिलों पर राज कर रही है. कचौरी को तैयार करने के लिए दाल को 12 घंटे तक भिगोया जाता है और 18 तरह के खड़े मसालों का इस्तेमाल किया जाता है. सूखे मसाले की वजह से यह कचौरी लंबे समय तक ताजा रहती है. कभी 1 आने में मिलने वाली यह कचौरी आज 22 रुपये में बिक रही है, फिर भी इसकी लोकप्रियता बरकरार है.
जयपुर. राजधानी जयपुर का चौड़ा रास्ता और चारदीवारी क्षेत्र अपने भव्य बाजारों और पारंपरिक खानपान के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. यहां बेहतरीन खरीदारी के साथ हर बाजार में एक खास जायके की खुशबू भी बसी हुई है, जिसे लोगों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी सहेजकर रखा है. जयपुर में वैसे तो कचौरी की सैकड़ों दुकानें हैं, जहां लोग स्वादिष्ट कचौरियों का आनंद लेते हैं, लेकिन कुछ कचौरियां ऐसी हैं जिनका स्वाद चखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं. ऐसी ही एक दुकान है चारदीवारी क्षेत्र के अजमेरी गेट पर स्थित राष्ट्रीय मिष्ठान भंडार, जो अपनी खास जीमण की कचौरी के लिए पूरे जयपुर में प्रसिद्ध है.
70 साल पुराने जायके के आज भी दीवाने हैं लोग
महेश अग्रवाल बताते हैं कि गोल कचौरी के रूप में गुजराती कचौरी काफी प्रसिद्ध है, लेकिन उनकी यह खास कचौरी अलग तरीके से तैयार की जाती है. इस कचौरी के लिए दाल को पहले 12 घंटे तक भिगोकर रखा जाता है, जिससे मसालों का स्वाद उसमें अच्छी तरह समा जाता है. कचौरी की सबसे बड़ी खासियत इसमें इस्तेमाल होने वाले 18 प्रकार के खड़े मसाले हैं, जो इसे अनोखा स्वाद देते हैं.
उन्होंने बताया कि सामान्य कचौरी और जीमण की इस गोल कचौरी में सबसे बड़ा अंतर इसके मसाले में है. इसके अंदर का मसाला सूखा होता है, जिससे यह कचौरी 1 से 2 दिन तक खराब नहीं होती. यही वजह है कि लोग दूर-दूर से इसका स्वाद लेने आते हैं. शादी-विवाह जैसे आयोजनों में भी इस कचौरी के लिए बड़ी संख्या में ऑर्डर मिलते हैं. कचौरी के अलावा राष्ट्रीय मिष्ठान भंडार अपने बेहतरीन लड्डुओं और मिठाइयों के लिए भी काफी प्रसिद्ध है.
1 आने से 22 रुपये तक पहुंची कचौरी की कीमत
महेश अग्रवाल बताते हैं कि आज उनकी तीसरी पीढ़ी इस स्वाद की विरासत को संभाल रही है. यदि कीमत की बात करें तो उनके दादाजी के समय इस कचौरी की कीमत 1 आना हुआ करती थी. उस दौर में यदि कोई ग्राहक 4 आने की कचौरी खरीदता था तो उसे एक कचौरी मुफ्त दी जाती थी. आज इस खास जीमण की कचौरी की कीमत 22 रुपये है, जिसे ग्राहक इसके स्वाद के मुकाबले उचित मानते हैं. उन्होंने बताया कि पूरे जयपुर में इस तरह की खास जीमण की कचौरी केवल उनकी दुकान पर ही तैयार की जाती है. यही कारण है कि आज भी ऐसे कई ग्राहक यहां आते हैं, जो उनके दादा और पिता के समय से इस कचौरी का स्वाद लेते आ रहे हैं.
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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें