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Kitchen Hacks For Fluffy Rice: कई बार ऐसा होता है कि चावल पकाने के समय, पानी की सही मात्रा डालते हैं और उम्मीद करते हैं कि होटल जैसा फूला-फूला और दाना-दाना अलग चावल बनेगा. लेकिन जब ढक्कन खोलते हैं तो चावल चिपचिपा या गीला हो जाता है. अक्सर लोग इसे अपनी किस्मत या सस्ते राइस कुकर की गलती मान लेते हैं, लेकिन असल में इसके पीछे एक खास केमिस्ट्री होती है.
Kitchen Hacks For Fluffy Rice: रोजाना के खाने में चावल लगभग हर घर में बनते हैं, लेकिन अक्सर शिकायत यही रहती है कि चावल या तो ज्यादा गल जाते हैं या फिर इतने चिपचिपे हो जाते हैं कि दाने अलग-अलग नजर ही नहीं आते. ऐसे में लोग या तो चावल बनाना कम कर देते हैं या फिर बार-बार तरीके बदलते रहते हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी रहती है. खिले-खिले, रेस्टोरेंट जैसे परफेक्ट चावल बनाने का राज किसी महंगी सामग्री या खास बर्तन में नहीं, बल्कि सिर्फ एक जरूरी बात को सही तरह समझने और अपनाने में छिपा है. अगर यह एक बात ध्यान से ना रखी जाए, तो चाहे आप कितना भी अच्छा बासमती चावल ले आएं या कितनी ही सावधानी से गैस की आंच सम्हालें, चावल बार-बार चिपचिपे ही बनेंगे और पूरी डिश का मजा खराब कर देंगे.
चावल के दाने में चल रही है मॉलिक्यूलर जंग
हर चावल के दाने के अंदर एक खास तरह की केमिस्ट्री होती है. चावल का दाना असल में स्टार्च का एक छोटा पैकेट होता है, जो पानी में डालते ही रिएक्ट करता है. इसी वजह से पानी की मात्रा के हिसाब से पकने का समय और चावल की बनावट बदल जाती है. परफेक्ट चावल बनाने के लिए यह समझना जरूरी है कि हर दाने में दो तरह के स्टार्च होते हैं, एमायलोज और एमायलोपेक्टिन. एमायलोज चावल को सख्त और अलग-अलग दाना बनाता है, जबकि एमायलोपेक्टिन चिपचिपा बनाता है. जब चावल पकता है, तो स्टार्च के मॉलिक्यूल्स पानी में घुलने लगते हैं और एक पतली परत बनाते हैं, जो पकने के बाद दानों को जोड़ती है.
अलग-अलग किस्म के चावल का रिजल्ट अलग
‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ जर्नल में छपी एक स्टडी के मुताबिक, चिपचिपापन खासतौर पर उस एमायलोपेक्टिन की मात्रा और साइज पर निर्भर करता है, जो उबालते वक्त बाहर निकलता है. रिसर्च में पाया गया कि जब बाहर निकला स्टार्च बड़ा और ज्यादा ब्रांच वाला होता है, तो चावल ज्यादा चिपचिपा बनता है. यानी एक जैसी पानी की मात्रा में भी अलग-अलग किस्म के चावल का रिजल्ट अलग-अलग हो सकता है.
इसीलिए चावल को पकाने से पहले धोना जरूरी है. जब आप चावल को अच्छे से धोते हैं तो उसकी सतह पर जमा एक्स्ट्रा स्टार्च निकल जाता है, जिससे चावल चिपचिपा नहीं बनता. धोने के बाद भी पानी और चावल का अनुपात ही तय करता है कि अंदर का स्टार्च अपनी जगह रहेगा या गाढ़ा होकर चिपचिपा बना देगा.
पानी का अनुपात क्यों है सबसे जरूरी?
अक्सर लोग हर बार एक ही अनुपात (दो कप पानी, एक कप चावल) अपनाते हैं लेकिन यह तरीका हर बार सही नहीं होता. पानी सिर्फ चावल को गीला नहीं करता बल्कि पकने के बाद ठंडा होने पर भी उसके मॉलिक्यूल्स की मूवमेंट को प्रभावित करता है, जिसे रेट्रोग्रेडेशन कहते हैं. इंटरनेशनल जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल मैक्रोमॉलिक्यूल्स में छपी एक स्टडी के मुताबिक, पानी की मात्रा स्टार्च के दानों के गाढ़ा होने की प्रक्रिया को कंट्रोल करती है. अगर पानी ज्यादा हो जाए तो चावल के दाने फूल जाते हैं और स्टार्च ज्यादा बाहर निकलता है, जिससे चावल चिपचिपा बन जाता है. ज्यादा पानी से स्टार्च के क्रिस्टल बनने की प्रक्रिया भी धीमी हो जाती है, जिससे चावल लंबे समय तक गीला बना रहता है.
खीले-खीले चावल के लिए अपनाएं यह तरीका
चावल को पहले अच्छे से धो लें और उसे 20 से 30 मिनट तर भिगोकर रख दें. फिर 3 से 4 बार धोकर बचे कुचे स्टार्च को निकाल दें. पतीले में चावल और पानी का अनुसार 1:2 यानी एक कप चावल और दो कप पानी रखें. पानी उबलने पर चावल डालें और धीमी आंच पर कम से कम 15 मिनट तक पकाएं. चावल के पक जाने के बाद नींबू का रस या एक चम्मच घी डाल दें, ऐसा करने से चावल के दाने अलग अलग बिल्कुल बाजार जैसे हो जाएंगे.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें