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Achaar Shop In Gorakhpur: गोरखपुर की 80 साल पुरानी यह दुकान आज भी अपने देसी अचार और मुरब्बों के दम पर लोगों के दिलों में खास जगह बनाए हुए है. यहां आंवला, बेल, करौंदा, आम और गाजर जैसे फलों से पारंपरिक तरीके से मुरब्बा तैयार किया जाता है, वहीं आम, नींबू, कटहल और हरी मिर्च के चटपटे अचार लोगों को पुराने घरेलू स्वाद की याद दिलाते हैं. दुकान संभाल रहे प्राणनाथ बताते हैं कि सही मसालों, धैर्य और देसी विधि से घर पर भी स्वादिष्ट अचार और मुरब्बा बनाया जा सकता है. यही वजह है कि पीढ़ियां बदलने के बाद भी इस दुकान का स्वाद आज तक लोगों की जुबान पर कायम है.
गोरखपुर. स्वाद और परंपरा की पहचान बनी एक 80 साल पुरानी अचार और मुरब्बे की दुकान आज भी लोगों को पुराने देसी स्वाद से जोड़ रही है. पिता की विरासत को संभाल रहे प्राणनाथ बताते हैं कि घर पर आसानी से कई तरह के फलों का मुरब्बा और अचार तैयार किया जा सकता है. सही विधि और संतुलित मसालों के इस्तेमाल से यह स्वाद लंबे समय तक सुरक्षित रहता है. प्राणनाथ के मुताबिक आंवला, एलोवेरा, बेल, सेब, करौंदा, आम, गाजर और पेठा जैसे फलों से बेहतरीन मुरब्बा तैयार किया जाता है. खासकर आंवले का मुरब्बा सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है क्योंकि यह स्वाद के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. वहीं बेल और करौंदे का मुरब्बा गर्मियों में शरीर को ठंडक देने का काम करता है.
मुरब्बा बनाने की आसान विधि
मुरब्बा बनाने के लिए सबसे पहले फल को अच्छी तरह धोकर साफ किया जाता है. इसके बाद फल को हल्का उबालकर नरम किया जाता है, ताकि उसमें चीनी अच्छी तरह समा सके, फिर बराबर मात्रा में चीनी की चाशनी तैयार की जाती है. चाशनी में इलायची, केसर या लौंग जैसे हल्के मसाले स्वाद बढ़ाने के लिए डाले जाते हैं. इसके बाद फलों को चाशनी में धीमी आंच पर पकाया जाता है, जब फल पूरी तरह चाशनी सोख लेता है तो उसे ठंडा करके कांच के जार में भर दिया जाता है.
इन फलों से तैयार होता है खास अचार
प्राणनाथ बताते हैं कि आम, नींबू, कटहल, करौंदा, अमड़ा और हरी मिर्च जैसे फलों और सब्जियों से स्वादिष्ट अचार बनाया जाता है. गोरखपुर और पूर्वांचल में खासतौर पर आम और नींबू का अचार सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. कई लोग कटहल और करौंदे के अचार को भी बड़े चाव से खाते हैं. अचार बनाने के लिए सबसे पहले फल या सब्जी को अच्छी तरह धोकर धूप में सुखाया जाता है, ताकि उसमें नमी बिल्कुल न रहे. इसके बाद उसमें सरसों, मेथी, सौंफ, हल्दी, लाल मिर्च और नमक जैसे मसाले मिलाए जाते हैं. फिर सरसों का तेल गर्म करके ठंडा किया जाता है और उसे अचार में डाला जाता है. प्राणनाथ बताते हैं कि अगर अचार को कुछ दिनों तक धूप दिखाई जाए तो उसका स्वाद और भी बढ़ जाता है.
स्वाद के साथ जुड़ी पुरानी परंपरा
गोरखपुर की यह पुरानी दुकान सिर्फ अचार और मुरब्बा नहीं बेचती, बल्कि पुराने घरेलू स्वाद और पारंपरिक रेसिपी को भी जिंदा रखे हुए है. आज भी यहां लोग देसी तरीके से बने मुरब्बे और अचार खरीदने पहुंचते हैं. प्राणनाथ का कहना है कि अगर सही सामग्री और धैर्य के साथ घर में अचार और मुरब्बा बनाया जाए तो उसका स्वाद बाजार से कहीं ज्यादा बेहतर होता है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें