Disadvantages of eating sprouted potatoes: आलू का सेवन हर दिन सभी करते हैं. घर में कोई सब्जी नहीं होती है, तो आलू की सब्जी, भुजिया, भरता कुछ भी लोग बनाकर खा लेते हैं. बिना आलू के काम नहीं चल सकता है, क्योंकि इसे कई सब्जियों में डाला जाता है. काफी लोग हर दिन एक किलो आलू खरीदने की बजाय 5 किलो आलू खरीद कर स्टोर कर लेते हैं. लेकिन, जब आप इसका इस्तेमाल डेली नहीं करते हैं, ये सब्जी की टोकरी में कई दिनों तक ऐसे ही पड़े रहते हैं तो इनमें हरे-हरे रंग के छोटे-छोटे अंकुर निकल आते हैं. ऐसे में लोगों को लगता है कि हरे रंग का या अंकुर निकला हुआ आलू खाना सेहत के लिए सही नहीं होता है. चलिए जानते हैं कि क्या है अंकुरित आलू और इसके सेवन से क्या नुकसान हो सकते हैं?
अंकुरित आलू क्या होता है? (what is Sprouted Potatoes)
जब आप आलू का उपयोग नहीं करते हैं, तो इसमें छोटे अंकुर निकलने शुरू हो जाते हैं. धीरे-धीरे ये बड़े हो जाते हैं. इसे ही अंकुरित आलू कहा जाता है. अधिक दिनों तक इस्तेमाल ना करना, गर्म जगह पर या किचन में गैस स्टोव के पास, लंबे समय तक स्टोर करने से अंकुर निकलने शुरू हो जाते हैं.
अंकुरित आलू में क्या बदलाव होता है?
जब आलू में अंकुर निकलते हैं तो इसमें प्राकृतिक रूप से सोलनाइन (Solanine) और चाकोनाइन (Chaconine) नामक विषैले तत्व बढ़ने लगते हैं. ये पदार्थ पौधे को कीड़ों और फंगस से बचाने के लिए बनते हैं. हालांकि, अंकुरित आलू को अधिक खाने से इंसानों के नुकसान पहुंच सकता है.
अंकुरित आलू खाने के फायदे?
आमतौर पर इस तरह के अंकुरित आलू के सेवन से एक्सपर्ट भी मना करते हैं, क्योंकि इसमें कोई फायदा नहीं मौजूद होता है. अंकुरित आलू, हरे रंग के आलू को खाने से परहेज ही करना चाहिए. हां, अंकुर बहुत छोटे हैं, आलू हरा ना हुआ हो, स्मेल खराब ना हो तो आप उसे अंकुर वाले भाग को काटकर पका सकते हैं. कई दिनों तक रखा हुआ आलू, जिसके अंकुर भी बड़े हो गए हों तो उसे ना खाएं.
अंकुरित आलू खाने के नुकसान
-फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ सकता है. इस तरह के आलू में सोलनाइन और चाकोनाइन की मात्रा बढ़ जाती है. इससे शरीर में विषैले प्रभाव उत्पन्न हो सकते हैं.
-अंकुरित आलू खाने से उल्टी, पेट दर्द, दस्त, मतली, सिरदर्द, गंभीर मामले में तंत्रिका तंत्र पर असर हो सकता है. बहुत ज्यादा विषैले आलू खाने से चक्कर, कमजोरी, भ्रम, सुस्ती जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
-बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है. जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उन्हें अंकुरित आलू नहीं खाना चाहिए.
– आलू का रंग हरा हो गया है तो समझ लें कि इसमें सोलनाइन की मात्रा अधिक है. ऐसे आलू खाने से भी बचें.
कब नहीं खाना चाहिए अंकुरित आलू?
बहुत ज्यादा अंकुर निकल गए हों तो फेंक दें.
आलू नरम या सिकुड़ा हुआ हो तो न खाएं.
हरा रंग आलू के छिलके, गूदे में दिखाई दे.
खराब स्मेल आ रही है तो आलू ना खाएं.
छोटे अंकुर हों तो इसे पूरी तरह निकाल दें. हरे भाग को काट दें. अच्छी तरह से पकाकर ही खाएं.
आलू को अंकुरित होने से कैसे बचाएं?
ठंडी और सूखी जगह पर रखें.
धूप से दूर रखें.
फ्रिज में आलू को रखने से बचें.
आलू को कभी भी प्याज के साथ स्टोर न करें.
इससे भी अंकुर जल्दी निकल सकते हैं.