झारखंड की पारंपरिक खान-पान संस्कृति में कलमी साग का खास महत्व है. गर्मियों के मौसम में लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं. कलमी साग को विटामिन और पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है. इसे खाने से शरीर हल्का महसूस करता है और यह आंखों की सेहत व खून की कमी को संतुलित रखने में भी मददगार माना जाता है. इसे बनाना बेहद आसान है. सबसे पहले ताजा कलमी साग को अच्छी तरह धोकर छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है. इसके बाद कढ़ाई में तेल गर्म कर उसमें लहसुन, सूखी लाल मिर्च और बारीक कटा प्याज भुना जाता है. प्याज हल्का सुनहरा होने पर उसमें कटा हुआ साग और स्वादानुसार नमक डाल दिया जाता है. साग पकने के दौरान अपना पानी छोड़ता है और धीरे-धीरे नरम हो जाता है. इसे करीब 15 से 20 मिनट तक धीमी आंच पर पकाया जाता है. तैयार होने के बाद लोग इसे चावल, दाल या रोटी के साथ खाना पसंद करते हैं.