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Jodhpur Famous Sweet: राजस्थान के जोधपुर की पहचान केवल उसके भव्य किलों और शाही विरासत से ही नहीं, बल्कि उसकी खास मिठाइयों से भी जुड़ी हुई है. इनमें सबसे प्रसिद्ध है मावा कचौरी, जिसे कभी राजघरानों की पसंदीदा मिठाई माना जाता था. बाहर से कुरकुरी और अंदर से मावे, मेवों तथा इलायची की खुशबू से भरपूर यह मिठाई आज भी लोगों के दिलों पर राज करती है. खास चाशनी में डूबी मावा कचौरी का स्वाद इसे अन्य मिठाइयों से अलग बनाता है. जोधपुर आने वाले पर्यटक इसे चखे बिना अपनी यात्रा अधूरी मानते हैं. शहर की कई पुरानी मिठाई दुकानों में यह पारंपरिक स्वाद वर्षों से उसी अंदाज में परोसा जा रहा है. शाही रसोई से निकली यह मिठाई अब जोधपुर की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है.
जोधपुर: सोने-चांदी के बर्तनों में परोसी जाने वाली यह मिठाई कभी मारवाड़ के राजाओं की खास पसंद हुआ करती थी. जब मारवाड़ के राजमहलों की रसोई में बनने वाले व्यंजन केवल राजा-महाराजाओं और खास मेहमानों तक ही सीमित रहते थे. शाही थालियों में परोसी जाने वाली हर मिठाई अपने साथ स्वाद के साथ-साथ वैभव और परंपरा की कहानी भी समेटे होती थी. इन्हीं शाही व्यंजनों में एक मिठाई ऐसी थी, जिसने समय के साथ महलों की ऊंची दीवारों को पार कर आम लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बना ली.
आज यह मिठाई न केवल जोधपुर की पहचान बन चुकी है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की भी पहली पसंद है. हम बात कर रहे हैं जोधपुर की मशहूर मावा कचौरी की, जिसका स्वाद आज भी मारवाड़ की शाही विरासत की मिठास को जीवंत रखे हुए है.
राजसी रसोई से हुई थी शुरुआत
कहा जाता है कि मारवाड़ के राजघरानों में विशेष अवसरों, त्योहारों और मेहमानों के स्वागत के लिए कई तरह के व्यंजन तैयार किए जाते थे. इन्हीं में से एक थी मावे और सूखे मेवों से भरी खास कचौरी. समय के साथ यह शाही व्यंजन आम लोगों तक पहुंचा और धीरे-धीरे जोधपुर की पहचान बन गया.
क्या है इसकी खासियत?
मावा कचौरी बाहर से कुरकुरी और अंदर से मावे, बादाम, काजू, पिस्ता व इलायची के स्वाद से भरपूर होती है. इसे तलने के बाद चाशनी में डुबोया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी खास हो जाता है. यही वजह है कि जोधपुर आने वाले पर्यटक इसे चखे बिना वापस नहीं जाते. आज जोधपुर की मावा कचौरी की मांग राजस्थान ही नहीं बल्कि देश के कई राज्यों और विदेशों तक पहुंच चुकी है. त्योहारों और शादियों में इसकी विशेष डिमांड रहती है.कई पर्यटक इसे अपने साथ पैक करवाकर ले जाते हैं.
मावा कचौरी की रेसिपी
मावा कचौरी बनाने के लिए सबसे पहले मैदा में घी मिलाकर नरम आटा गूंथा जाता है. इसके बाद मावा खोया, काजू, बादाम, पिस्ता, किशमिश और इलायची पाउडर को मिलाकर स्वादिष्ट भरावन तैयार की जाती है. आटे की छोटी-छोटी लोइयों में इस मिश्रण को भरकर कचौरी का आकार दिया जाता है और धीमी आंच पर सुनहरा होने तक तला जाता है. तलने के बाद गर्म कचौरियों को केसर और इलायची से सुगंधित चाशनी में डुबोया जाता है, जिससे उनमें मिठास पूरी तरह समा जाती है. बाहर से कुरकुरी और अंदर से मावे व मेवों से भरपूर यह शाही मिठाई अपने अनोखे स्वाद के कारण आज भी जोधपुर की सबसे प्रसिद्ध मिठाइयों में गिनी जाती है.
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