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Basa Fish Benefits: यदि आप मछली खाने के शौकीन हैं, लेकिन कांटों के डर से दूरी बना लेते हैं, तो ‘बासा मछली’ (Basa Fish) आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभर रही है. अपने बेहद मुलायम मांस, कम कांटों और लाजवाब स्वाद के कारण यह मछली इन दिनों घरों से लेकर बड़े रेस्टोरेंट तक की पहली पसंद बन चुकी है. प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होने के साथ-साथ यह जेब पर भी भारी नहीं पड़ती. आइए जानते हैं कि क्यों तेजी से लोकप्रिय हो रही है बासा मछली और इसके सेवन के दौरान आपको किन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए.
बासा मछली आजकल लोगों की पसंदीदा मछलियों में शामिल हो रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह इसका मुलायम मांस, कम कांटे और आसान तरीके से पकाया जाना है. यह दूसरी कई मछलियों के मुकाबले सस्ती भी पड़ती है, इसलिए घरों से लेकर रेस्टोरेंट तक इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. इसका स्वाद हल्का होता है, जिससे इसे फ्राई, करी, ग्रिल और सूप जैसी कई डिश में इस्तेमाल भी किया जा सकता है. यही वजह है कि बासा मछली तेजी से लोकप्रिय हो रही है.
रामपुर के मत्स्य पालक सत्येंद्र कुमार बताते हैं कि बासा मछली एक मीठे पानी की मछली है, जो मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में पाई जाती है. इसका शरीर लंबा और चमड़ी चिकनी होती है. यह नदी और तालाब जैसे वातावरण में अच्छी तरह बढ़ती है. बासा मछली तेजी से बढ़ने वाली प्रजातियों में गिनी जाती है और कुछ ही महीनों में बाजार के लिए तैयार हो जाती है. इसी वजह से इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है और सालभर इसकी उपलब्धता बनी रहती है.
मछली खाने वाले कई लोग ज्यादा कांटों की वजह से कुछ प्रजातियों से दूरी बनाते हैं, लेकिन बासा मछली के साथ ऐसा नहीं है. इसमें कांटे कम होते हैं और इसका मांस काफी मुलायम होता है. यही वजह है कि बच्चे और बुजुर्ग भी इसे आसानी से खा सकते हैं. इसे साफ करना और पकाना भी आसान माना जाता है. स्वाद और कई सारी सुविधाओं की वजह से इसे बाजार में खास पहचान मिल रही है.
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विशेषज्ञ डॉ. अमरेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि बासा मछली में अच्छी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है. शरीर की मांसपेशियों को मजबूत रखने और ऊतकों की मरम्मत में प्रोटीन अहम भूमिका निभाता है. यही कारण है कि फिटनेस पसंद करने वाले लोग और बीमारी से उबर रहे लोग भी इसे अपने भोजन में शामिल करते हैं. इसके अलावा यह आसानी से पच भी जाती है. संतुलित मात्रा में खाई जाए तो यह रोजमर्रा के भोजन का अच्छा हिस्सा बन सकती है.
बासा मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है, जिसे शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है. यह हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है और दिमाग के सामान्य कामकाज के लिए भी उपयोगी माना जाता है. इसके अलावा इसमें कुछ जरूरी विटामिन और खनिज भी पाए जाते हैं. हालांकि, किसी भी खाद्य पदार्थ की तरह इसका सेवन भी संतुलित मात्रा में करना जरूरी है, ताकि शरीर को पूरा लाभ मिल सके.
बासा मछली खरीदते समय सिर्फ कीमत पर ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता पर भी ध्यान देना चाहिए. हमेशा भरोसेमंद विक्रेता या साफ-सुथरे स्रोत से ही मछली खरीदें. ताजी मछली का रंग और गंध सामान्य होती है. विशेषज्ञ डॉ. अमरेंद्र का कहना है कि सही तरीके से पाली और संग्रहित की गई मछली का सेवन करना ज्यादा सुरक्षित होता है. इसलिए, खरीदारी करते समय थोड़ी सावधानी आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है.
बासा मछली को कई तरीकों से पकाया जा सकता है, लेकिन पकाने का तरीका उसके पोषण पर असर डालता है. डॉक्टर के मुताबिक, ज्यादा तेल में तलने से अतिरिक्त वसा बढ़ सकती है. वहीं ग्रिल, स्टीम या हल्की करी के रूप में पकाने से इसके पोषक तत्व बेहतर तरीके से बने रहते हैं. अगर आप स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर भोजन चुनते हैं, तो कम तेल वाले विकल्प ज्यादा अच्छे माने जाते हैं. इससे स्वाद भी बना रहता है और पोषण भी मिलता है.
हालांकि बासा मछली पोषक तत्वों से भरपूर मानी जाती है, लेकिन कुछ लोगों को इसका सेवन सोच-समझकर करना चाहिए. जिन लोगों को मछली से एलर्जी है या जो हृदय, गुर्दे और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसे नियमित भोजन में शामिल करना चाहिए. किसी भी खाद्य पदार्थ की तरह बासा मछली का भी संतुलित मात्रा में सेवन करना ही बेहतर माना जाता है. इससे स्वाद और सेहत दोनों का फायदा मिल सकता है.