Grow Moringa At Home: मोरिंगा यानी सहजन का पेड़ आज सिर्फ गांवों या बड़े बगीचों तक सीमित नहीं रह गया है. बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता के बीच लोग अब अपने घरों की बालकनी और छतों पर भी इस पौधे को उगाने लगे हैं. खास बात यह है कि मोरिंगा को ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती और सीमित जगह में भी यह अच्छी तरह बढ़ सकता है. इसके पत्ते, फूल और फलियां पोषक तत्वों से भरपूर मानी जाती हैं, इसलिए इसे अक्सर “सुपरफूड” और “चमत्कारी पौधा” कहा जाता है, अगर आपके पास बड़ा बगीचा नहीं है तो भी चिंता की बात नहीं है. एक छोटी बालकनी, कुछ घंटों की धूप और सही देखभाल के साथ आप आसानी से घर पर मोरिंगा उगा सकते हैं.

कई शहरी परिवार अब अपनी किचन गार्डनिंग में मोरिंगा को शामिल कर रहे हैं ताकि उन्हें ताजी और रसायन-मुक्त पत्तियां मिल सकें. यह पौधा न केवल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है बल्कि घर के आसपास हरियाली बढ़ाकर वातावरण को भी ताज़गी देता है. आइए जानते हैं कि बालकनी में मोरिंगा उगाने का सही तरीका क्या है और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

1. सही गमला चुनना है सबसे पहला कदम
मोरिंगा की जड़ें तेजी से फैलती हैं, इसलिए इसके लिए गहरा और मजबूत गमला चुनना बेहद जरूरी है. विशेषज्ञ 18 से 24 इंच गहरे कंटेनर की सलाह देते हैं. गहराई मिलने से जड़ें स्वस्थ रहती हैं और पौधा मजबूती से बढ़ता है. बालकनी में जगह कम होने पर भी लंबवत विकास वाला यह पौधा आसानी से फिट हो जाता है. मजबूत गमला तेज हवा या बारिश के दौरान भी पौधे को स्थिर बनाए रखता है.

2. मिट्टी का मिश्रण तय करेगा पौधे की सेहत
हल्की और जल निकासी वाली मिट्टी चुनें मोरिंगा को ऐसी मिट्टी पसंद होती है जिसमें पानी जमा न हो. इसके लिए सामान्य बगीचे की मिट्टी में जैविक खाद, वर्मीकम्पोस्ट या पुरानी गोबर खाद मिलाई जा सकती है. हल्की और भुरभुरी मिट्टी जड़ों तक हवा पहुंचाने में मदद करती है. इससे पौधा तेजी से बढ़ता है और रोगों का खतरा भी कम रहता है. यदि मिट्टी बहुत भारी होगी तो पानी रुक सकता है, जिससे जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है.

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3. धूप है तेज विकास का राज
मोरिंगा एक ऐसा पौधा है जिसे भरपूर धूप की जरूरत होती है. इसे ऐसी जगह रखें जहां रोजाना कम से कम 6 से 8 घंटे सीधी धूप मिल सके. कई लोग पौधे को ऐसी बालकनी में रख देते हैं जहां केवल थोड़ी देर रोशनी आती है. ऐसे में पौधे की बढ़त धीमी हो सकती है और पत्तियां भी कम विकसित होती हैं. पर्याप्त धूप मिलने पर पत्तियां गहरे हरे रंग की और पोषक तत्वों से भरपूर बनती हैं.

4. पानी देने में न करें यह गलती
जरूरत से ज्यादा पानी नुकसान पहुंचा सकता है मोरिंगा को मध्यम मात्रा में पानी चाहिए. मिट्टी नम रहनी चाहिए लेकिन उसमें पानी जमा नहीं होना चाहिए. गर्मियों में पानी की जरूरत थोड़ी बढ़ सकती है, जबकि बारिश के मौसम में कम पानी देना बेहतर रहता है. एक आसान तरीका यह है कि पानी देने से पहले उंगली से मिट्टी की ऊपरी परत जांच लें. अगर मिट्टी सूखी महसूस हो तो ही पानी दें. लगातार गीली मिट्टी जड़ों को सड़ा सकती है.

5. नियमित छंटाई से मिलेगा ज्यादा फायदा
बालकनी में मोरिंगा उगाते समय उसकी ऊंचाई नियंत्रित रखना जरूरी होता है. इसके लिए समय-समय पर शाखाओं की छंटाई करें. छंटाई से पौधा झाड़ीदार आकार लेता है और नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं. यही नई शाखाएं ज्यादा पत्तियां पैदा करती हैं. इससे पौधा कॉम्पैक्ट भी बना रहता है और छोटी जगह में आसानी से संभाला जा सकता है.

कब मिलेगी पहली फसल?
मोरिंगा उगाने वालों के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी पत्तियों के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता. आमतौर पर 2 से 3 महीनों के भीतर पत्तियां तोड़ी जा सकती हैं और इन्हें सब्जी, सूप, चाय या अन्य व्यंजनों में इस्तेमाल किया जा सकता है.

वहीं सहजन की फलियां यानी ड्रमस्टिक्स आने में लगभग 8 से 10 महीने लग सकते हैं. नियमित रूप से पत्तियां तोड़ने से पौधे में नई वृद्धि होती रहती है और उत्पादन लगातार बना रहता है.

छोटे स्थान में बड़ा फायदा
आज जब शहरों में खुली जगह लगातार कम होती जा रही है, तब मोरिंगा जैसे पौधे घरों में प्राकृतिक हरियाली लाने का आसान विकल्प बन रहे हैं. यह पौधा कम जगह में उगता है, कम देखभाल मांगता है और लंबे समय तक उपयोगी रहता है. सही गमला, पर्याप्त धूप और संतुलित पानी के साथ आपकी बालकनी भी एक छोटे सुपरफूड गार्डन में बदल सकती है.



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