सीतामढ़ी. आधुनिक दौर में व्यापार को सफल बनाने के लिए तकनीक का सहारा लेना बेहद जरूरी हो गया है. मिठाई व्यवसाय (हलवाई उद्योग) में भी एक ऐसी तकनीक ने दस्तक दी है, जो व्यापारियों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है. पारंपरिक तरीके से जिन मिठाइयों को बनाने में भारी जनशक्ति और लंबा समय लगता था, अब वे मशीन के जरिए कुछ ही मिनटों में तैयार हो रही हैं.

चंदन मिष्ठान भंडार में लगी आधुनिक रसगुल्ला मेकिंग मशीन इसका जीता-जागता उदाहरण है. यह मशीन न केवल काम को आसान बना रही है, बल्कि मिठाई बनाने की पुरानी प्रक्रिया को भी बदल रही है. हलवाइयों और बड़े मिठाई व्यापारियों के लिए यह मशीन एक बेहतर निवेश साबित हो रही है.

कम समय में रिकॉर्ड उत्पादन और एक जैसे आकार
मिठाई कारखाने की संचालक रेनू सिंह ने बताया कि इस स्वचालित मशीन की सबसे बड़ी खासियत इसकी कार्यक्षमता और गति है. जहां आम मजदूरों को 5 से 6 हजार रसगुल्ले तैयार करने में 6 से 10 घंटे का समय लग जाता है, वहीं यह मशीन महज एक से डेढ़ घंटे में यह काम पूरा कर देती है. मशीन के संचालक ने बताया कि यह मशीन तेजी से और अच्छी फिनिशिंग के साथ काम करती है.

इसकी मदद से एक ही आकार और समान वजन की गोलियां (लोइयां) कटती हैं, जिससे सभी रसगुल्ले देखने में एक जैसे और आकर्षक बनते हैं. हालांकि, मशीन से गोलियां कटने के बाद उन्हें पकाने में थोड़ा समय लगता है, लेकिन एक साथ चार कड़ाही का इस्तेमाल किया जाए, तो करीब दो घंटे के भीतर पूरी खेप तैयार हो जाती है.

मजदूरी के भारी खर्च से बड़ी राहत
उन्होंने लोकल18 से बातचीत में बताया कि किसी भी व्यवसाय में लेबर खर्च यानी मजदूरों पर होने वाला खर्च मुनाफे को कम कर देता है. मिठाई बनाने के पारंपरिक तरीके में 6000 रसगुल्ले तैयार करने के लिए कम से कम 5 से 6 कुशल कारीगरों और सहायकों की जरूरत होती है. आज के समय में एक मुख्य कारीगर की दैनिक मजदूरी 1000 से 1200 रुपये तक होती है, जिससे प्रतिदिन का लेबर खर्च काफी बढ़ जाता है.

यह नई मशीन इस खर्च को लगभग शून्य कर देती है. जो काम मजदूर 8 से 10 घंटे में करते हैं, उसे यह मशीन एक घंटे में पूरा कर देती है. इस तरह यह व्यापारियों की लेबर कॉस्ट बचाकर सीधे उनके मुनाफे को बढ़ाने का काम करती है.

लागत, आधुनिक सेटअप और भविष्य का मुनाफा
इस आधुनिक और उपयोगी रसगुल्ला मेकिंग मशीन की कीमत करीब 4.25 लाख रुपये है, जिसे कोलकाता से मंगवाया गया है. हालांकि, इस मशीन पर कोई सरकारी सब्सिडी नहीं ली गई है, फिर भी अपने फायदों के कारण यह काफी किफायती साबित हो रही है. मिठाई निर्माण को पूरी तरह आधुनिक और साफ-सुथरा बनाने के लिए इस कारखाने में केवल यही मशीन नहीं, बल्कि एक पूरा सेटअप तैयार किया गया है.

इसमें दूध को सुरक्षित रखने के लिए बीएमसी (बल्क मिल्क चिलर), मिठाई को ठंडा और ताजा रखने के लिए कोल्ड रूम और पकाने के लिए स्टीम बॉयलर भी शामिल हैं. शुद्धता, सफाई और कम लागत में ज्यादा उत्पादन चाहने वाले छोटे-बड़े व्यापारियों के लिए यह सेटअप भविष्य की राह दिखा रहा है.



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