होमफोटोलाइफ़फूड

एक महीने के लिए बाजार में आता है जंगली मुरेला! फायदों में करेला भी छूटा पीछे

Last Updated:

Karauli Hindi News: जंगली मुरेला एक मौसमी देसी सब्जी है, जिसे कई क्षेत्रों में करेला का छोटा भाई भी कहा जाता है. यह सब्जी मुख्य रूप से बरसात के मौसम में सीमित समय के लिए बाजार में दिखाई देती है और अपने औषधीय गुणों के कारण काफी पसंद की जाती है. स्वाद में हल्की कड़वाहट लिए यह सब्जी पोषक तत्वों से भरपूर मानी जाती है. ग्रामीण इलाकों में इसे पाचन सुधारने, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और रक्त शर्करा नियंत्रण में सहायक माना जाता है. इसकी सब्जी बनाने के लिए मुरेला को धोकर छोटे टुकड़ों में काटा जाता है और प्याज, टमाटर व मसालों के साथ भूनकर पकाया जाता है. कुछ लोग इसे कुरकुरा तलकर भी खाते हैं.

बारिश का मौसम आते ही बाजारों में कई तरह की देसी और मौसमी सब्जियां नजर आने लगती हैं. इनमें एक ऐसी सब्जी भी है, जिसे लोग करेले का छोटा भाई कहते हैं. नाम है मुरेला. आकार में छोटा और स्वाद में करेले से भी ज्यादा कड़वा यह देसी खजाना सालभर नहीं, बल्कि केवल कुछ दिनों के लिए ही बाजार में दिखाई देता है.

इस देसी को बहुत से लोग जानते तक नहीं हैं. हालांकि ग्रामीण इलाकों में इसे औषधीय गुणों से भरपूर सब्जी माना जाता है. सब्जी व्यापारियों के अनुसार मुरेला पूरी तरह प्राकृतिक रूप से बरसात के मौसम में जंगलों और झाड़ियों में उगता है. इसकी उपलब्धता बेहद सीमित होती है.

सब्जी व्यापारी बताते हैं कि मुरेला की सब्जी बनाने का तरीका बिल्कुल करेले जैसा ही होता है. हालांकि स्वाद के मामले में यह करेले से भी अधिक कड़वा होता है. आकार छोटा होने के बावजूद इसके गुण इसे खास बनाते हैं. स्थानीय लोग इसे शुरूआती बरसात की सबसे उपयोगी देसी सब्जियों में गिनते हैं.

Add News18 as
Preferred Source on Google

मुरेला एक प्रकार की वनस्पति जड़ी-बूटी की तरह काम करता है. यह साल में केवल एक बार ही बाजार में आता है और इसकी कीमत आमतौर पर 50 से 80 रुपये प्रति किलो तक रहती है. मुरेला का सीजन ककोड़ा सब्जी के आसपास ही शुरू होता है, लेकिन इसकी उपलब्धता उससे भी कम समय तक रहती है.

मुरेला औषधीय गुणों का खजाना है. इसमें विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को कई प्रकार की बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. यह खास देसी सब्जी सब्जी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पाचन तंत्र को मजबूत बनाने और मौसमी संक्रमणों से बचाव में सहायक मानी जाती है.

विशेषज्ञों के अनुसार मुरेला का नियमित और संतुलित सेवन ताप-ज्वर जैसे मौसमी बुखारों से बचाव में मददगार हो सकता है. इसके अलावा यह आंखों की सेहत के लिए भी लाभकारी माना जाता है. यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग आज भी इस देसी सब्जी को औषधीय भोजन के रूप में महत्व देते हैं.

कम समय के लिए बाजार में आने वाली यह अनोखी सब्जी स्वाद में भले ही कड़वी हो, लेकिन इसके स्वास्थ्य लाभ इसे बरसात के मौसम की सबसे खास देसी सब्जियों में शामिल कर देते हैं. मुश्किल से मुरेला बाजारों में महीनेभर के लिए आता है. इसलिए इसकी डिमांड भी अच्छी रहती है.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

Write A Comment