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शाहजहांपुर में दो युवाओं ने ‘छोटा हाथी’ गाड़ी को ही चोखा-बाटी की दुकान में बदल दिया है. पारंपरिक मसालों और देसी घी से तैयार इस व्यंजन का स्वाद ऐसा है कि रोजाना 300 से 350 ग्राहक यहां पहुंच रहे हैं. अब इनकी चलती-फिरती दुकान को शादी और पार्टियों के लिए भी एडवांस बुकिंग मिलने लगी है.

दुकान के मालिक रामू ने बताया कि उनके कुछ परिचित पड़ोसी जिले बरेली में चोखा-बाटी बेचने का काम करते थे. वहीं से प्रेरणा लेकर रामू और पवन ने महसूस किया कि शाहजहांपुर के लोगों को भी यह पारंपरिक स्वाद जरूर पसंद आएगा. इसके बाद दोनों युवाओं ने मिलकर शाहजहांपुर आने का फैसला किया और अपनी किस्मत आजमाने के लिए इस अनोखे सफर की शुरुआत की.

शाहजहांपुर आने के बाद रामू और पवन ने एक अनूठा बिजनेस मॉडल अपनाया. उन्होंने सबसे पहले एक ‘छोटा हाथी’ यानी माल वाहक मैजिक खरीदा. इसके बाद उन्होंने पूरी की पूरी दुकान इसी गाड़ी के अंदर ही सेट कर डाली. अब दोनों साथी रोजाना अपनी इस चलती-फिरती दुकान को लेकर शहर के मुख्य बाजार और चौराहों की तरफ निकल पड़ते हैं.

रामू और पवन अपनी इस खास चोखा-बाटी की गाड़ी को रोजाना शाहजहांपुर के सुभाष चौक पर खड़ी करते हैं. जैसे ही उनकी गाड़ी आकर रुकती है, वैसे ही पूर्वांचल के इस पारंपरिक और लजीज व्यंजन का स्वाद लेने वाले ग्राहकों का आना शुरू हो जाता है. देखते ही देखते दुकान पर चोखा-बाटी प्रेमियों का तांता लग जाता है.

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ग्राहकों को गरमा-गरम और ताजा चोखा-बाटी परोसने के लिए इन युवाओं की मेहनत सुबह 6 बजे से ही शुरू हो जाती है. रामू सुबह उठकर सभी सामग्रियां तैयार करते हैं. इसके बाद ठीक सुबह 8 बजे वह अपनी गाड़ी सुभाष चौक पर लाते हैं. उनकी यह गाड़ी सुबह 8 बजे से लेकर शाम को करीब 5 बजे तक ग्राहकों की सेवा में खड़ी रहती है.

रामू का कहना है कि उनकी बाटी का स्वाद बेहद लाजवाब और खास होता है क्योंकि इसे बनाने का तरीका पारंपरिक है. वह बाटी के लिए गेहूं के आटे के साथ चने का शुद्ध सत्तू इस्तेमाल करते हैं. इसके साथ ही इसमें खड़े मसाले और अजवाइन मिलाई जाती है. इन खास मसालों के सटीक मिश्रण के कारण ही बाटी बेहद खस्ता और स्वादिष्ट बनती है.

बाटी के साथ परोसे जाने वाले चोखे को आलू, बैंगन, हरी धनिया, लहसुन, अदरक और पके हुए टमाटर से तैयार किया जाता है. स्वाद बढ़ाने के लिए रामू चोखे में खड़े मसालों को खुद अपने हाथों से पीसकर मिलाते हैं. इसके अलावा अदरक, लहसुन, हरी मिर्च और कच्चे सरसों के तेल से बनी तीखी चटनी इस स्वाद में चार चांद लगा देती है.

लोकल 18 से बात करते हुए रामू ने बताया कि उनकी पूर्वांचल की मशहूर चोखा-बाटी का स्वाद लेने के लिए रोजाना करीब 300 से 350 ग्राहक आते हैं. सुभाष चौक पर दुकान लगते ही लोग खुद तो पेट भरकर खाते ही हैं, साथ ही स्वाद के दीवाने बहुत से लोग अपने परिवार के लिए इसे पैक करवा कर घर भी ले जाते हैं.

दाम की बात करें तो यहां साधारण चोखा-बाटी 30 रुपए में दो मिलती है, जबकि देसी घी से चुपड़ी हुई बाटी 40 रुपए की दो बेची जाती है. ग्राहकों को सबसे ज्यादा देसी घी वाली बाटी ही पसंद आती है. गाड़ी पर बेचने के अलावा, इन युवाओं को अब शादी और पार्टियों के लिए भी एडवांस बुकिंग मिलने लगी है, जहां वे ऑर्डर पर जाते हैं.

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