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Ghee Purity Test: घी भारतीय रसोई का अहम हिस्सा है, लेकिन आजकल बाजार में मिलावटी घी की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है. कई बार नकली घी में सस्ते तेल और वनस्पति घी मिलाया जाता है, जिससे उसकी गुणवत्ता कम हो जाती है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आप जो घी खा रहे हैं वह शुद्ध है या नहीं. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एफएसएसएआई ने घी की जांच का एक आसान तरीका बताया है.

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शुद्ध घी की पहचान कैसे करें

Ghee Purity Test: घी का नाम सुनते ही स्वाद, खुशबू और सेहत तीनों की याद आती है. भारतीय घरों में घी का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है. दाल, रोटी, खिचड़ी, हलवा और कई पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद घी के बिना अधूरा माना जाता है. यही वजह है कि लगभग हर घर में घी जरूर मौजूद रहता है. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामले लगातार सामने आए हैं. घी भी इससे अछूता नहीं है. कई जगहों पर मुनाफा कमाने के लिए घी में सस्ते तेल, वनस्पति घी और अन्य पदार्थ मिलाए जाते हैं. ऐसे मिलावटी घी का सेवन स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है. इसलिए यह जानना जरूरी है कि आपके घर में रखा घी वास्तव में शुद्ध है या नहीं.

मिलावटी घी आखिर होता क्या है
मिलावटी घी वह होता है जिसमें शुद्ध दूध से बने घी की जगह या उसके साथ अन्य सस्ते पदार्थ मिला दिए जाते हैं. इनमें वनस्पति घी, हाइड्रोजेनेटेड फैट, सस्ते खाद्य तेल और अन्य वसा शामिल हो सकती हैं. ऐसा करने से उत्पादन लागत कम हो जाती है, लेकिन घी की गुणवत्ता और पोषण दोनों प्रभावित होते हैं. कई बार देखने में ऐसा घी बिल्कुल असली जैसा लगता है, इसलिए आम उपभोक्ता आसानी से धोखा खा सकता है.

एफएसएसएआई ने बताया घी जांचने का आसान तरीका
खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण भारत यानी एफएसएसएआई ने हाल ही में घी की शुद्धता जांचने का एक आसान तरीका साझा किया है. इस परीक्षण की मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि घी में वनस्पति घी या अन्य मिलावटी तत्व मौजूद हैं या नहीं. इस टेस्ट के लिए सबसे पहले एक टेस्ट ट्यूब में एक मिलीलीटर पिघला हुआ घी लिया जाता है. इसके बाद उसमें एक मिलीलीटर सांद्र हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिलाया जाता है. फिर आधा चम्मच चीनी डालकर मिश्रण को करीब दो मिनट तक अच्छी तरह हिलाया जाता है. इसके बाद मिश्रण को कुछ समय के लिए स्थिर छोड़ दिया जाता है.

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रंग बदलने से मिलती है मिलावट की जानकारी
इस परीक्षण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रंग में होने वाला बदलाव है. अगर घी शुद्ध है तो उसमें किसी तरह का रंग परिवर्तन नहीं दिखाई देगा. वहीं अगर घी में वनस्पति घी या अन्य मिलावट मौजूद है तो एसिड की परत गुलाबी या लाल रंग की दिखाई देने लगती है. यह संकेत माना जाता है कि घी पूरी तरह शुद्ध नहीं है और उसमें मिलावट हो सकती है.

ऐसा क्यों बदलता है रंग
विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रक्रिया में हाइड्रोक्लोरिक एसिड चीनी के अणुओं को तोड़ता है. इसके बाद कुछ रासायनिक क्रियाएं होती हैं, जिनके कारण फर्फुरल नामक यौगिक बनता है. जब यह यौगिक वनस्पति घी या तिल के तेल में मौजूद कुछ तत्वों के संपर्क में आता है तो लाल या गुलाबी रंग पैदा होता है. यही वजह है कि मिलावटी घी की पहचान इस रंग परिवर्तन से हो जाती है.

मिलावटी घी खाने के नुकसान
मिलावटी घी का सेवन लंबे समय तक करने से कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं. इसमें इस्तेमाल होने वाले सस्ते तेल और कृत्रिम वसा शरीर को वह पोषण नहीं दे पाते जो शुद्ध घी देता है. इसके अलावा कुछ मामलों में मिलावटी तत्व स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकते हैं. इसलिए हमेशा भरोसेमंद स्रोत से घी खरीदना और उसकी गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है.



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