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कोडरमा की पारंपरिक झिल्लियां मिठाई का क्रेज चार दशकों से बरकरार है. यह मिठाई गेहूं के आटे, गुड़ और रिफाइंड तेल से बनती है. इसमें कोई कृत्रिम रंग या केमिकल नहीं होता है. स्वाद के साथ यह सेहत के लिए भी फायदेमंद है. इसे 15 से 20 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है.
कोडरमा: आज जब बाजार में कई तरह की मिठाइयों और पैकेज्ड स्नैक्स की भरमार है. तब भी कोडरमा की झिल्लियां मिठाई अपनी अलग पहचान बनाए हुए है. लगभग चार दशक बाद भी इस मिठाई की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है. बच्चों से लेकर बड़े तक सभी इसे बड़े चाव से खाते हैं और बाहर जाने वाले लोग भी इसे अपने साथ ले जाना पसंद करते हैं. यह मिठाई विशेष रूप से बच्चों की पसंदीदा है. इसका कुरकुरा स्वाद बच्चों को आकर्षित करता है. गेहूं और गुड़ होने के कारण उन्हें पोषण भी मिलता है. गुड़ में मौजूद आयरन और खनिज तत्व तथा गेहूं के पोषक गुण इसे एक पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक मिठाई बनाते हैं.
स्वाद के साथ पोषण से भरपूर है यह मिठाई
झुमरी तिलैया के राजगढ़िया मोड़ के समीप वर्ष 1988 से झिल्लियां मिठाई का निर्माण और बिक्री कर रहे दुकान संचालक तुलसी प्रसाद वर्मा ने बताया कि यह मिठाई केवल स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि पौष्टिकता के कारण भी लोगों के बीच लोकप्रिय है. उन्होंने कहा कि बदलते समय में कई पारंपरिक व्यंजन और मिठाइयां लोगों की पसंद से दूर होती जा रही हैं. लेकिन झिल्लियां मिठाई का स्वाद आज भी बरकरार है. इस मिठाई की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह भूख मिटाने के साथ शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करती है. इसे बनाने में मुख्य रूप से गेहूं का आटा, गुड़ और थोड़ी मात्रा में रिफाइंड तेल का उपयोग किया जाता है. इसमें किसी तरह के कृत्रिम रंग, फ्लेवर या रसायन का इस्तेमाल नहीं होता. जिससे यह अन्य मिठाइयों की तुलना में अधिक प्राकृतिक और पौष्टिक मानी जाती है.
15 से 20 दिनों तक आराम से कर सकते हैं इस्तेमाल
उन्होंने बताया कि झिल्लियां मिठाई बनाने के लिए सबसे पहले गेहूं के आटे में पानी और थोड़ा सा रिफाइंड तेल मिलाकर अच्छी तरह गूंथा जाता है. इसके बाद इसे करीब एक इंच लंबे आकार में तैयार कर गर्म तेल में सुनहरा और कुरकुरा होने तक तला जाता है. फिर गुड़ की गाढ़ी चाशनी बनाकर उसमें इन टुकड़ों को डुबोया जाता है. अंत में ऊपर से हल्का आटा छिड़ककर गुड़ की परत को सख्त किया जाता है. जिससे मिठाई का स्वाद और बनावट दोनों बेहतर हो जाते हैं. उन्होंने बताया कि झिल्लियां मिठाई सामान्य तापमान पर 15 से 20 दिनों तक सुरक्षित रहती है. इसमें किसी प्रकार का रस नहीं होने के कारण इसे पैक कर कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है. यही वजह है कि बाहर रहने वाले लोग कोडरमा आने पर इसे अपने साथ जरूर ले जाते हैं. फिलहाल इसकी कीमत सौ रुपये प्रति किलो है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.