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Samstipur Famous Chole Kulche: समस्तीपुर कॉलेज के पास संतोष कुमार के खास छोले-कुलचे का स्टॉल लगता है, जहां सुबह-शाम स्वाद प्रेमियों की भीड़ देखी जा सकती है. 30 रुपये में एक प्लेट सफेद मटर के छोले और दो कुल्चे मिलते हैं. संतोष खास तांबे के बर्तन में छोले रखते हैं, जिससे इसका स्वाद लंबे समय तक खराब नहीं होता.

समस्तीपुर. अगर आप चटपटा और मसालेदार खाना पसंद करते हैं, तो समस्तीपुर कॉलेज के पास मिलने वाला छोले-कुलचे आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं. बदलते मौसम में जहां लोग हल्के मसालेदार और स्वादिष्ट व्यंजनों की तलाश करते हैं, वहीं यह स्टॉल स्वाद प्रेमियों की पहली पसंद बन चुका है. समस्तीपुर कॉलेज के बगल में लगने वाले इस ठेले पर रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. खास बात यह है कि रविवार को छोड़कर सप्ताह के लगभग हर दिन यहां ग्राहकों की अच्छी-खासी भीड़ लगी रहती है.

स्थानीय लोगों के अलावा दूसरे इलाकों से भी लोग इसका स्वाद लेने पहुंचते हैं. यहां छोले को पारंपरिक तांबे के बर्तन में रखा जाता है, जिससे उसका स्वाद लंबे समय तक बरकरार रहता है और जल्दी खराब भी नहीं होता. महज 30 रुपये में मिलने वाला यह जायका लोगों को बार-बार यहां आने के लिए मजबूर कर देता है.

मसालों का अनोखा मिश्रण बनाता है स्वाद को खास
ठेला संचालक संतोष कुमार बताते हैं कि छोले वे रोजाना घर पर तैयार करके लाते हैं, जबकि कुलचा पहले से तैयार रहता है. उनका कहना है कि इस व्यंजन का असली स्वाद उसमें इस्तेमाल होने वाले मसालों में छिपा है. छोले तैयार करने से पहले सफेद मटर को अच्छी तरह उबाला जाता है. इसके बाद प्याज, टमाटर, हरा धनिया, हरी मिर्च, लाल मिर्च, इमली का पानी, गरम मसाला और अन्य मसालों का संतुलित मिश्रण मिलाया जाता है.

कुल मिलाकर छह से सात प्रकार के मसालों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसका स्वाद बेहद खास बन जाता है. कुलचे को मक्खन या रिफाइंड में सेंका जाता है. बटर वाला कुलचा 40 रुपये और रिफाइंड वाला 30 रुपये प्रति प्लेट मिलता है. कुलचा उत्तर प्रदेश से मंगाया जाता है और इसे इस तरह तैयार किया जाता है कि उसका स्वाद और नरमाहट लंबे समय तक बनी रहे.

सुबह से शाम तक लगी रहती है ग्राहकों की भीड़
संतोष कुमार बताते हैं कि कुलचा पाव रोटी की तरह होता है और इसे तीन से चार दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है. वहीं छोले रोजाना ताजा तैयार किए जाते हैं, ताकि ग्राहकों को बेहतर गुणवत्ता और स्वाद मिल सके. कॉलेज के छात्र-छात्राओं के अलावा नौकरीपेशा लोग, राहगीर और परिवार के साथ आने वाले ग्राहक भी यहां नियमित रूप से पहुंचते हैं.

शाम के समय इस ठेले पर सबसे अधिक भीड़ देखने को मिलती है. कम कीमत, साफ-सफाई, ताजे मसालों का इस्तेमाल और लाजवाब स्वाद ने इस छोले-कुलचे को समस्तीपुर की पहचान बना दिया है. यही वजह है कि एक बार इसका स्वाद चखने वाले लोग दोबारा यहां जरूर लौटते हैं और अपने परिचितों को भी इसकी जानकारी देते हैं.

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Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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