देश के कई राज्यों में नीट पेपर लीक के विरोध में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। वहीं, इसी मुद्दे को लेकर सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक, जिन्हें पिछले हफ़्ते जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन स्थल से अस्पताल ले जाया गया था, ने वहां भी अपनी भूख हड़ताल जारी रखी है। गुरुवार को उनकी भूख हड़ताल का 26वां दिन था, वे अपनी मांगों पर कायम हैं और कहा है, जब तक मेरी मांगें सरकार नहीं मानती, तब तक भूख हड़ताल जारी रहेगा। इस बीच, उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के पास कांग्रेस के हालिया विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन पेपर लीक के खिलाफ चल रहे छात्रों के आंदोलन के लिए सच्चे समर्थन को नहीं दर्शाता है।
आंग्मो ने कहा-जनता को बेवकूफ ना बनाएं
न्यूज एजेंसी इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि विपक्ष के नेताओं को प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने के बजाय दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध कर रहे छात्रों के साथ शामिल होना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि वांगचुक की पब्लिक इमेज का इस्तेमाल राजनीतिक मकसद के लिए किया जा रहा है और लोग सच्चे और दिखावटी कामों के बीच फर्क समझते हैं। सोशल एंटरप्रेन्योर और शिक्षाविद आंग्मो ने न्यूज़ चैनल से कहा, “प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन में सच्चाई की कमी थी। अब जनता को बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता। यह जागा हुआ भारत है। जो लोग सच्चे नहीं हैं, उन्हें युवा बाहर कर देंगे।”
गीतांजलि का ये बयान तब आया है, जब राहुल गांधी और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने 21 जुलाई को प्रधानमंत्री के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास के पास धरना दिया। यह धरना छात्रों के संसद मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई के विरोध में था। पुलिस द्वारा मौके से हटाए जाने और राहुल गांधी व अन्य कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद यह विरोध प्रदर्शन खत्म हुआ।
गीतांजलि ने प्रदर्शन में शामिल छात्रों से की है अपील
आंग्मो ने बिना किसी सबूत के जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शन को दिल्ली में हुई हिंसा की घटनाओं से जोड़ने के ख़िलाफ़ भी अपील की। X पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा है और उन्होंने छात्रों की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों पर चिंता ज़ाहिर की। उन्होंने कहा, “एक शिक्षक के तौर पर, मीडिया में हमारे छात्रों की छवि को खराब होते देखना मेरे लिए बहुत दुखद है। जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है। अगर दिल्ली में कहीं और हिंसा की खबरें आती हैं, तो कृपया बिना सबूत के उन्हें इस आंदोलन से जोड़ने की जल्दबाज़ी न करें।”
उन्होंने प्रदर्शनकारियों के प्रति अपनाए गए रवैये पर भी सवाल उठाए और कहा, “मैं अक्सर सोचती हूं कि ऐसा कौन-सा सिस्टम है जो अपने ही छात्रों पर इतनी जल्दी शक करने लगता है? उनकी चिंताओं को सुनने के बजाय उनकी नीयत पर सवाल उठाना ज़्यादा आसान क्यों लगता है?”
गीतांजलि का ट्वीट
छात्रों के साथ निष्पक्ष व्यवहार की मांग करते हुए उन्होंने कहा, “हमारे बच्चे सुरक्षा के हकदार हैं, न कि उन्हें विलेन के तौर पर दिखाए जाने के। उनकी बात सुनी जानी चाहिए, न कि ऐसे नैरेटिव से दबा दी जानी चाहिए जो कुछ खास लोगों के हितों को साधते हों।”