न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की परेशानी बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई परमाणु हथियार बनाने को लेकर ज्यादा उत्सुक हैं, अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई से कहीं ज्यादा। यह आकलन अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध से पहले जुटाई गई खुफिया जानकारी पर आधारित है, जिसमें इंटरसेप्ट की गई बातचीत भी शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि मुज्तबा खामेनेई को परमाणु हथियार विकसित करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी, जबकि अयातुल्ला अली खामेनेई परमाणु हथियार को लेकर ज़्यादा सतर्क व्यक्ति थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कोई नई खुफिया जानकारी नहीं है जो मुज्तबा के सत्ता संभालने के बाद मिली हो, बल्कि यह पहले की जानकारी का ही एक विश्लेषण है। पश्चिमी खुफिया एजेंसियों ने लंबे समय से ईरान के इस दावे को खारिज किया है कि उसने कभी परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं की, जबकि इज़राइल का कहना है कि तेहरान ने हाल के वर्षों में परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में लगा हुआ है।
ईरान अमेरिका युद्ध
अमेरिकी अधिकारियों का अब मानना है कि ईरान के भीतर परमाणु हथियार हासिल करने की वकालत करने वाले गुटों का प्रभाव बढ़ गया है, जो मानते हैं कि कि भविष्य के हमलों को रोकने के लिए ऐसे हथियार ज़रूरी हैं। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट है कि इज़राइल का मानना है कि ईरान ने हज़ारों सेंट्रीफ्यूज को नतांज़ के पास एक बहुत सुरक्षित ज़मीन के नीचे बनी जगह पर पहुंचा दिया है, जिसे ‘पिकएक्स माउंटेन’ के नाम से जाना जाता है। यह जगह ज़मीन में बहुत गहराई पर बनी है, इसलिए हवाई हमलों में इसे निशाना बनाना मुश्किल है। यह अभी साफ़ नहीं है कि सेंट्रीफ्यूज को कहां से वहां पहुंचाया गया।
ईरान अमेरिका युद्ध
IAEA का अनुमान है कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध से पहले ईरान ने 60% शुद्धता तक एनरिच किया हुआ 440 किलोग्राम से ज़्यादा यूरेनियम जमा कर लिया था। यूरेनियम का यह स्तर हथियारों में इस्तेमाल होने वाले ग्रेड के करीब है और अगर इसे और एनरिच किया जाए, तो यह कई न्यूक्लियर हथियारों के लिए काफी हो सकता है। जानकारों का कहना है कि ईरान को अभी भी यूरेनियम को 90% तक एनरिच करने, एक काम करने लायक वॉरहेड बनाने और एक डिलीवरी सिस्टम विकसित करने की ज़रूरत होगी। इस प्रक्रिया में महीनों या उससे ज़्यादा समय लग सकता है और अमेरिकी व इज़राइली खुफिया एजेंसियां इस पर कड़ी नज़र रखेंगी।