नई दिल्ली:आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इससे उनके राजनीतिक जीवन को एक अप्रत्याशित झटका लगा है। वे बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण राज्यों में भरोसेमंद चुनाव प्रबंधक के रूप में भी काफी सफल रणनीतिकार माने जाते रहे हैं। शिक्षा मंत्री के रूप में प्रधान महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के क्रियान्वयन का प्रमुख चेहरा बने।  लेकिन नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में भड़के विरोध प्रदर्शनों के अंतत: उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेज दिया। प्रधान का इस्तीफा आंदोलन को लेकर सरकार के शुरुआती उपेक्षापूर्ण रुख से एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। 

विवाद के बाद इस्तीफा देने वाले मोदी सरकार के दूसरे मंत्री

जून में खुद धर्मेंद्र प्रधान ने कॉकरोच जनता पार्टी को ‘दहशतगर्दों की बी-टीम’ बताया था और आरोप लगाया था कि यह उन ताकतों की ओर से काम कर रही है, जिन्हें जनता ने नकार दिया है। पीएम मोदी के कार्यकाल में सार्वजनिक विवाद के बाद इस्तीफा देने वाले वह दूसरे केंद्रीय मंत्री हैं। उनसे पहले 2018 में ‘मी टू’ अभियान के दौरान यौन उत्पीड़न के आरोप सामने आने पर एम.जे.अकबर ने विदेश राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।किसी विवाद के बाद इस्तीफा देनेवाले धर्मेंद्र प्रधान देश के दूसरे शिक्षा मंत्री हैं। इससे पहले 1967 में एम.सी.छागला ने नीतिगत और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार से मतभेद के कारण इंदिरा गांधी कैबिनेट से इस्तीफा दिया था। 

ABVP से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

धर्मेंद्र प्रधान ने वर्ष 1983 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (ABVP) के कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक सफर की शुरुआत की। वे तीन बार केंद्रीय मंत्री बने। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। धर्मेंद्र प्रधान (57) पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रधान के बेटे हैं और हाल के वर्षों में बिहार व हरियाणा जैसे राज्यों में चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी देने के मामले में भी बीजेपी की पहली पसंद रहे। 

उत्तराखंड और यूपी चुनाव में निभाई अहम भूमिका

धर्मेंद्र प्रधान को 2017 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव और 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। उनका सबसे महत्वकांक्षी लक्ष्य उनका गृह राज्य ओडिशा रहा, जहां 2024 में बीजेपी ने पहली बार अपने दम पर सरकार बनाई। पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्हें केवल एक जिम्मेदारी दी गई थी, जो नंदीग्राम सीट की कमान संभालना था। इसी सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव लड़ा था और राज्य में उनकी पार्टी की भारी जीत के बावजूद वह यह सीट हार गई थीं। 

वर्ष 2000 में ओडिशा की पल्लाहारा सीट से लड़ा पहला चुनाव

धर्मेंद्र प्रधान ने वर्ष 2000 में ओडिशा की पल्लाहारा सीट से चुनाव लड़कर अपने चुनावी सफर की शुरुआत की। उन्होंने 2004 में देवगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। इस सीट पर पहले उनके पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रधान का कब्जा था। वर्ष 2009 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद प्रधान ने सीधे चुनावी राजनीति से दूरी बना ली। हालांकि, उनकी संगठनात्मक क्षमता और कामकाज के कौशल के कारण 2010 में उन्हें भाजपा का महासचिव बनाया गया। इसके बाद 2012 में वह बिहार से राज्यसभा के लिए चुने गए। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने के बाद धर्मेंद्र प्रधान को स्वतंत्र प्रभार के साथ पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री बनाया गया। 

‘उज्ज्वला मैन’ क्यों कहा जाने लगा?

गरीब परिवारों को मुफ्त LPG कनेक्शन देने वाली उज्ज्वला योजना के कारण धर्मेंद्र प्रधान को लोकप्रिय रूप से ‘उज्ज्वला मैन’ कहा जाने लगा। उन्हें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले केंद्रीय मंत्री का श्रेय भी दिया जाता है। वर्ष 2017 में केंद्रीय मंत्रिमंडल के फेरबदल में उन्हें इसी मंत्रालय का कैबिनेट मंत्री बनाया गया। साथ ही कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में भी उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया और पेट्रोलियम मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। धर्मेंद्र प्रधान को 2021 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री तथा कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री बनाया गया। शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री के रूप में उन्हें अपने कार्यकाल में महत्वाकांक्षी नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। 

2024 में ओडिशा की संबलपुर सीट से जीत दर्ज की

धर्मेंद्र प्रधान ने 2024 में ओडिशा की संबलपुर लोकसभा सीट से जीत दर्ज कर 15 साल बाद सदन में वापसी की। उन्होंने बीजू जनता दल (BJP) के प्रणब प्रकाश दास को 1.19 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया। वर्ष 2024 में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें एक बार फिर शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। हालांकि, उनका यह कार्यकाल कथित पेपर लीक विवाद के बीच कठिन शुरुआत के साथ शुरू हुआ। ओडिशा में बीजेपी के प्रमुख चेहरों में शामिल धर्मेंद्र प्रधान को विधानसभा चुनाव में नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली बीजू जनता दल (BJP) को हराकर 78 सीट पर जीत हासिल करने के बाद राज्य के पहले बीजेपी सीएम की दौड़ में भी माना जा रहा था। ओडिशा के तालचेर के रहने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने भुवनेश्वर स्थित उत्कल विश्वविद्यालय से मानव विज्ञान (एंथ्रोपोलॉजी) में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की है। (इनपुट-भाषा)





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