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Chawal ka Anarsa Recipe : सावन के त्योहार की मिठास बढ़ानी है तो घर पर बनाएं दादी-नानी के जमाने वाला पारंपरिक चावल का अनरसा. जानिए सही भिगोने का समय, आटा तैयार करने की ट्रिक और ऐसा आसान तरीका, जिससे हर बार अनरसा बाहर से कुरकुरा और अंदर से नरम बने.

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अनरसा चावल और गुड़ या चीनी से बनने वाली एक पारंपरिक भारतीय मिठाई है.

सावन का महीना आते ही घरों में पकवानों की खुशबू फैलने लगती है. कहीं मालपुआ बनता है तो कहीं खीर, लेकिन एक मिठाई ऐसी भी है जो पहले लगभग हर घर में बनती थी. उसका नाम है चावल का अनरसा. खासतौर पर बिहार, झारखंड के कई हिस्सों में यह पारंपरिक मिठाई त्योहारों और शुभ अवसरों पर जरूर बनाई जाती थी. समय के साथ इसकी जगह बाजार की मिठाइयों ने ले ली, लेकिन आज भी दादी-नानी के हाथों का बना अनरसा लोगों को बचपन की याद दिला देता है.

अनरसा चावल और गुड़ या चीनी से बनने वाली एक पारंपरिक भारतीय मिठाई है.

क्या है चावल का अनरसा?
अनरसा चावल और गुड़ या चीनी से बनने वाली एक पारंपरिक भारतीय मिठाई है. इसकी खासियत यह है कि बाहर से हल्का कुरकुरा और अंदर से नरम व मुलायम होता है. ऊपर से तिल की परत इसका स्वाद कई गुना बढ़ा देती है. सही तरीके से बनाया जाए तो यह कई दिनों तक खराब भी नहीं होता.

चावल का अनरसा बनाने के लिए सामग्री
• 2 कप पुराने चावल
• 1 से 1¼ कप बूरा चीनी या बारीक कुटा गुड़
• ½ कप सफेद तिल
• 2-3 बड़े चम्मच दूध (जरूरत पड़ने पर)
• 1-2 बड़े चम्मच दही (वैकल्पिक, मिश्रण को मुलायम करने के लिए)
• घी या रिफाइंड तेल (तलने के लिए)
• 1 चुटकी इलायची पाउडर (वैकल्पिक, स्वाद के लिए)
टिप: पारंपरिक अनरसा बनाने के लिए पुराने (aged) चावल का इस्तेमाल बेहतर माना जाता है, क्योंकि इससे अनरसा ज्यादा कुरकुरा और अच्छी बनावट वाला बनता है.

परफेक्ट अनरसा बनाने के लिए अपनाएं ये तरीका-
सबसे पहले अच्छे क्वालिटी के चावल को धोकर 2 से 3 दिन तक पानी में भिगोकर रखें. इस दौरान रोज पानी बदलते रहें. इसके बाद चावल का पानी पूरी तरह निकालकर उन्हें हल्का सूखने दें. ध्यान रखें कि चावल पूरी तरह सूखने नहीं चाहिए, उनमें हल्की नमी बनी रहे. अब इन्हें बारीक पीसकर आटा तैयार कर लें.
अब इस आटे में बूरा चीनी या बारीक कुटा गुड़ मिलाएं और इसे अच्छी तरह गूंथ लें. कई पारंपरिक रेसिपी में इस मिश्रण को 8 से 12 घंटे ढककर रखने की सलाह दी जाती है, ताकि मिठास और चावल अच्छी तरह मिल जाएं. इससे अनरसा ज्यादा स्वादिष्ट बनता है.

ऐसे दें अनरसे को सही आकार
तैयार मिश्रण से छोटी-छोटी लोइयां बनाएं. इन्हें सफेद तिल में हल्का दबाकर लपेट लें और हथेली से धीरे-धीरे चपटा करें. अब कढ़ाई में मध्यम आंच पर घी या तेल गर्म करें. अनरसे को तेज आंच पर तलने की गलती न करें, क्योंकि इससे वह बाहर से जल्दी भूरा हो जाएगा और अंदर से कच्चा रह सकता है. धीमी से मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक तलें.
दादी-नानी की ये ट्रिक्स जरूर अपनाएं
अगर अनरसा टूट रहा है तो समझिए मिश्रण थोड़ा सूखा है. इसमें थोड़ा-सा दूध या एक-दो चम्मच दही मिलाकर दोबारा गूंथ सकते हैं. वहीं अगर मिश्रण बहुत ढीला है तो थोड़ा चावल का आटा मिला दें. तलते समय एक साथ ज्यादा अनरसे डालने से बचें. इससे उनका आकार खराब हो सकता है.

क्यों खास है यह पारंपरिक मिठाई?
चावल का अनरसा सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि भारतीय रसोई की पुरानी विरासत है. इसे बनाते समय पूरा परिवार एक साथ बैठकर तैयारी करता था, जिससे त्योहारों की रौनक और बढ़ जाती थी. आज जब लोग पारंपरिक व्यंजनों की ओर लौट रहे हैं, तब यह मिठाई भी फिर से लोकप्रिय हो रही है.

अगर इस सावन आप घर में कुछ अलग और पारंपरिक बनाना चाहते हैं, तो चावल का अनरसा जरूर ट्राई करें. दादी-नानी की इस आसान रेसिपी से बना अनरसा न सिर्फ स्वाद में शानदार लगेगा, बल्कि घर के बड़े-बुजुर्गों को भी पुराने दिनों की मीठी यादें ताजा कर देगा.



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