कन्नूर: केरल में राष्ट्रीय प्रतीकों और सरकारी कार्यक्रमों को लेकर सियासी विवाद लगातार बढ़ रहा है। केरल के पूर्व सीएम और विपक्षी नेता पिनाराई विजयन ने स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में पूरा वंदे मातरम् गाने को अनिवार्य करने के निर्देश का विरोध किया है। विजयन ने इसे RSS के एजेंडे को लागू करने की कोशिश बताया और इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की।
पूरा वंदे मातरम् गाने पर जताई आपत्ति
पिनाराई विजयन ने कहा कि देश ने वंदे मातरम् की पूरी रचना को अनिवार्य तौर पर गाने को कभी भी स्वीकार नहीं किया। परंपरागत रूप से वंदे मातरम् के शुरुआती दो अंतरों को ही राष्ट्रीय गान के साथ पब्लिक प्रोग्राम में अपनाया जाता रहा है।
RSS की नीति के अंतर्गत पूरा वंदे मातरम् देश ने स्वीकार नहीं किया। इस निर्णय को वापस लिया जाना चाहिए। सिर्फ शुरुआती 2 पंक्तियां ही पर्याप्त हैं: पिनाराई विजयन
कांग्रेस को दिलाई धर्मनिरपेक्षता की याद
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री विजयन ने केरल सरकार और कांग्रेस लीडरशिप पर भी निशाना साधा। विजयन ने सीएम वीडी सतीशन और यूडीएफ सरकार पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि वंदे मातरम् के पूरे संस्करण को अपना लेना कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष सोच के खिलाफ है।
केरल सरकार पर लगाया झुकने का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि केरल सरकार सियासी दबाव के आगे झुक रही है। केरल सरकार, RSS के एजेंडे के सामने किस हद तक झुक गई है, यह शपथ ग्रहण के वक्त से ही नजर आ रहा है।
उठाया धर्मनिरपेक्षता की भावना पर असर का मुद्दा
विजयन का कहना है कि पहले से चले आ रहे सार्वजनिक कार्यक्रमों के नियमों में बदलाव करने से समाज के कुछ वर्ग खुद को अलग-थलग फील कर सकते हैं। इससे केरल के कार्यक्रमों की धर्मनिरपेक्षता की भावना पर असर पड़ सकता है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
केरल के मुख्य सचिव बिश्वनाथ सिन्हा की तरफ से 6 अगस्त को रिलीज किए गए एक पत्र के बाद यह विवाद सामने आया है। यह लेटर केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की ओर से भेजे गए एक संचार के बाद रिलीज किया गया था। लेटर में कहा गया है कि वंदे मातरम् के गायन को लेकर भारत सरकार की तरफ से जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाना है। इससे पहले, मौलाना मदनी ने वंदे मातरम् को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि मुसलमान सिर्फ एक अल्लाह की इबादत करता है।
(इनपुट- ANI)
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