सुनीता आहूजा ने कई बार कहा है कि अगले जन्म में वह प्रार्थना करेंगी कि उन्हें गोविंदा बेटे के रूप में मिलें, क्योंकि गोविंदा अपनी मां से बहुत प्यार करते थे। अब गोविंदा ने अपनी मां निर्मला देवी के साथ अपने रिश्ते के बारे में बात की और बताया कि उनकी मौत ने उन्हें कितना दुखी कर दिया था। गोविंदा की मां का निधन 1996 में हुआ था और उनके खोने का दुख इतना गहरा था कि एक बार एक्टर नर्मदा नदी में चले गए थे। यह सोचकर कि शायद वह उनसे दोबारा मिल पाएंगे। इस दौरान वह लगभग आत्महत्या ही करने वाले थे।

मां को खोने का गम नहीं सह पाए गोविंदा

ANI से बात करते हुए, गोविंदा ने उस समय महसूस किए गए दर्द को याद किया। गोविंदा ने बताया कि उनकी मौत का उन पर कितना गहरा असर पड़ा था और उन्होंने माना कि उस दौरान उनके मन में आत्महत्या करने का ख्याल भी आया था। उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत दर्द में था। मुझे बहुत ज्यादा तकलीफ हो रही थी। उस समय मुझे लगा कि सब कुछ खत्म हो गया है। बस यही अंत था।’ उस घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा, ‘तो मैं नर्मदा नदी के पास था। मैंने सोचा कि मैं नदी में थोड़ा और आगे जाऊंगा और अपनी मां से दोबारा मिल पाऊंगा। इसलिए मैं नदी में चला गया।’

गोविंदा ने मां की मौत के बाद आत्महत्या पर तोड़ी चुप्पी

जब उनसे पूछा गया कि क्या उस समय उन्हें आत्महत्या करने का ख्याल आ रहा था तो गोविंदा ने कहा, ‘कुछ हद तक। मैं अपनी मां से बहुत जुड़ा हुआ था। मैं उनसे बहुत प्यार करता था।’ हालांकि, उन्होंने बताया कि वह अपनी हरकतों को अपनी जान लेने की कोशिश के तौर पर नहीं देखते थे। उन्होंने कहा, ‘दुनिया इसे यही कहती है। लोग आत्महत्या जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। असल में हमारे यहां ऐसा कुछ नहीं होता। जिंदगी कभी खत्म नहीं होती। यह नए रूप लेती है, नए आकार लेती है।’

गोविंदा का दर्दनाक खुलासा

गोविंदा ने यह भी याद किया कि कैसे एक पुजारी, जिन्हें वह राम कुंडल के नाम से याद करते हैं। उन्होंने बीच-बचाव किया और नदी से बाहर निकलने में उनकी मदद की। एक्टर ने कहा, ‘उन्होंने मुझे आवाज दी और मेरी तरफ आए। मैं नदी से बाहर आया और उन्होंने पूछा क्या हुआ गोविंदा? मुझे एहसास हुआ कि उस समय किसी ने मुझसे कहा था कि मैं कुछ गलत कर रहा हूं और मैंने एक सबक सीखा। मुझे एहसास हुआ कि मुझे अपने बच्चों के लिए जीना है।’ इसके साथ ही गोविंदा ने कहा कि उस मानसिक स्थिति से उबरने और जिंदगी का नया मकसद खोजने में उन्हें 15 दिन से ज्यादा का समय लगा। इस अनुभव ने उनके करियर और स्टारडम को देखने के नजरिए को भी बदल दिया।

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