बालाघाट जिले के परसवाड़ा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस विधायक मधु भगत के एक तीखे बयान ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। हाल ही में बाघ के हमलों से प्रभावित गांवों का दौरा करने के बाद विधायक ने कान्हा वन प्रबंधन और वन विभाग को चेतावनी दी कि अगर बैगा आदिवासी समुदाय को उनके पारंपरिक तीर-धनुष वापस दे दिए गए तो वे एक-एक करके जंगली जानवरों का शिकार करेंगे और वह खुद उनके साथ मिलकर इस हमले का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने मीडिया से यह संदेश अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए भी कहा। यह घटना मध्य प्रदेश के टाइगर इलाकों में वन्यजीव संरक्षण और इंसानी सुरक्षा के बीच बढ़ते तनाव को दिखाती है।
बाघ के आतंक से परेशान गांव वाले
यह विवाद कान्हा बफर जोन के पास बाघों से जुड़ी कई जानलेवा घटनाओं के बाद शुरू हुआ है। अगस्त 2026 की शुरुआत में पर्रापुर बैगाटोला गांव में सुगनी बाई नाम की एक महिला की मौत हो गई। एक बाघ रात में उनकी झोपड़ी में घुस आया। उन्हें सिर से पकड़ा और लगभग 300 मीटर तक घसीट ले गया। बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई। हाल ही की एक और घटना में मलखेड़ी में एक किसान बाघ के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से दहशत फैल गई है। खासकर परसवाड़ा के बफर जोन इलाके में रहने वाले बैगा आदिवासी समुदायों के बीच।
कांग्रेस विधायक मधु भगत का बयान वायरल
प्रभावित परिवारों से मिलने के दौरान विधायक मधु भगत ने बढ़ते बाघ के आतंक और वन विभाग की कथित लापरवाही के बारे में शिकायतें सुनीं। उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में बाघ के हमलों में चार लोगों की मौत हो चुकी है फिर भी कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। इसके बाद उन्होंने अपनी विवादास्पद चेतावनी दी। तीर-धनुष बैगा आदिवासियों के खास हथियार हैं, जिस दिन ये हथियार उनके हाथों में वापस आ जाएंगे। वे एक-एक करके जंगली जानवरों का शिकार करेंगे और वन विभाग उन्हें रोकने में बेबस होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे खुद इस मुहिम का नेतृत्व करेंगे। इस बयान ने एक स्थानीय दुखद घटना को भारत के टाइगर बेल्ट में अधिकारों, सुरक्षा और जवाबदेही पर एक बड़ी बहस में बदल दिया है।
मधु भगत ने वन विभाग को दी चेतावनी
भगत ने इसकी तुलना उस तरीके से भी की, जिससे विभाग ग्रामीणों के साथ पेश आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर स्थानीय लोग कोई छोटी-मोटी गलती करते हैं तो वन विभाग उनके घरों की तलाशी लेता है और उन्हें जेल भेज देता है, लेकिन जंगली जानवरों के हमले में इंसानों की जान जाने के मामले में उन्होंने कहा कि विभाग एक जान की कीमत सिर्फ 8–9 लाख आंकता है और फिर भी असरदार कदम उठाने में नाकाम रहता है। सोशल मीडिया पर उनकी बातों को काफी शेयर किया गया है। नाराज ग्रामीणों ने उनका समर्थन किया है, जबकि पर्यावरण संरक्षणवादियों और राजनीतिक विरोधियों ने उनकी आलोचना की है।
(इनपुट – शौकत बिसाने)
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