नई दिल्ली. जब भी स्पिरिचुअलिटी और सिनेमा बड़े पर्दे पर मिलते हैं, तो सबसे बड़ी चुनौती आस्था और मनोरंजन के बीच सही बैलेंस बनाना होता है. राइटर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर विशाल चतुर्वेदी की फिल्म ‘हनुमान अंश’ इस क्राइटेरिया पर पूरी तरह खरी उतरती है. 7 अगस्त 2026 को थिएटर में रिलीज हुई यह फिल्म नीम करोली बाबा के जीवन और उनके महान स्पिरिचुअल रास्ते से प्रेरित है. शान-शौकत और फालतू के स्पेशल इफेक्ट्स दिखाने के बजाय यह फिल्म सच्ची भक्ति, डेडिकेशन और इंसानियत की सेवा का मैसेज बहुत ही सादगी और गहराई से देती है.

कहानी
‘हनुमान अंश’ ट्रेडिशनल तरीके से कोई बायोपिक नहीं है, जो सिर्फ तारीखों और घटनाओं को समय के हिसाब से बताती है. फिल्म एक आदमी के पर्सनल दुख, संघर्ष और जिंदगी की तलाश से शुरू होती है. जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, यह पर्सनल दुख से राम के नाम के जाप, हनुमान की भक्ति, बिना स्वार्थ के सेवा और दया की ओर मुड़ जाती है. कहानी में नीम करोली बाबा से जुड़ी मशहूर घटनाओं को खूबसूरती से पिरोया गया है. जैसे कि ऐतिहासिक नीम करोली रेलवे स्टेशन की घटना. जो दर्शक पहले से बाबा नीम करोली की जिंदगी से वाकिफ हैं, उन्हें ये सीन बहुत अच्छे लगेंगे. नए दर्शकों के लिए, यह कहानी एक आम इंसान के अंदर आध्यात्मिक बदलाव और भक्ति का असली मतलब दिखाती है.

एक्टिंग
फिल्म के लीड एक्टर शोभिनव सत्या ने एक बहुत बड़ी और सेंसिटिव जिम्मेदारी निभाई. एक ऐसे लेजेंड से प्रेरित किरदार निभाना, जिसके लिए लाखों लोग बहुत श्रद्धा रखते हैं, कोई आसान काम नहीं है. शोभिनव ने इस रोल में किसी भी तरह की लाउड एक्टिंग या ओवर-ड्रामाटाइजेशन से परहेज किया है. उनके चेहरे पर शांत एक्सप्रेशन, उनकी आंखों में कोमलता और उनका नेचुरल शांत स्वभाव बिना किसी लंबे डायलॉग के भी गहरा असर डालते हैं. उनके आस-पास के को-स्टार्स ने भी अपने रिएक्शन से सीन में जान डाल दी. पूरी स्टार कास्ट की परफॉर्मेंस इतनी आसान है कि दर्शकों को सिनेमा में बैठकर एक असली आध्यात्मिक माहौल का अनुभव होता है.

डायरेक्शन
एक डायरेक्टर के तौर पर विशाल चतुर्वेदी ने कमाल का संयम दिखाया है. उन्होंने कमर्शियल फायदे के लिए फिल्म को ‘चमत्कारी बॉलीवुड ड्रामा’ नहीं बनाया है. विशाल का साफ मकसद हर आध्यात्मिक पल को एक बड़े VFX चमत्कार के तौर पर दिखाना नहीं था, बल्कि भक्ति के इंसानी पहलू को दिखाना था. भूखों को खाना खिलाना, दूसरों का दुख बांटना, बिना किसी स्वार्थ के समाज की सेवा करना और भगवान को याद करना. डायरेक्टर ने इन छोटी-छोटी इंसानी भावनाओं के जरिए भक्ति की सच्ची परिभाषा गढ़ी है. यही वजह है कि उनके डायरेक्शन का स्टाइल फिल्म को हर दर्शक वर्ग से जोड़ता है न कि सिर्फ एक खास दर्शक वर्ग से.

सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड म्यूजिक
टेक्निकली, फिल्म का कैनवस बहुत शांत और सुकून देने वाला है. सिनेमैटोग्राफी में नेचुरल लाइट और आसान लोकेशन का बहुत अच्छा इस्तेमाल किया गया है. कैमरा फ्रेम किरदारों के अंदर के इमोशंस को बहुत करीब से कैप्चर करता है, जिससे दर्शक कहानी से इमोशनली जुड़ पाते हैं. फिल्म का म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर इसकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक हैं. भक्ति गीतों की लय और भजनों का फ्लो फिल्म को एक पवित्र अनुभव देता है, जो सिनेमा से ज्यादा ‘सत्संग’ जैसा लगता है. म्यूजिक कहानी की रफ्तार में रुकावट नहीं डालता, बल्कि सीन के इमोशनल असर को दोगुना कर देता है.

कमियां
हालांकि फिल्म अपने मकसद में कामयाब होती है, लेकिन कुछ जगहों पर इसकी रफ्तार काफी धीमी लगती है. तेज रफ्तार वाले सिनेमा, एक्शन या लगातार हाई-वोल्टेज ड्रामा के आदी दर्शकों को ये रुकावटें थोड़ी थकाने वाली लग सकती हैं. इसके अलावा, फिल्म का मेन फोकस मेन कैरेक्टर के अंदर के बदलाव और सेवा की भावना पर होने के कारण, कुछ सपोर्टिंग कैरेक्टर की बैकस्टोरी और डेवलपमेंट को ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं मिला है. अगर स्क्रीनप्ले का दूसरा हिस्सा थोड़ा और टाइट होता, तो फिल्म का असर और भी ज्यादा होता.

अंतिम फैसला
‘हनुमान अंश’ ऐसी फिल्म नहीं है जो सुपरनैचुरल चमत्कार करने का दावा करती है, बल्कि यह इस बात को मजबूती से बताती है कि सच्ची भक्ति वह है जो इंसान को अहंकार से आजाद करे और उसे सेवा और दया की ओर ले जाए. अगर आप बिजी जिंदगी के बीच मेंटल शांति और एक सच्चे स्पिरिचुअल अनुभव की तलाश में हैं, तो आपको अभी थिएटर में चल रही यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए. मेरी ओर से फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार.



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