Last Updated:

छतरपुर की पोई भाजी विटामिन और प्रोटीन से भरपूर एक स्वादिष्ट और सेहतमंद सब्जी है, जिसे डंठलों से बनाया जाता है. यह बारिश के मौसम में आसानी से उगाई जा सकती है. जिले की एक पारंपरिक पहचान है.

आज हम आपको एक ऐसी भाजी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे बारिश के मौसम में घर पर भी आसानी से उगाया जा सकता है. हालांकि, ये भाजी ज्यादातर पान के बरेजा में ही देखने को मिलती है. मप्र के छतरपुर जिले में तो सालों से लोग खाते आ रहे हैं. ये भाजी स्वाद में लाजवाब और सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है. साथ ही इसमें विटामिन और प्रोटीन भी पाया जाता है.छतरपुर की पोई भाजी स्वादिष्ट और सेहतमंद सब्जी मानी जाती है. पान किसान रमाशंकर बताते हैं कि इसमें प्रोटीन और विटामिन होते हैं. गर्मी से लेकर बरसात में उगाई जाने वाली इस भाजी के कोमल डंठल उपयोग होते हैं.

छतरपुर जिले की पारंपरिक सब्जियों में पोई भाजी एक खास पहचान रखती है. स्थानीय भाषा में प्रसिद्ध यह भाजी स्वाद में लाजवाब और सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है. इसका पौधा बेल की तरह होता है, जो रस्सियों के सहारे ऊपर चढ़ाया जाता है.दिलचस्प बात यह है कि इसकी पत्तियों का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि इसके कोमल डंठलों को छीलकर स्वादिष्ट सब्जी बनाई जाती है.

बारिश मौसम में लगाना आसान
रमाशंकर बताते हैं कि पोई भाजी को सालभर उगाया जा सकता है. बारिश के मौसम में तो आसानी से तैयार हो जाती है. गर्मियों के मौसम में हर कोई नहीं लगा पाता है. लेकिन पान बरेजा में ये भाजी गर्मियों में भी तैयार हो जाती है. इसकी बेल लगभग 12 फुट तक लंबी हो सकती है और यह अकसर पान के बरेजा (पान की खेती वाले क्षेत्र) में पाई जाती है. इसकी बेलें तेज़ी से बढ़ती हैं. नियमित कटाई के लिए तैयार रहती हैं. बारिश के मौसम में तो इसे घर पर भी आसानी से तैयार कर सकते हैं. घर के गार्डन या छत में भी गमले में आसानी से उगा सकते हैं.

केवल डंठल ही बनता है व्यंजन का हिस्सा
किसान भाई बताते हैं कि इस पौधे की सबसे खास बात यह है कि इसकी सब्जी बनाने के लिए न पत्तों का उपयोग किया जाता है और न ही फल का. केवल नए और कोमल डंठलों को छीलकर भाजी तैयार की जाती है. इसे मूंग या उड़द की दाल के साथ मिलाकर बनाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. कई लोग इसे केवल मसालों के साथ सादी भाजी के रूप में भी बनाकर खाते हैं.किसान भाई बताते हैं कि पोई भाजी उनका बचपन का हिस्सा रही है. वह इस भाजी को बचपन से खाते आए हैं और यह आज भी हमारे भोजन का जरूरी हिस्सा है. रमाशंकर कहते हैं कि इस भाजी में प्रोटीन और विटामिन भरपूर मात्रा में होते हैं. हालांकि वे कोई पोषण विशेषज्ञ नहीं हैं, लेकिन सालों का अनुभव उन्हें इसकी खूबियों को समझने में सक्षम बनाता है.



Source link

Write A Comment