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खंडवा जिले की एक ऐसी मिठाई है, जिसकी पहचान सिर्फ उसके स्वाद से नहीं, बल्कि देशभक्ति के रंगों से भी जुड़ी हुई है. केसरिया, सफेद और हरे रंग की तीन परतों वाली यह मिठाई तिरंगा बर्फी के नाम से मशहूर है. करीब 101 साल पहले खंडवा में शुरू हुई इस मिठाई की परंपरा आज भी उसी स्वाद और पहचान के साथ आगे बढ़ रही है. खास बात यह है कि इस मिठाई का स्वाद महात्मा गांधी समेत कई बड़े लोगों ने भी चखा था.

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की एक ऐसी मिठाई है, जिसकी पहचान सिर्फ उसके स्वाद से नहीं, बल्कि देशभक्ति के रंगों से भी जुड़ी हुई है. केसरिया, सफेद और हरे रंग की तीन परतों वाली यह मिठाई तिरंगा बर्फी के नाम से मशहूर है. करीब 101 साल पहले खंडवा में शुरू हुई इस मिठाई की परंपरा आज भी उसी स्वाद और पहचान के साथ आगे बढ़ रही है. खास बात यह है कि इस मिठाई का स्वाद महात्मा गांधी समेत कई बड़े लोगों ने भी चखा था.

आजादी के दौर में शुरू हुआ तिरंगा बर्फी का सफर
साल 1920 में खंडवा के अग्रवाल परिवार के मुखिया रामसहाय जी अग्रवाल ने इस खास मिठाई को बनाने की परंपरा शुरू की थी. मूल रूप से राजस्थान से आए इस परिवार ने खंडवा को अपना घर बनाया और यहां मिठाई का कारोबार शुरू किया. इसी दौरान तिरंगे के रंगों से प्रेरित होकर तीन रंगों वाली बर्फी तैयार की गई.उस समय देश में आजादी की लड़ाई तेज हो रही थी. ऐसे दौर में केसरिया, सफेद और हरे रंग वाली यह मिठाई लोगों के बीच सिर्फ स्वाद की वजह से नहीं, बल्कि देशभक्ति की भावना से भी जुड़ गई.

महात्मा गांधी ने भी चखी थी मिठाई
बताया जाता है कि साल 1942 में जब महात्मा गांधी खंडवा आए थे. उन्होंने भी इस मिठाई का स्वाद चखा था। उस दौर में खंडवा आजादी की गतिविधियों से जुड़ा हुआ था. तिरंगा बर्फी लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बन चुकी थी.यही वजह है कि इस मिठाई से जुड़ी कहानी आज भी खंडवा के लोगों के बीच बड़े गर्व के साथ सुनाई जाती है.

चार पीढ़ियों से आगे बढ़ रहा कारोबार
रामसहाय जी अग्रवाल के बाद उनके पुत्र रामगोपाल जी ने कारोबार को आगे बढ़ाया। इसके बाद साल 1986 में परिवार की तीसरी पीढ़ी के सदस्य दीपू अग्रवाल ने इस कारोबार को नई पहचान दी। अब परिवार की चौथी पीढ़ी पुलकित और निहुल अग्रवाल इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं.परिवार का कहना है कि इतने लंबे सफर के बावजूद मिठाई के स्वाद, गुणवत्ता और शुद्धता से समझौता नहीं किया गया. यही वजह है कि कई पीढ़ियों से ग्राहक इस दुकान से जुड़े हुए हैं.

तीन रंगों में तैयार होती है खास बर्फी
तिरंगा बर्फी की सबसे बड़ी खासियत इसका रंग और स्वाद है। केसरिया हिस्से में केसर और गाजर का इस्तेमाल किया जाता है, सफेद हिस्से में मावा और चीनी का स्वाद मिलता है, जबकि हरे हिस्से में पिस्ता और पान का हल्का स्वाद दिया जाता है. तीनों परतें मिलकर इसे देखने में बिल्कुल तिरंगे जैसा रूप देती हैं. यही वजह है कि राष्ट्रीय पर्वों के दौरान इसकी मांग अचानक बढ़ जाती है.

15 अगस्त और 26 जनवरी पर बढ़ जाती है मांग
आज तिरंगा बर्फी सिर्फ खंडवा तक सीमित नहीं है. निमाड़ के साथ आसपास के जिलों और प्रदेश के कई हिस्सों तक इसकी मिठास पहुंच रही है. शादी-ब्याह और त्योहारों के अलावा 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर इसकी मांग खास तौर पर बढ़ जाती है.खंडवा में कई लोगों के लिए स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर तिरंगा बर्फी खरीदना अब एक तरह की परंपरा बन चुका है.



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