Highlights
- रक्षा उत्पादन 2014 के 46 हजार करोड़ से बढ़कर 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपये हुआ।
- रक्षा निर्यात 686 करोड़ से बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये पहुंचा, 80 से ज्यादा देशों तक पहुंची।
- सरकार ने 8.75 लाख करोड़ से ज्यादा की रक्षा परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आत्मनिर्भर और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रक्षा क्षेत्र के जरिए सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आकाशवाणी के जरिए देश के सैनिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने पिछले 12 वर्षों में भारत के रक्षा क्षेत्र में हुए बदलावों और आत्मनिर्भरता की दिशा में हुई प्रगति का जिक्र किया। राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार रक्षा क्षेत्र के माध्यम से रक्षा बलों के आधुनिकीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों से भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों को खुद पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र और रक्षा उत्पादों का शुद्ध निर्यातक देश बन रहा है।
रक्षा उत्पादन में हुई भारी बढ़ोतरी
रक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 46,000 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी करीब एक दशक में रक्षा उत्पादन लगभग चार गुना बढ़ा है। उन्होंने इसे रक्षा क्षेत्र में हुए बड़े संरचनात्मक बदलावों का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि कुल रक्षा उत्पादन में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSU) और अन्य सरकारी क्षेत्र की कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 76 फीसदी रही, जबकि निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 24 फीसदी हो गई है। पिछले वित्त वर्ष में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 22 फीसदी थी। राजनाथ सिंह के मुताबिक, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी रक्षा क्षेत्र में लगातार बेहतर हो रहे कारोबारी माहौल का संकेत है।
रक्षा निर्यात में भी भारत की ऊंची उड़ान
राजनाथ सिंह ने कहा कि वित्त वर्ष 2013-14 में भारत का रक्षा निर्यात महज 686 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह 5,500 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी है। उन्होंने इसे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का सबसे मजबूत प्रमाण बताया। रक्षा मंत्री के मुताबिक, आज भारत में 145 रक्षा निर्यातक हैं और भारतीय रक्षा उत्पाद 80 से ज्यादा देशों को निर्यात किए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य हासिल कर लेगा।
7.85 लाख करोड़ रुपये हुआ रक्षा बजट
रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में देश का रक्षा बजट 2.53 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि यह भविष्य की रक्षा तकनीकों के प्रति भारत की बढ़ती प्रतिबद्धता को दिखाता है। इसी अवधि में रक्षा क्षेत्र का पूंजीगत खर्च 94,588 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.19 लाख करोड़ रुपये हो गया है। अनुसंधान एवं विकास यानी R&D पर भी सरकार का फोकस बढ़ा है। वित्त वर्ष 2014-15 में R&D बजट 15,283 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026-27 में 90 फीसदी बढ़कर 29,100 करोड़ रुपये हो गया है।
8.75 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रक्षा परियोजनाओं को मंजूरी
राजनाथ सिंह ने बताया कि पिछले एक साल में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 8.75 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रक्षा परियोजनाओं के लिए आवश्यकता की स्वीकृति दी है। उन्होंने कहा कि इससे रक्षा आधुनिकीकरण को लेकर सरकार की प्राथमिकता साफ होती है। उन्होंने रक्षा खरीद प्रक्रिया में किए गए सुधारों का भी जिक्र किया। फील्ड कमांडरों की वित्तीय शक्तियों की सीमा को दो गुना किया गया है, ताकि उनकी संचालन क्षमता और तेजी से फैसले लेने की क्षमता बढ़े। इसके अलावा राजस्व मार्ग के जरिए 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खरीद को संभव बनाया गया है, जिससे रक्षा उपकरणों के स्वदेशीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
स्वदेशी युद्धपोत और सैन्य प्रणालियां बढ़ा रही हैं ताकत
रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के अभियान में सशस्त्र बलों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वदेशी युद्धपोत, विमान और आधुनिक सैन्य प्रणालियां भारतीय रक्षा बलों की क्षमता को मजबूत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल के बीच DRDO और सशस्त्र बल भविष्य के युद्ध के लिए जरूरी तकनीकों के विकास में भारत को अग्रणी देशों की कतार में पहुंचाने का काम कर रहे हैं। राजनाथ सिंह ने पहले टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन सिस्टम के सफल परीक्षण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली में पारंपरिक हथियारों को सटीक निशाना लगाने वाले प्रिसीजन-गाइडेड हथियारों में बदलने की क्षमता है।
MIRV तकनीक वाले अग्नि मिसाइल परीक्षण का भी जिक्र
रक्षा मंत्री ने MIRV तकनीक से लैस एडवांस्ड अग्नि मिसाइल के सफल परीक्षण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस परीक्षण ने भारत की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता को एक नया आयाम दिया है। इसके अलावा लॉन्ग-रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल, RudraM-II एयर-टू-सरफेस मिसाइल, नेवल एंटी-शिप मिसाइल-एसआर और पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेटके सफल परीक्षणों का भी उन्होंने उल्लेख किया। उनके मुताबिक, इन परीक्षणों ने देश की मारक क्षमता को अभूतपूर्व मजबूती दी है। राजनाथ सिंह ने कहा कि सैनिकों का साहस, प्रतिबद्धता और अनुशासन हर भारतीय के लिए प्रेरणा है। देश उनके अद्वितीय सेवा, बलिदान और समर्पण के लिए हमेशा ऋणी रहेगा।
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