Highlights
- बिहार में पकड़े गए आरोपियों ने 2027 NEET में डमी कैंडिडेट बैठाने की तैयारी की थी।
- पुलिस के मुताबिक NEET पास कराने के लिए 12 से 30 लाख रुपये तक रेट तय था।
- छापेमारी में ब्लैंक चेक, नकदी, दस्तावेज और बंद परीक्षा केंद्र से जुड़ा एग्रीमेंट मिला।
पटना: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की कोशिशों के बीच बिहार से परीक्षा माफिया के एक बड़े नेटवर्क का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी सिर्फ मौजूदा परीक्षाओं में ही गड़बड़ी नहीं कर रहे थे, बल्कि 2027 में होने वाले NEET के कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट में भी धांधली की तैयारी करीब एक साल पहले से शुरू कर चुके थे। मामले में पुलिस ने MBBS छात्र डॉक्टर रविशंकर, उसके भाई अश्विनी कुमार और साथी डॉक्टर उज्जवल राज को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, इनका नाम NEET और RE-NEET में कथित गड़बड़ी के अलावा रेलवे ग्रुप-D, असिस्टेंट एजुकेशन डिवेलपमेंट ऑफिसर (AEDO), BPSSC और CBSE की परीक्षाओं में भी सामने आया है।
होमगार्ड इंस्ट्रक्टर परीक्षा से खुली नई कड़ी
बिहार पुलिस पहले AEDO और होमगार्ड इंस्ट्रक्टर भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी की जांच कर रही थी। इसी दौरान उसकी नजर रविशंकर पर गई। वह पहले भी परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े का आरोपी रहा है। रविशंकर MBBS के चौथे वर्ष का छात्र है। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने सुप्रीम कोर्ट में यह दलील दी थी कि उसकी मेडिकल परीक्षा चल रही है। कोर्ट से उसे गिरफ्तारी में राहत मिली, लेकिन पुलिस का आरोप है कि उसने इस राहत का फायदा उठाकर दोबारा परीक्षा में धांधली शुरू कर दी। 29 जुलाई को हुए होमगार्ड इंस्ट्रक्टर भर्ती परीक्षा में कथित तौर पर डमी कैंडिडेट बैठाने की कोशिश की गई। पुलिस को इसके सबूत मिले और इसके बाद रविशंकर के ठिकाने पर छापेमारी की गई। यहीं से अगले साल की NEET परीक्षा की तैयारी का खुलासा हुआ।
2027 NEET के लिए परीक्षा केंद्र पर नजर
NTA ने अगले साल से NEET को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी ऑनलाइन परीक्षा कराने का ऐलान किया है। पुलिस के मुताबिक, रविशंकर और उज्जवल राज ने इसी व्यवस्था में सेंध लगाने की योजना बनाई थी। जांच में सामने आया कि पटना का सनराइज इनोवेशन ऑनलाइन एग्जाम सेंटर करीब एक साल से बंद था। आरोप है कि रविशंकर ने सेंटर के मालिक से संपर्क किया और उसे दूसरी जगह शिफ्ट करके नए नाम से शुरू करने की योजना बनाई। उसने सेंटर में पैसा लगाया और मालिक के साथ एग्रीमेंट भी किया, लेकिन अपना नाम दस्तावेजों में नहीं रखा। पुलिस का दावा है कि उसकी योजना इस सेंटर को NTA के परीक्षा केंद्र के तौर पर मंजूर करवाने की थी। इसके बाद बायोमेट्रिक व्यवस्था में हेरफेर कर असली उम्मीदवार की जगह सॉल्वर या डमी कैंडिडेट बैठाने की तैयारी थी। ऐसे डमी कैंडिडेट के तौर पर कथित तौर पर सीनियर MBBS छात्रों का इस्तेमाल किया जाना था।
NEET के लिए 12 से 30 लाख रुपये तक का रेट
पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह ने NEET में सफलता दिलाने के लिए 12 लाख से 30 लाख रुपये तक की रकम तय की थी। केवल परीक्षा पास कराने की रकम कम और टॉप मेडिकल कॉलेज में एडमिशन की गारंटी के लिए ज्यादा रकम ली जाती थी। छापेमारी में पुलिस को मार्कशीट, ट्रांसफर सर्टिफिकेट, चार सरकारी बैंकों के 21 ब्लैंक चेक, निजी बैंकों की चेकबुक, करीब दो लाख रुपये नकद, रजिस्टर्ड डीड और सनराइज इनोवेशन एग्जाम सेंटर से हुआ एग्रीमेंट मिला। उज्जवल राज की SUV से भी करीब तीन लाख रुपये बरामद किए गए।
बायोमेट्रिक और फोटो में हेरफेर का आरोप
पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं था। आरोपी कथित तौर पर फर्जी आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र और दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने का काम भी करते थे। इसके लिए कॉमन सर्विस सेंटर और बायोमेट्रिक वेंडरों के साथ मिलीभगत का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, असली और डमी उम्मीदवार को एक साथ आधार सेंटर ले जाया जाता था। वहां डमी उम्मीदवार का बायोमेट्रिक अपडेट कराने और दोनों की तस्वीरों में हेरफेर कर परीक्षा की पहचान प्रक्रिया को चकमा देने की कोशिश की जाती थी।
MBBS छात्र और मेडिकल कॉलेज भी सवालों के घेरे में
रविशंकर और उज्जवल राज दोनों नालंदा के महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में MBBS की पढ़ाई कर रहे हैं। मामले के सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन भी सवालों के घेरे में आया। कॉलेज की प्रिंसिपल ने कहा कि वह खुद इस मामले से हैरान हैं। उनका कहना था कि कॉलेज में सैकड़ों छात्र पढ़ते हैं और हर छात्र पर 24 घंटे नजर रखना संभव नहीं है। उज्जवल राज पर मोतिहारी के एक मेडिकल कॉलेज में इंटरनल परीक्षा में फेल छात्र को गलत तरीके से पास कराने की कोशिश का भी आरोप है।
परिवार के दूसरे सदस्यों पर भी आरोप
पुलिस के मुताबिक, रविशंकर ने कथित फर्जीवाड़े के नेटवर्क में अपने परिवार के सदस्यों को भी शामिल किया था। उसका भाई अश्विनी कुमार गिरफ्तार हो चुका है। उसकी पत्नी मधु प्रिया पर भी अपनी जगह दूसरे उम्मीदवार को परीक्षा में बैठाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, मधु प्रिया OBC वर्ग से आती हैं, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर फर्जी SC प्रमाणपत्र बनवाकर AEDO परीक्षा दी। गर्भवती होने के कारण फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर अदालत की रोक है। पुलिस के मुताबिक, रविशंकर ने 2012 में 12वीं पास की थी और करीब दस साल बाद 2022 में NEET के जरिए मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। इसके बाद वह कथित तौर पर परीक्षा में फर्जीवाड़े के नेटवर्क में शामिल हुआ। रेलवे ग्रुप-D परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाने के आरोप में उसकी गिरफ्तारी भी हुई थी और बाद में वह जमानत पर बाहर आया।
MBBS परीक्षा की खाली कॉपियां भी मिलीं
रविशंकर की गिरफ्तारी उस समय हुई, जब वह आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी सेंटर में MBBS की सप्लीमेंट्री परीक्षा देने पहुंचा था। पुलिस की छापेमारी में उसके फ्लैट से MBBS परीक्षा की आठ खाली कॉपियां मिलने का भी दावा किया गया है। अब विश्वविद्यालय यह जांच कर रहा है कि परीक्षा की कॉपियां उसके फ्लैट तक कैसे पहुंचीं।
परीक्षा माफिया के नेटवर्क पर बड़ा सवाल
इस पूरे मामले ने एक बार फिर परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। मामला सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं दिखता। पुलिस के आरोपों के मुताबिक इसमें फर्जी उम्मीदवार, सॉल्वर, बायोमेट्रिक से छेड़छाड़, फर्जी प्रमाणपत्र, परीक्षा केंद्र और एडमिशन तक का पूरा नेटवर्क शामिल हो सकता है। ऐसे मामलों में किसी एक व्यक्ति या अधिकारी को जिम्मेदार मानना पर्याप्त नहीं होगा। परीक्षा माफिया में कई स्तरों पर लोग जुड़े हो सकते हैं और इसका मकसद लाखों-करोड़ों रुपये कमाना होता है। सबसे बड़ी चुनौती यह भी है कि कई आरोपी गिरफ्तारी के बाद जमानत पर बाहर आ जाते हैं और मामले वर्षों तक चलते रहते हैं। इसीलिए परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट, मजबूत जांच व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली की व्यापक समीक्षा की जरूरत बताई जा रही है।
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