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Most Juicy Hilsa: बाजार में इन दिनों गुजरात और मुंबई की हिल्सा भी आसानी से मिल रही है. ये समुद्री पानी की मछली होती है, इसलिए इसे गंगा की हिल्सा से स्वाद और खुशबू के मामले में अलग माना जाता है. हिल्सा का असली स्वाद नदी की मछली में ज्यादा महसूस होता है. खासकर गंगा की ताजा इलिश अपनी खास खुशबू, नरम मांस और स्वाद के लिए बेहद पसंद की जाती है. लेकिन बाजार में समुद्री और नदी की हिल्सा साथ-साथ मिलने पर आम खरीदार के लिए दोनों में फर्क करना आसान नहीं होता. ऐसे में अगर आप गंगा की ताजा इलिश खरीदना चाहते हैं, तो कुछ खास बातों पर ध्यान देकर इसकी पहचान की जा सकती है.
मानसून आते ही इलिश की मांग बढ़ जाती है. बंगाल की रसोई में इसे सिर्फ मछली नहीं, बल्कि खानपान और संस्कृति का अहम हिस्सा माना जाता है. अलग-अलग इलाकों में इलिश के कई स्थानीय नाम हैं, जैसे चिटा, जाटका, खयरा और बिलिश. खास बात यह है कि यह मछली समुद्र से नदियों में प्रजनन के लिए आती है, इसलिए बारिश के मौसम में इसकी उपलब्धता बढ़ जाती है. यही वजह है कि इलिश और मानसून का रिश्ता पूर्वी भारत की खाद्य संस्कृति से गहराई से जुड़ा है.
इलिश को अलग-अलग राज्यों में अलग नामों से जाना जाता है. ओडिशा में इसे इलिशी, असम में हिल्सा और बिहार में इल्सा कहा जाता है, जबकि महाराष्ट्र में इसका नाम पाल्लो है. गुजरात में मादा और नर इलिश के लिए भी अलग-अलग नाम हैं. मादा को मदेन और नर को पालवा कहा जाता है. हालांकि गुजरात और ‘बॉम्बे’ इलिश को स्वाद के मामले में अक्सर गंगा की इलिश से अलग माना जाता है, लेकिन बाजार में इनकी उपलब्धता के कारण असली गंगा की इलिश पहचानना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में मछली खरीदते समय उसके आकार, चमक, शरीर की बनावट और ताजगी पर ध्यान देना जरूरी है.
गुजरात और मुंबई की हिल्सा समुद्र के खारे पानी में पाई जाती है, जबकि गंगा की हिल्सा नदी के मीठे पानी में पहुंचती है. प्रजनन के लिए समुद्र से नदी की ओर जाने के दौरान यह मछली लंबी दूरी तय करती है. इस यात्रा के दौरान इसके शरीर में वसा यानी फैट जमा होता है, जिसकी वजह से इसका मांस नरम और स्वादिष्ट माना जाता है. गंगा के पानी में मौजूद पोषक तत्व और फाइटोप्लैंकटन भी मछली के स्वाद और गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं. यही वजह है कि नदी की हिल्सा को समुद्री हिल्सा की तुलना में ज्यादा स्वादिष्ट और खुशबूदार माना जाता है.
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समुद्री हिल्सा का स्वाद नदी की हिल्सा से अलग माना जाता है. समुद्र में यह प्लैंकटन और छोटे जलीय जीव खाती है और शरीर में तेल जमा होता है. नदी की ओर बढ़ते समय इसकी खाने की आदत बदलती है और जमा वसा का इस्तेमाल होने लगता है. मीठे पानी में पहुंचने के बाद शरीर में नमक और पुराने अपशिष्ट की मात्रा भी कम होती है, जिससे स्वाद और गंध में बदलाव आता है. समुद्री हिल्सा के तेल में कई बार तेज गंध महसूस हो सकती है, जबकि गंगा की हिल्सा अपनी नरम बनावट और खास खुशबू के लिए पसंद की जाती है.
गंगा की हिल्सा आमतौर पर समुद्री हिल्सा की तुलना में ज्यादा चपटी, गोल और मोटे शरीर वाली होती है. खासकर इसका पेट और गर्दन का हिस्सा भरा हुआ दिखाई देता है. इसके उलट गुजरात-मुंबई की समुद्री हिल्सा अपेक्षाकृत लंबी और पतली होती है. नदी की ओर बढ़ते समय हिल्सा प्लैंकटन यानी छोटे जलीय पौधों और जीवों को खाती है, जिससे उसका शरीर अधिक भरा हुआ हो जाता है. इसलिए बाजार में हिल्सा खरीदते समय बहुत पतली और लंबी मछली के बजाय गोल, चपटी और मोटे पेट वाली मछली पर ध्यान दिया जा सकता है.
गंगा की हिल्सा समुद्री हिल्सा की तुलना में ज्यादा चमकदार दिखाई दे सकती है. इसकी पहचान में शरीर के बीचोंबीच दिखने वाली हल्की लाल रंग की धारियां भी एक संकेत मानी जाती हैं. बाजार में मछली खरीदते समय इसकी चमक और शरीर पर नजर आने वाली इस हल्की लाल रेखा को भी देखा जा सकता है.
गंगा की ताजा हिल्सा की आंखें आमतौर पर साफ और चमकदार दिखाई देती हैं, जबकि बासी या लंबे समय तक ठंडी जगह पर रखी गई मछली की आंखें धुंधली और धंसी हुई लग सकती हैं. इसके शल्क चांदी जैसे चमकीले होते हैं और रोशनी पड़ने पर साफ चमकते हैं. मछली खरीदते समय आंखों के साथ उसके शल्कों की ताजगी भी जरूर देखें. हालांकि केवल आंखों या चमक के आधार पर गंगा की हिल्सा की पक्की पहचान करना मुश्किल है, इसलिए इन संकेतों को मछली की बनावट और आकार के साथ देखकर ही फैसला करना बेहतर है.
ताजा हिल्सा के गलफड़े यानी कान के पास वाला लाल हिस्सा आमतौर पर चमकीले दिखाई देते हैं. वहीं पुरानी या लंबे समय तक जमी हुई मछली के गलफड़े भूरे या काले पड़ सकते हैं. बाजार में कुछ विक्रेता मछली के गलफड़ों को लाल दिखाने के लिए रंग का इस्तेमाल कर सकते हैं, इसलिए खरीदते समय गलफड़ों को ध्यान से देखना और बिना जरूरत छेड़छाड़ किए ताजगी के दूसरे संकेतों से भी मिलान करना बेहतर है. केवल लाल रंग देखकर मछली को ताजा न मानें.
मछली काटते समय खून का रंग देखें- हिल्सा काटते समय निकलने वाले खून का रंग भी उसकी ताजगी का एक संकेत माना जाता है. अगर खून गहरा या काला दिखाई दे, तो यह मछली के लंबे समय तक रखे जाने की ओर इशारा कर सकता है. वहीं ताजा मछली में खून लाल या लालिमा लिए दिखाई दे सकता है.