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आपके अचार में भी लग रही फफूंदी? बरसात में रखें ध्यान, 99% लोग करते हैं ये गलती

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How to pickle safe rainy season : बरसात शुरू होते ही अचार में फफूंदी लगने की दिक्कत आम है. अचार अचानक ऊपर से सफेद या हरे रंग का दिखाई देने लगता है. कई लोग ऊपर की परत हटाकर बाकी अचार खा लेते हैं. लोकल 18 ने इस बारे में रामपुर की अचार एक्सपर्ट मोना चावला से बात की. वे बताती हैं कि बारिश के दौरान हवा में नमी बढ़ जाती है. यही नमी अचार के लिए मुसीबत है. अचार निकालने के लिए चम्मच इस्तेमाल करते समय छोटी सी गलती भी पूरा अचार खराब कर सकती है. अचार को खुले बर्तन या ऐसे डिब्बे में लंबे समय तक न रखें जिसमें हवा आसानी से अंदर जाती रहे. बरसात में खुले हुए या कम नमक वाले अचार को रखने के तरीके पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है.

बरसात शुरू होते ही घर में रखे अचार को लेकर एक परेशानी लगभग हर किसी को घेर लेती है. कई दिनों से रखा अचार अचानक ऊपर से सफेद या हरे रंग का दिखाई देने लगता है. बरसात के मौसम में अचार में फफूंदी पड़ने की ये समस्या ज्यादा देखने को मिलती है. कई लोग ऊपर की परत हटाकर बाकी अचार खा लेते हैं, लेकिन क्या ऐसा करना सही है.

लोकल 18 से रामपुर की अचार एक्सपर्ट मोना चावला बताती हैं कि बारिश के मौसम में हवा में नमी बढ़ जाती है और यही नमी अचार के लिए मुसीबत है. बार-बार डिब्बा खोलने पर नम हवा अंदर जाती है. अगर अचार निकालते समय गीला चम्मच इस्तेमाल हो जाए तो पानी की बूंदें भी अंदर पहुंच सकती हैं. यही वजह है कि अचार की सतह पर सफेद या हरे रंग की फफूंदी दिखाई देने लगती है, इसलिए बरसात में अचार रखते समय नमी से बचाना सबसे जरूरी है.

अचार निकालने के लिए चम्मच इस्तेमाल करते समय छोटी सी गलती भी पूरा अचार खराब कर सकती है, इसलिए चम्मच साफ होने के साथ-साथ पूरी तरह सूखा भी होना चाहिए. कई बार लोग चम्मच धोकर तुरंत अचार में डाल देते हैं, लेकिन उसमें लगी पानी की बूंदें अचार तक पहुंच सकती हैं, इसलिए चम्मच को पहले अच्छी तरह सुखाएं और फिर अचार निकालें. कोशिश करें कि अचार निकालने के बाद चम्मच को वापस जार में न छोड़ें.

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मोना चावला बताती हैं कि अगर आपका अचार तेल वाला है तो इस बात पर जरूर नजर रखें कि अचार के टुकड़े तेल में डूबे रहें. जो टुकड़े लगातार तेल से बाहर रहते हैं उनका हवा के संपर्क में आना ज्यादा होता है. ऐसे हिस्से जल्दी खराब हो सकते हैं. अचार निकालने के बाद जार को एक बार देख लें कि ऊपर के टुकड़े तेल में हैं या नहीं. हालांकि तेल की मात्रा अपनी रेसिपी के हिसाब से ही रखें और मनमाने तरीके से ज्यादा तेल न डालें.

अचार रखने के लिए साफ और पूरी तरह सूखा हुआ कांच का जार इस्तेमाल करें. उस जार में जरा भी पानी या नमी नहीं होनी चाहिए. अचार भरने के बाद ढक्कन अच्छी तरह बंद करें ताकि बाहर की हवा और नमी अंदर न पहुंचे. ढक्कन ढीला है या ठीक से बंद नहीं हो रहा है तो उसे बदल देना बेहतर है. अचार को खुले बर्तन या ऐसे डिब्बे में लंबे समय तक न रखें जिसमें हवा आसानी से अंदर जाती रहे.

अचार को सही जगह रखना भी उसकी उम्र बढ़ाने में मदद करता है. डिब्बे को गैस के ठीक पास न रखें क्योंकि वहां लगातार गर्मी और तापमान में बदलाव होता रहता है. खिड़की के पास या ऐसी जगह रखने से भी बचें जहां नमी और सीधी धूप ज्यादा आती हो. अचार के लिए सूखी और सामान्य तापमान वाली जगह बेहतर रहती है, खासकर बरसात में खुले हुए या कम नमक वाले अचार को रखने के तरीके पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए.

जब बड़े जार में अचार थोड़ा ही बचता है तो उसके अंदर काफी खाली जगह रह जाती है. ऐसे में जार के अंदर ज्यादा हवा रहती है. अगर मौसम में नमी भी हो तो अचार को संभालना और जरूरी हो जाता है, इसलिए अचार कम बचने पर उसे साफ और पूरी तरह सूखे छोटे एयरटाइट जार में रखा जा सकता है. जार के मुंह पर लगा तेल या मसाला भी साफ कर दें. इससे ढक्कन अच्छी तरह बंद रहेगा और सफाई भी बनी रहेगी.

अगर अचार की सतह पर सफेद या हरे रंग की फफूंदी दिखाई दे रही है तो सिर्फ ऊपर की परत हटाकर नीचे का अचार खाने की कोशिश न करें. फफूंदी दिखने के साथ बदबू, चिपचिपापन या अचार के असामान्य रूप से नरम होने जैसे संकेत भी मिल सकते हैं. ऐसे अचार को चखकर जांचना भी ठीक नहीं है. खासकर अगर पूरा अचार प्रभावित दिख रहा हो तो उसे खाने से बचना ही सुरक्षित तरीका है.

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