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Gulab Hal Recipe At Home: पाली का गुलाब हल अपने खास स्वाद और पारंपरिक अंदाज के लिए जाना जाता है. सावन के महीने में अगर आप घर पर कुछ खास मिठाई बनाना चाहते हैं, तो गुलाब हल एक स्वादिष्ट विकल्प हो सकता है. इसे पारंपरिक सामग्री और आसान तरीके से तैयार किया जा सकता है. गुलाब की खुशबू और मिठास इसे दूसरी मिठाइयों से अलग स्वाद देती है. घर पर गुलाब हल बनाने के लिए जरूरी सामग्री जुटाकर सही मात्रा और तापमान का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. तैयार होने के बाद इसे मेवे से सजाकर परोसा जा सकता है.
पाली. सावन का पवित्र महीना चल रहा है और हर शिवभक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए पूजा-अर्चना और विशेष भोग की तैयारियों में जुटा है. अगर आप भी इस सावन सोमवार या रोजाना की पूजा में भगवान शिव को कुछ खास, शुद्ध और सात्विक अर्पित करना चाहते हैं, तो पाली का विश्व प्रसिद्ध ‘गुलाब हलवा’ एक बेहतरीन विकल्प है.
शुद्ध दूध, मावे की मिठास और गुलाब की भीनी-भीनी खुशबू से तैयार होने वाला यह हलवा महादेव के महाभोग के लिए बिल्कुल उत्तम माना जाता है. तो चलिए, आज आपको बताते हैं कि पाली के इस पारंपरिक और ज़ायकेदार गुलाब हलवे को आप अपने घर पर ही स्टेप-बाय-स्टेप कैसे तैयार कर सकते हैं, ताकि आपका पूजा-प्रसाद बने और भी खास!”
सावन में एक बार फिर सुर्खियों में यह हलवा
पवित्र सावन माह के शुरू होते ही पाली शहर का यह पारंपरिक हलवा एक बार फिर सुर्खियों में है. इस बार सावन में भगवान शिव को विशेष प्रसाद के रूप में भोग लगाने के लिए इसकी मांग कई गुना बढ़ गई है. केवल दूध और शक्कर के अनोखे मेल से तैयार होने वाला यह हलवा हर त्योहार पर लोगों की पहली पसंद बन जाता है. सावन के इस पावन महीने में पाली के प्रसिद्ध मंदिरों और श्रद्धालुओं के घरों में महादेव को अर्पण करने के लिए हजारों किलो गुलाब हलवा तैयार किया जा रहा है.
इत्तेफाक से हुआ था आविष्कार
गुलाब हलवे के बनने की कहानी बेहद दिलचस्प है, जिसकी शुरुआत करीब 60 साल पहले पाली के भीतरी बाजार स्थित जैन मार्केट के पास मूलचंद कास्टिया की मिठाई दुकान से हुई थी. उस समय दुकान पर मुख्य रूप से रबड़ी बनती थी और वहां गुलाब पुरी नाम के कारीगर काम करते थे. एक दिन बचे हुए दूध का उपयोग करने के लिए उसमें शक्कर मिलाकर धीमी आंच पर पकाना शुरू किया गया. पकते-पकते जब दूध का रंग गाढ़ा मैरून हो गया और उसे ठंडा करके चखा गया, तो उसका स्वाद अद्भुत था. यही प्रयोग आगे चलकर ‘गुलाब हलवा’ के नाम से मशहूर हुआ और आज पूरे राजस्थान में इसके नाम की दुकानें खुल चुकी हैं.
गुलाब हलवा बनाने की स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी
सामग्री:
शुद्ध फुल क्रीम दूध
स्वाद अनुसार शक्कर
चुटकी भर इलायची पाउड
बनाने की विधि:
धीमी आंच पर कड़ाही चढ़ाना: सबसे पहले लोहे या तांबे की भारी कड़ाही में शुद्ध फुल क्रीम दूध डालकर उसे धीमी आंच पर उबलने के लिए रखा जाता है.
लगातार चलाकर गाढ़ा करना: दूध को बिना रुके लगातार चलाया जाता है ताकि वह नीचे से जले नहीं. धीरे-धीरे दूध गाढ़ा होकर मावे की रंगत लेने लगता है.
शक्कर मिलाना: जब दूध काफी हद तक सिमटकर दानेदार मावे में बदलने लगे, तब इसमें सही अनुपात में शक्कर मिलाई जाती है.
सटीक टाइमिंग और पकाना: शक्कर मिलने के बाद इसे धीमी आंच पर तब तक पकाया जाता है जब तक कि इसका रंग गहरा मैरून (गुलाबी-भूरा) न हो जाए. इसमें सबसे मुख्य भूमिका पकाने की टाइमिंग की होती है.
इलायची और ठंडक: अंत में इसमें हल्की इलायची मिलाई जाती है और इसे प्राकृतिक रूप से ठंडा होने के लिए रख दिया जाता है. ठंडा होने पर इसका असली दानेदार स्वाद और रंग निखर कर आता है.
वार्षिक 20 करोड़ से अधिक का कारोबार
बिना किसी कृत्रिम रंग या फ्लेवर के तैयार होने वाले इस हलवे के स्वाद के पीछे रेसिपी के अलावा पाली का खास क्लाइमेट और स्थानीय कारीगरों का बरसों पुराना हुनर भी है. जो भी इसका स्वाद एक बार चख लेता है, वह बार-बार इसे खाने पर मजबूर हो जाता है. यही कारण है कि पाली का यह प्रसिद्ध गुलाब हलवा आज सालाना 20 करोड़ रुपये से भी अधिक का कारोबार कर रहा है और इसकी महक विदेशों तक पहुंच चुकी है. सावन के इस महीने में महादेव के भोग के लिए इसकी रिकॉर्ड बिक्री जारी है.
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मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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