त्योहारों का सीजन शुरू होते ही देश में चीनी की कीमतों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जिस चीनी की इस साल भरपूर उपलब्धता की उम्मीद की जा रही थी, वही अब कई बड़े शहरों में करीब 40% तक महंगी हो गई है। बाजार में अचानक बढ़े दाम के बीच सरकार को भी घरेलू स्टॉक सुरक्षित रखने के लिए कई बड़े कदम उठाने पड़े हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि फिलहाल घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और पिछले साल का बचा बफर स्टॉक भी उपलब्धता बनाए रखने में मदद करेगा। लेकिन सवाल ये है कि जिस साल चीनी का सरप्लस अनुमान लगाया गया था, वह अचानक दाम क्यों बढ़ने लगे?
शुरुआत में थी बंपर उत्पादन की उम्मीद
मौजूदा चीनी सीजन 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक है। सीजन की शुरुआत में उद्योग को उम्मीद थी कि देश में करीब 34.9 मिलियन टन चीनी का उत्पादन होगा। यह पिछले साल के 29.6 मिलियन टन से करीब 18% ज्यादा होता। उत्पादन बढ़ने की उम्मीद के कारण सरकार ने चीनी मिलों को निर्यात की भी अनुमति दी। नवंबर 2025 में 15 लाख टन और फरवरी 2026 में 5 लाख टन अतिरिक्त चीनी निर्यात की मंजूरी दी गई। उस समय माना जा रहा था कि घरेलू जरूरत पूरी करने के बाद भी पर्याप्त चीनी बच जाएगी।
कुछ महीनों में बदल गया पूरा गणित
लेकिन जैसे-जैसे सीजन आगे बढ़ा, उत्पादन के अनुमान लगातार कम होते गए। फरवरी में अनुमान घटाकर 32.4 मिलियन टन और अप्रैल में 32 मिलियन टन कर दिया गया। अब सरकार का अनुमान करीब 30.6 मिलियन टन उत्पादन का है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे बड़े चीनी उत्पादक राज्यों में कम पैदावार इसका बड़ा कारण रही। महाराष्ट्र में ज्यादा बारिश से जलभराव के अलावा गन्ने में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों ने भी उत्पादन को प्रभावित किया।
निर्यात पर लगानी पड़ी रोक
उत्पादन अनुमान गिरने के बाद सरकार ने मई में चीनी निर्यात पर 30 सितंबर तक रोक लगा दी। इसके बाद घरेलू बाजार में उपलब्ध स्टॉक को लेकर सरकार और कारोबारियों की चिंता बढ़ती गई। त्योहारी सीजन को देखते हुए बाजार को उम्मीद थी कि अगस्त में चीनी की बिक्री का मासिक कोटा बढ़ाया जाएगा, लेकिन इसे पिछले साल की तरह 22.5 लाख टन पर ही रखा गया। इससे सप्लाई को लेकर दबाव और बढ़ गया।
18 अगस्त को कीमतों ने बनाया रिकॉर्ड
जून के आखिर से चीनी के एक्स-मिल दाम लगातार बढ़ रहे थे। अगस्त के पहले हफ्ते में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में कीमतें करीब 4880-4980 रुपये प्रति क्विटंल तक पहुंच गईं। 18 अगस्त को यह बढ़कर करीब 5350 रुपये प्रति 100 किलो हो गई। अगले ही दिन उत्तर प्रदेश में एक्स-मिल कीमत करीब 5850 रुपये प्रति क्विटंल पहुंच गई, जो एक हफ्ते भर पहले करीब 4830 रुपये थी। कर्नाटक की कुछ मिलों में 20 अगस्त को कीमत 7100 रुपये प्रति 100 क्विटंल तक पहुंचने की खबर सामने आई।
सरकार ने उठाए कई बड़े कदम
कीमतों में अचानक तेजी के बाद सरकार ने बड़े औद्योगिक खरीदारों के लिए स्टॉक रखने की सीमा और सख्त कर दी। सितंबर से उन्हें अपनी जरूरत के 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा करीब एक दशक में पहली बार सरकार ने चीनी आयात का रास्ता खोला और 100% आयात शुल्क हटा दिया। 20 अगस्त को 10 लाख टन चीनी आयात की अनुमति दी गई।